रेवांचल टाइम्स :- नैनपुर में खुले रूप से असुरक्षित खाद्य सामग्री बेधड़क बिक रही है। ऐसी खाद्य सामग्रियों का लैब परीक्षण कराने जिले का खाद्य एवं औषधि प्रशासन विभाग जरा भी जागरूक नहीं है। एवं ना ही किसी प्रकार की कार्रवाई होटल व्यापारियों पर नैनपुर नगर में दिखाई देती है।
लिहाजा जनस्वास्थ्य पर खतरे का अंदेशा बना हुआ है। मक्खियां भिनभिनाती है उन जगहों पर जहां खाद्य सामग्रियां तैयार की जा रही है, दूसरी ओर गंदगी युक्त जगहों पर चाय, नाश्ते, मसाले तैयार किए जा रहे हैं। हालात यह है कि तैयार होकर खुले रूप से बिक रही खाद्य सामग्री जनस्वास्थ्य के लिए लगातार खतरा बन रही है।
नगर के अधिकतर होटल ग्राहकों को नाश्ता परोसने के लिए वैसे तो कागज के दोने इस्तेमाल करते हैं लेकिन कुछ होटलों, में लोगों को नाश्ता रखकर परोसने की प्लेंटें भी स्वास्थ्य की दृष्टि से सुरक्षित नहीं है। नाश्ते की प्लेट धोने के लिए होटलों में पानी की किल्लत है। या पानी लाने के लिए मजदूर का खर्च बचाने के चलते कम पानी में ही प्लेट धोने का काम कराया जाता है।
गंदगी से सराबोर होटलों की रसोई
जयपुर नगर में होटलों में नाश्ता तैयार करने की रसोई में भारी अव्यवस्था देखी जा सकती है । यहा किसी भी प्रकार की स्वच्छता का ख्याल बिल्कुल भी नहीं रखा जाता रसोई घर में भारी मात्रा में गंदगी के बीच होटलों में रसोई का कार्य किया जा रहा है।
इसके बाद सुबह से एक बार समोसे के लिए आलू का मसाला तैयार किया जाता है एवं वही सुबह बना हुआ आलू का मसाला शाम तक समोसे में डाला जाता है। एवं खुले में रखने की वजह से आलू के मसाले पर मक्खियां बार-बार बैठती हैं। मसाला ढंक कर नहीं रखा जाता है। समोसा बनाकर तैयार करने के बाद इसे ट्रे में खुला रख दिया जाता है जो कि दिन भर खुले में ही रखा रहता है। पकाने के दौरान भी सावधानी नहीं बरती जा रही है।
पुरानी चासनी में ही डाल दी जाती है जलेबी
जलेबी बनाने के लिए भी सफाई में भारी लापरवाही देखी जाती है। हाथ से तैयार किए गए पेस्ट को पुराने और गंदे कपड़े में डाला जाता है एवं इसे काले गर्म तेल में डालकर तला जाता है और फिर पुरानी चासनी (सीरा) में जलेबी डाल कर तैयार की जाती है। खोए की जलेबी बताकर ग्राहक को मैदे की जलेबी परोसी जाती है।
मिठाइयों में एक्सपायरी डेट नहीं लिखा जाता
फूड सेफ्टी स्टैंडर्ड अथॉरिटी ऑफ इंडिया (एफएसएसएआई) की ओर से जारी गाइडलाइन का ज्यादातर मिष्ठान भंडार के संचालक गंभीरता से पालन नहीं कर रहे। शहर की प्रमुख मिठाई दुकानों पर इस नियम का उल्लंघन हो रहा। दुकानदार मिठाई कितने दिन तक इस्तेमाल कर सकते हैं, यह तिथि नहीं लिख रहे हैं।
एफएसएसएआई ने कुछ समय पहले आदेश जारी कर मिठाई विक्रेताओं को चेतावनी देते हुए कहा था कि अब मिठाई खुले में नहीं बेची जाएंगी। मिठाई पैक कर बेची जाएंगी और उस पर मैन्युफैक्चरिंग व एक्सपायरी डेट (निर्माण व मियाद खत्म होने की तिथि) दोनों लिखनी होंगी, लेकिन नैनपुर के लगभग सभी दुकानदार ऐसा नहीं कर रहे हैं। बल्कि वह ग्राहकों के पूछने पर उन्हें मुंहजुबानी बता रहे हैं कि मिठाई को कब तक इस्तेमाल कर सकते हैं।
किस कोर्ट में जाएगा केस, इस तरह होता है तय
सैंपल की रिपोर्ट तीन तरह से आती है। सब स्टैंडर्ड, मिसब्रांड और अनसेफ। अगर सैंपल रिपोर्ट सब स्टैंडर्ड या मिसब्रांड है तो उसका केस एडीसी कोर्ट में जाएगा। अगर अनसेफ है तो वह केस सीजेएम कोर्ट में जाएगा। सीजेएम कोर्ट में जो केस जाता है, उसमें जेल भी हो सकती है। सब स्टैंडर्ड रिपोर्ट तब आती है, जब खाद्य पदार्थ मापतोल के हिसाब से कम फैट वाला हो या लेबल न हो। मिसब्रांड रिपोर्ट तब आती है, जब खाद्य पदार्थ पर गाय, भैंस की फोटो हो, इस्तेमाल तिथि भी छोटे अक्षर में हो या लेबल न हो। अनसेफ की रिपोर्ट तब आती है, जब खाद्य पदार्थ में हानिकारक केमिकल का इस्तेमाल किया गया हो।
खाद्य सुरक्षा अधिनियम के तहत होटल, ढाबे, किराना दुकान, खाद्य सामग्री तैयार करने वाले, प्रस्संकरण करने वाले और पैकेजिंग करने वालों को वार्षिक आय बताकर निर्धारित रकम अदा कर लाइसेंस बनवाना आवश्यक होता है। नगर में सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार कुछ ही होटल व्यवसाई इस नियम का पालन कर रहे हैं लेकिन कुछ होटल व्यवसायी बिना लाइसेंस लिए धड़ल्ले से व्यवसाय कर रहे हैं लेकिन जिले का खाद्य एवं औषधि प्रशासन विभाग ऐसे दुकानों पर मानकों के पालन की निगरानी नहीं कर रहा है, एवं नाही किसी प्रकार की कार्रवाई कर रहा है। जिससे जनस्वास्थ्य से लगातार खिलवाड़ हो रहा है।
✒️ नैनपुर रेवांचल टाइम्स से शालू अली की रिपोर्ट✒️

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