रेवांचल टाईम्स - आदिवासी बाहुल्य जिला मंडला में इन दिनों झोलाछाप डॉक्टरों की बाढ़ आई है जहाँ एक तरफ जिले में कोरोना संक्रमण जैसे महामारी फैली हुई है वही गाव गाव में कुकरमुत्तों की तरह बड़ी तेजी से अपना कारोबार कर रहे है झोलाछाप डॉक्टर वही एक तरफ लोगों का सरकारी स्वास्थ्य विभाग से मोह भंग हो चुका है जिसका फायदा सीधे झोलाछाप उठा रहे है और जिला प्रशासन केवल कार्यवाही के नाम पर सिफर है।
झोलाछाप डॉक्टर और बंगाली डाँक्टर्स पर मंडला स्वास्थ्य विभाग मेहरबान विगत मार्च अप्रैल माह कोरोना काल में जिले भर में फर्जी डिग्रीधारी सहित झोला छाप डाँक्टर्स पर संबंधित विभाग पुलिस राजस्व अमला घूम घूम कर क्लीनिक पर ताला लगा रहा था लोगों को जब प्रारम्भिक स्वास्थ्य सुविधाओं की जरूरत थी तब स्वास्थ्य विभाग फर्जी डिग्रीधारी डाँक्टर्स के क्लीनिक सील करवा रहा था पर आज परिस्थिति सामान्य हो चली है तब स्वास्थ्य विभाग के ब्लाक अधिकारी फर्जी डिग्रीधारी डाँक्टर्स से सांठगांठ कर पुनः क्लीनिक चालू करने की खुली छूट प्रदान कर रहे हैं कोरोना काल के दौरान लफरा और अन्य जगहों में जमे और बाहर से आये बंगाली डाक्टर की क्लीनिक पर लगातार सप्ताह में दो बार दविश देकर अंजनिया तहसीलदार बम्हनी टीआई ने बंगाली डाँक्टर का क्लीनिक सील किया था लेकिन अचानक दो दिन से उक्त क्लीनिक की सील खोल दी गई है और डाक्टर पुनः ईलाज शुरू करना शुरू कर दिया है साथ ही प्रचारित किया जा रहा है कि अब उक्त डाक्टर का कोई कुछ नहीं बिगाड़ सकता है साहब से बात हो चुकी है। और जहाँ लगे शिकायत करे कोई कुछ नही करने वाला है क्योंकि सब को केवल पैसा चाहियें और जिम्मेदार लोगों अपना कमीशन दिख रहा है आज कमीशन के चलते जिले में सभी अबैध कारोबारीयो के हौसले बुलंद है।

No comments:
Post a Comment