रेवांचल टाईम्स - सुविधाओ के लिए तरस रहा नैनपुर का सिविल अस्पताल स्टाफ की कमी और अस्पताल में नहीं मिल रही बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं
नैनपुर नगर में नवनिर्मित 100 बिस्तर अस्पताल का कोरोना काल के चलते लोकार्पण नहीं हो पाया। कोरोना काल में नगर क्षेत्र के लोगों को अपनी सेवा देने कम स्टाफ व डाक्टरों की कमी के बाद भी खोल दिया गया। लेकिन अब लोगों को डाक्टरों की कमी और सुविधाओं की कमी खलने लगी है। नगर से तीन किलोमीटर की दूरी तय करने ऑटो का किराया 100 रुपए देना पड़े। मरीज सिविल अस्पताल अपना इलाज कराने पहुंचे ओर डाक्टर की कमी के चलते इलाज न मिल पाए। इससे बड़ी विडंबना ओर क्या हो सकती है।
विशेषज्ञ डाक्टरों और स्टाप की कमी
मेडिसिन विशेषज्ञ, शल्य क्रिया विशेषज्ञ, स्त्री रोग विशेषज्ञ, निश्चेतना विशेषज्ञ के दो-दो पद स्वीकृत हैं, जो सभी पद अभी रिक्त पड़े हैं। शिशु रोग विशेषज्ञ के दो में से एक पद रिक्त है। नेत्र रोग विशेषज्ञ, पैथोलॉजी विशेषज्ञ, अस्थि रोग विशेषज्ञ, दंत चिकित्सक, मैट्रन के एक-एक पद स्वीकृत हैं जो रिक्त पड़े हुए हैं। चिकित्सा अधिकारी के 5 पद स्वीकृत हैं जो 4 रिक्त पद है। स्टाफ नर्स 30 होनी चाहिए, लेकिन अब तक सिर्फ 22 नर्स हैं। लैब टेक्नीशियन, ओटी अटेंडेंट के तीन पद स्वीकृत हैं। लेकिन दो-दो पद अब भी रिक्त हैं।
ये आंकड़े बताने के लिए काफी हैं कि भवन नए बन जाने से सुविधाओं में इजाफा तो हो सकता है। लेकिन जब चिकित्सक और नर्सिंग स्टाफ के साथ ही जरूरी विभाग के पद रिक्त पड़े हैं तो लोगों का अच्छा ईलाज और उनकी देख रेख में मुश्किलें आ रही हैं।
रोजाना पहुंचते हैं बालाघाट सिवनी के मरीज
नैनपुर विकास खंड की 74 ग्राम पंचायतो से जनता उपचार के लिए यहां आती है। इसके अलावा बालाघाट, सिवनी जिले के नजदीकी गांव देहात के मरीजों का नैनपुर अस्पताल में इलाज कराने का सिलशिला अनेक वर्षों से होता आ रहा है। जो अब 100 बिस्तर सिविल अस्पताल होने से ओर बढ़ गया है। प्रतिदिन यहां करीब 200 से 250 मरीजों का आना लगा रहता है। ओपीडी सहित यहां गर्भवती महिलाओं की प्रसूति के लिए बड़ी संख्या में महिलाएं यहां प्रसव के लिए पहुंचती हैं। इलाज के लिए आये लोगो को स्टॉफ की कमी से भारी मुसीबतें झेलनी पड़ती हैं।
आमजन की मांग पुराने अस्पताल को भी चालू करें
सिविल अस्पताल की दूरी अधिक होने के कारण आम जनों को बहुत ही परेशानी का सामना करना पड़ रहा है पहले तो गरीब वर्ग के लोगों को आने जाने में बहुत ही दिक्कत हो रही हो ऑटो से आने जाने में लोगों को 200 रुपयों का भुगतान करना पड़ रहा है दिन में तो जैसे तैसे आवागमन हो जाता है लेकिन रात में सुनसान रास्ते होने के कारण डर बना रहता है और तो और रात में कोई भी साधन आने जाने के लिए नहीं मिल पाता जैसे तैसे रात में आ भी जाओ तो रात में जाने का कोई भी साधन मौजूद नहीं है साथ ही अगर किसी चीज की जरूरत पड़ जाती है तो बार-बार आना जाना पड़ता है अस्पताल के निकट कोई भी खाने पीने आवश्यक वस्तुओं की दुकानें मौजूद नहीं है मरीजों के परिजनों का कहना है कि दुकाने ना होने के कारण खाने पीने की चीजें मैं बहुत ही दिक्कत हो रही है क्योंकि अस्पताल से सिर्फ मरीजों को खाना मिलता है वही आमजन कहते है अस्पताल तो ऐसा लगता है कि नैनपुर में है की नहीं वहीं आम जनों ने मांग की है कि पुराने अस्पताल को भी चालू किया जाए जिससे गरीब जनों को अक्समात सुविद्याये अस्पताल की सुविधाएं मिल सकें और एमरजेंसी में इलाज के इतनी दूर जाकर परेशानी का सामना ना करना पड़े
इनका कहना है
डाक्टरों और स्टाप की कमी है। यहां नैनपुर के अलावा सिवनी और बालाघाट जिले के गांवों से बड़ी संख्या में मरीज यहां उपचार कराने आते हैं। विभाग को कई बार पत्र लिख कर अवगत कराया गया है। लेकिन स्टाप कम होने से परेशानियों का सामना करना पड़ता है।
डॉ सुरेन्द्र बरकड़े, बीएमओ नैनपुर

No comments:
Post a Comment