रेवांचल टाइम्स - वर्ष 2016 में तत्कालीन उपाध्यक्ष, नर्मदा घाटी विकास विभाग प्राधिकरण के रजनीश वैश्य ने एक अखबार को बताया था कि "हमें वर्ष 2024 तक नर्मदा जल का उपयोग करना है।अब निर्णय किया गया है कि नर्मदा पर बङे बांध नहीं बनेंगे,बल्कि पानी लिफ्ट करेंगे।इसके लिए पूरी कार्ययोजना तैयार है।इस तरीके से ज्यादा क्षेत्र में सिंचाई क्षमता विकसित कर सकेंगे।" ज्ञात हो कि नर्मदा जल विवाद अभिकरण द्वारा नर्मदा में उपलब्ध 28 एमएएफ (मिलियन एकङ फीट) पानी में से 18.25 एमएएफ पानी का इस्तेमाल मध्यप्रदेश को 2024 तक सुनिश्चित करना है।उपाध्यक्ष रजनीश वैश्य द्वारा दिया गया वक्तव्य को तब और बल मिला जब 3 मार्च 2016 को विधानसभा में पूछे गए एक सवाल के जवाब में लिखित बताया कि" बसानिया,राघवपुर, रोसङा,अपर बुढनेर,अटरिया, शेर और मछरेवा बांध को नए भू - अर्जन अधिनियम से लागत में वृद्धि होने,अधिक डूब क्षेत्र होने,डूब क्षेत्र में वन भूमि आने से असाध्य होने के कारण निरस्त की गई।दूसरा चिंकी(नरसिंहपुर)बांध में अत्यधिक डूब क्षेत्र के कारण इसे उदवहन सिंचाई रूप में निर्मित किया जा रहा है।
निरस्त की गई बांधो में से मंडला - डिंडोरी की बसनिया और राघवपुर बांध की कार्ययोजना तैयार कर लिया गया है।इन परियोजनाओ की प्रशासकीय स्वीकृति 1 अप्रेल 2017 को दे दिया गया है।इन बांधो को फिर से शुरू करने के पीछे मुख्य कारण है बसनिया से 100 और राघवपुर से 25 मेगावाट जल विद्युत बनाना।जबकि छोटे - छोटे बांध बनाकर लिफ्ट से सिंचाई करना ज्यादा उपयोगी है और इसकी लागत भी कम आएगी।इन दोनों परियोजनाओ की लागत 3792.35 करोङ, 79 गांव प्रभावित होगा और 10,943 हैक्टेयर जमीन डूब में आएगा।जिसमें 2107 हैक्टेयर घना जंगल भी शामिल है।


No comments:
Post a Comment