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Sunday, August 1, 2021

ब्राडगेज परियोजना को लगा कोरोना ग्रहण आदिवासी क्षेत्र के साथ छलावा... दो जोनों के पेंच में फसकर रह गई ब्राडगेज

 




रेवांचल टाइम्स नैनपुर - उत्तर से दक्षिण भारत की दूरी को पाटने वाली जबलपुर-नैनपुर-गोंदिया ब्राडगेज परियोजना अंचल के लोगों को फायदा दे पाने में असमर्थ रही । जैसे तैसे अमान परिवर्तन का कार्य तो पूरा हुआ किंतु कोरोना के ग्रहण लगते ही यह परियोजना कहीं गुम हो गई । आज ब्राडगेज के नाम पर नैनपुर मण्डला बालाघाट क्षेत्र के लोगों को दिखाया जाने वाला सपना धूल धूसरित होते नजर आ रहा है । वर्तमान में इस रेल लाईन में कोविड स्पेशल ट्रेन के नाम पर महज दो साप्ताहिक यात्रीगाडिया दौड़ाई जा रही हैं जो छोटे तबके और सामान्य जनों की यात्रा से बहुत दूर हैं । कोरोना काल मे बंद होने के बाद से आज तक यात्रियों को पैसेंजर ट्रेनों का इंतजार है । 


    *आखिर कब चलेगी पैसेंजर ट्रेन*


जबलपुर से नैनपुर होकर गोंदिया और मण्डला तक लगभग 280 किमी के इस रेल ट्रैक में छोटे बड़े 40 स्टेशन आते है । जहां रोजमर्रा का जीवन यापन करने वाले लोगों के लिए जींवन दायिनी मानी जाने वाली पैसेंजर ट्रेनें इस ट्रैक से डेढ़ साल से भी अधिक समय से नदारत है । इस क्षेत्र के यात्रियों को बड़े शहरों से जोड़ने वाली कोई भी नियमित रेलगाड़ी उपलब्ध नही है । लगातार यहां के रहवासी इस ट्रैक पर पैसेंजर ट्रेन चलाये जाने की मांग कर रहे है । किंतु यात्रियों की सुविधा के नाम पर किया गया अमान परिवर्तन और महज छलावा ही साबित हो रहा है ।


*चार जिले और तीन राज्यो की कनेक्टिविटी है रोड़ा*


इस रेल ट्रैक का एक छोर पश्चिम मध्य रेल से जुड़ा है । जबकि 99 प्रतिशत हिस्सा दक्षिण पूर्व मध्य रेल का है । यही बात रेल ट्रैक से जुड़े अंचल की है । जिसमे चार जिलो के साथ महाकौशल, छतीसगढ़, विदर्भ और दक्षिण भारत को जोड़ने में ही मानो सबसे बड़ा रोड़ा अटका हुआ है। दूसरा छोर होने के कारण दपूमरे शायद इस मार्ग पर ज्यादा दिलचस्पी नही ले रहा है। दो जोनों के पेंच में फसकर इस रेल ट्रैक पर नई ट्रेनों को दौड़ाए जाने के कई एक प्रस्ताव उलझकर रह गए है । लिहाजा आज भी उत्तर से दक्षिण भारत को जोड़ने वाला सपना एक  सब्जबाग ही साबित हो रहा है । हालात यह है कि बड़ी बड़ी यात्रीगाडियो की खुशियों की चाह में डूबा क्षेत्र महज एक पैसेंजर ट्रेन को तरस रहा है ।


