रेवांचल टाईम्स - शुक्रवार को मोहर्रम माह की 10 तारीख योमे आसूरा पर मातमी धुनों और गाजे-बाजे के साथ बाबा की सवारियां, ताजिया और बुर्राक निकले इस मौके पर मंडला, नैनपुर, बिछिया, निवास, नगर में की गई सजावट आकर्षण का विषय कोरोनाकाल के चलते चहल पहल कम ही रही। शाम करीब 4 बजे से नगर में विभिन्न स्थानों से ताजिया और बुर्राक निकलना शुरू हुए। वही मंडला नगर के उदय चौक में सभी ताजिया एकत्र हुए वही सुरक्षा की द्रष्टि से जगह से नगर में पुलिस व्यवस्था की गई वही सवारियां गश्त करते हुए नैनपुर नगर की जामा मस्जिद के पास एकत्र हुए।
यहां बड़ी संख्या में लोगों की भीड़ मौजूद रही। यहां से ताजिया और बुर्राक लेकर लोग करबला की तरफ रवाना हो गए। साल भर के लिए ताजिया और बुर्राक को विदा कर दिया गया। जहां-जहां ताजिया और बुर्राक रुके, लोगों ने मन्नतें मांगी, फातिहा पढ़ी। इसी तरह से नगर के कई स्थानों सहित बाबा की सवारियां निकलीं। लोगों ने बाबाओं से मुलाकात की। समस्याएं बताईं, समाधान पूछा। मस्जिद चौक बांसुरी वादक चौक सहित अन्य कई जगहों से भी बाबा की सवारियां निकलीं।
इस दौरान अखाड़ा दलों ने हैरतंगेज कारनामे भी दिखाए बताया कि योमे आसूरा के दिन लोगों ने रोजा रखा। कुरान की तिलावत की। इस दिन का इंतजार साल भर रहता है, लिहाजा लोगों ने पूरा दिन अल्लाह की इबादत में निकाला। नमाज पढ़ी, कुरान की तिलावत की एवं अल्लाह का जिक्र किया। अपने लिए, रिश्तेदारों सहित समाज और देश की अमन-सलामति की दुआ मांगी। महिलाओं ने घरों में इसी तरीके से दिन गुजारा।
मोहर्रम माह से इस्लामी कैलेंडर का नया साल भी करीब 10 दिन पहले शुरू हो गया है। जिल हिज का माह जो गुजर गया, उसमें भी कुर्बानी थी, मोहर्रम माह भी कुर्बानी का है। मोहर्रम माह में हुजूर के नवासे हजरत इमाम हुसैन ने अपने 72 साथियों के साथ कुर्बानी दी थी।
नैनपुर से राजा विश्वकर्मा की रिपोर्ट


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