रेवांचल टाइम्स :- नगर के आधा दर्जन वार्ड सहित ग्राम पंचायत निवारी कृषि भूमि को खरीदकर व शासकीय नाला सहित अन्य भूमि को भूमाफिया द्वारा कब्जा कर नियम कायदों को ताक पर रखकर जमीनों की खरीद-फरोख्त धड़ल्ले से की जा रही है। बगैर डायवर्सन कराए जमीन की खरीद-फरोख्त जोरों से चल रही है। भूमि को डाइवर्ट नहीं कराने से शासन को लाखों रुपए की राजस्व हानि भी हो रही है। नगर के भू माफियाओं ने शहर की बजाय अब गांव का रुख कर लिया है अवैध कॉलोनी बसाने का का काम शुरू कर दिया है। किसानों की कृषि भूमि को औने पौने दामों में खरीदकर या एग्रीमेंट कराने के बाद अवैध मोरम से सड़कों का निर्माण कर नक्शा काट के टुकड़ों में जमीन बेची जा रही है। भूमिहीन लोग आशियाने की उम्मीद में नियमों को अनदेखी कर उनसे जमीन खरीद रहे हैं। इससे भूमाफिया जहां मोटी कमाई कर रहे हैं। तो वहीं सरकार को लाखों रुपए का चूना लगा रहे हैं।
नगर में चल रहा अवैध कॉलोनी बनाने का कारोबार-
भू माफिया गैरकानूनी तरीके से काम को अंजाम देने में लगे हैं इस पर प्रशासनिक अमले ने पूरी तरह आंखें बंद रखी है। जैसे उनकी नजरों में अवैध निर्माण कार्य किए ही नहीं जा रहे हो माना जा रहा है भू माफियाओं को प्रशासनिक संरक्षण मिल रहा है यही वजह है कि नगर सहित निवारी में अवैध कॉलोनी बनाने का कार्य एक नहीं अनेक स्थानों में किया जाना प्रारंभ है। निवारी के लोगों का कहना है कि, गांव में भू माफियाओं का जोर है। वह गांव में अवैध रूप से कॉलोनी बसा रहे हैं।
जो लोग प्लाट खरीद रहे हैं उनमें अधिकतर सरकारी नौकरी पेशा लोग बाहरी हैं जिनको जमीन के पिछले रिकॉर्ड के बारे में कोई जानकारी नहीं है जिसका पूरा लाभ भूमाफिया उठा रहे हैं। सूत्रों की मानें तो भू माफियाओं के राजस्व अधिकारियों से मधुर संबंध और गुलाबी नोटों के चलते कृषि योग्य भूमि पर प्लाटिंग करने के बाद भी उन पर कोई आंच नहीं आती है जिससे वह कानून को ठेंगा दिखाते हुए बिना लाइसेंस के ना केवल जमीन की खरीद-फरोख्त के धंधे में हाथ डालकर लाखों के वारे न्यारे कर रहे हैं। बल्कि मौका हाथ लगते ही कृषि योग्य भूमि पर प्लाटिंग कर सरकार द्वारा लागू नियमों का सरेआम उल्लंघन भी कर रहे हैं।कृषि भूमि को समतल कर अवैध रूप से प्लाट काट कर बेचा जा रहा है। वह पूर्ण रूप से अवैध है जबकि वर्तमान में राज्य शासन अवैध कालोनाइजर पर सख्ती बरत रही है। नित नए नए नियम बनाए जा रहे हैं तथा नियम अनुसार पंजीयन कराने और डायवर्सन के साथ विधिवत अनुमति लेने तथा मूलभूत सुविधा होने के बाद ही रजिस्ट्री करने के नियम है। फिर भी पटवारी पर्ची बना रहे हैं और रजिस्टार रजिस्ट्री कर रहे हैं।
बिना डायवर्सन और बिना सक्षम अधिकारी की अनुमति के खुलेआ प्लाट बेचने का धंधा आखिर किस के सह पर चल रहा है यह समझ से परे लग रहा है।
थांवर परियोजना की नहर केनाल को काटकर बनाई जा रही सड़क-
शासकीय जमीन नहर की पटरी केनाल को काटकर सड़के बनाई जा रही है। तथा कुछ स्थानों में सड़कें बनाई जा चुकी है, सिंचाई विभाग के उपयंत्री से लेकर एसडीओ एवं मंडला ई भूल बैठे हैं कि नहर को तोड़ना पूर्णता कानूनन अपराध है। फिर भी नहर की तोड़फोड़ करने वाले भूमाफिया पर कार्यवाही ना करते हुए भू माफियाओं को सहयोग करते आ रहे हैं। नगर के वार्ड क्रमांक 9 ठेकेदारी मोहल्ला में नहर को काटकर सड़क बना दी गई इसी तरह ग्राम निवारी में भी नहर की करीब 1 से डेढ़ एकड़ जमीन पर कब्जा कर सड़क बनाने मुरूम डाली जा चुकी है। खनिज विभाग के सहयोग से अवैध मोरम की निकासी नगर के समीप क्षेत्रों से अवैध खदान बनाकर 50 हजार घन मीटर मुरम निकालकर भूमाफिया द्वारा सड़क बनाई जा रही है।
तथा खेतों को समतलीकरण किया जा रहा है विडंबना देखें शासकीय कार्य के लिए शासन मोरम की रॉयल्टी ठेकेदार से ली जाती है। वहीं वाहन मालिक व भू माफिया अवैध मोरम निकालकर सड़क बनाए या समतलीकरण करें तो कोई रॉयल्टी नहीं सिर्फ जेब खर्च लिया जा रहा है। खनिज विभाग के आला अधिकारी आंख में पट्टी बांधे बैठे हैं और शासन को लाखों का चूना लगाने वालों को सहयोग कर रहे हैं।
एसडीएम ने किया था अवैध कालोनियों का निरीक्षण पर कार्यवाही जस की तस-
नगर की अवैध कालोनियों का निरीक्षण गत दिनों 4 दिसंबर 2020 को एसडीएम सुश्री सेवाली सिंह नैनपुर एवं मुख्य नगरपालिका अधिकारी शिव प्रसाद धुर्वे के द्वारा किया गया था।
किंतु कोई कार्रवाई आज तक नहीं हो पाई बल्कि जिन अवैध कालोनियों का निरीक्षण किया गया उन्हीं कालोनियों में निरीक्षण के बाद नगर पालिका के द्वारा विद्युत पोल ठेकेदार के माध्यम से लगाया जा रहा है।
✒️ नैनपुर रेवांचल टाइम्स से शालू अली की रिपोर्ट ✒️

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