*पिछड़े आदिवासी क्षेत्र के साथ छलावा*


जबलपुर नैनपुर गोंदिया के साथ मण्डला आदिवासी अंचल से न केवल पेशेनज़र ट्रेन बल्कि लंबी दूरी की यात्रीगाडियो का संचालन कर इस क्षेत्र के भाग्य के द्वार खोल दिये जायेंगे । कुछ ऐसा ही सपना जनप्रतिनिधियों ने लिगों को दिखाया था । जनता भी समझ रही थी कि ब्राडगेज की इस परियोजना के सुरु होते ही अंचल में विकास के नये नये दरवाजे खुलेंगे । इसका सीधा फायदा अंचल के पुछल्ले शोषित आदिवासियों को मिलेगा । ऐसा लगने लगा था कि नैरोगेज की भांति ही ब्राडगेज भी यहां के लोगो की जीवनदायिनी बन जाएगी ।  मगर रेल विभाग की नादिरशाही और अधिकारियों की नजर अन्दाजगी का शिकार होकर यह रेल लाईन राह गई है। यहाँ एक वर्ष पहले से ही यात्रियों की सहूलियत के लिए मेमू रैक लाकर खड़ा कर दिया गया है । मगर पश्चिम और दपूमरे जोन के बीच फसकर आज तक ट्रेन के संचालन की शुरुआत नही हो सकी ।


मत दो बड़ी गाड़ी पैसेंजर ट्रेन ही चला दो


 मण्डला जिला मुख्यालय तक रेल ट्रैक लगभग एक वर्ष पूर्व बनकर तैयार ही चुका है । सीआरएस निरीक्षण जैसी औपचारिकताएं भी पूर्ण कर ली गई है । किंतु कोरोना का हवाला देकर अंचल के रहवासियों को ट्रेन की सुविधा से वंचित रखा जा रहा है।  लोगो की मांग है कि हमें नही चाहिए बड़ी-बड़ी गाड़िया हमारे क्षेत्र में रोजाना की आवाजाही के लिए पैसेंजर ट्रेन ही चालू करा दो।  ताकि जबलपुर और नागपुर जैसे बड़े शहरों तक पहुंच सीधी हो सके । इस ट्रेक पर रेलगाड़ियों का संचालन बंद होने से लोग खासे कुपित है और अब इसे चालू करने के लिए आंदोलनों तक कि सुगबुगाहट होने लगी है। लगता है कि नेरोगेज को ब्राडगेज में परिवर्तित करने के लिए किये गए आंदोलनों के बाद ब्राडगेज लाईन में पैसेंजर ट्रेनों के संचालन के लिए भी जनता को आंदोलन का रुख इख्तियार करना होगा । तब कही जाकर रेल प्रशासन की नींद खुलेगी ।


        *इनका कहना है*

           ब्राडगेज की सुरुआत के साथ ही यहां के लोगों को विकास का जो सपना दिखाया गया था वो महज छलावा ही साबित हुआ है । इस ट्रैक में मण्डला नैनपुर और जलबपुर नैनपुर गोंदिया के लिए पैसेंजर ट्रेनो को जल्द सुरु करना चाहिये।

          विकास शर्मा  सामाजिक कार्यकर्ता नैनपुर

           व्यापारियों को अपने व्यापार के लिए जबलपुर गोदिया, बालाघाट जाना होता है। बस में किराया ज्यादा ओर सुविधा कम मिलने से परेशानियों का  सामना करना पड़ता है। 

             महेश नागपाल व्यापारी नैनपुर


            पैसेंजर ट्रेनों का संचालन रोककर कोरोना को नियंत्रण करने की बात समझ से परे है। लगता है रेलवे को यहां के लोगो को होने वाली परेशानियों से कोई सरोकार नही है। अब ट्रेन के संचालन के लिये लोगो को आंदोलन के लिए बाध्य होना पड़ेगा।

                जिनेन्द्र साहू व्यापारी नैनपुर


           शिक्षा प्राप्त करने छात्र छात्राओं को बालाघाट, इंदौर, भोपाल, जबलपुर सहित अन्य महानगरों को जाने बस या कार का उपयोग करने में किराया बहुत लग रहा है। जिससे छात्र छात्रों को शिक्षा प्राप्त करने परेशानी हो रही है जल्द से जल्द रेल्वे वोर्ड को पैसेंजर ट्रेन चलाई जाने निर्णय लेना चाहिए।

                   जितेन्द्र ठाकुर छात्र नैनपुर


       गम्भीर बीमारी के उपचार के लिए मरीजों परिजनों को नागपुर जबलपुर सहित अन्य महानगरों को जाने मोटी रकम खर्च कर चार चका वाहन का उपयोग करना पड़ रहा है। यात्री रेल प्रारंभ किया जाना जरूरी है। जिससे मरीजों को राहत सुविधा मिल सके।

                 नागेश राउत नैनपुर

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