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Tuesday, July 6, 2021

मामा के प्रदेश में आदिवासी परिवार पर पुलिस का दानवीय रूप मामा का मौन व्रत आख़िर क्यों--?

 



        


रेवांचल टाईम्स -  मध्यप्रदेश आदिवासी बहुल्य प्रदेश होने से आदिवासीयों के कारण वन संपदा तथा घने जंगल आज भी सुरक्षित है। जिनकी देख-रेख एवं वन उपजों से पीढ़ी दर पीढ़ी उक्त समाज आश्रित है और उस पर जीवित है और उनके द्वारा संरक्षित वनों की शुद्ध हवा में आज हम निरोग्य जीवन व्यतीत कर रहे है ।परंतु यह भी कटु सत्य है कि उक्त समाज हमेशा ठगी का शिकार होते आया और अन्याय अत्याचार अनाचार असमानता शोषण का भी शिकार होता आ रहा है ओर हो रहा है। चाहे वह कांग्रेस की सरकार रही हो या फिर भारतीय जनता पार्टी की सरकार। इनके शासन काल मे बिचौलिए दलाल एवं कार्पोरेट घरानों ने खुलकर दोहन किया है परंतु पिछला सारे रिकॉर्ड तोड़ने हुये भारतीय जनता पार्टी के सत्रह साल शासन काल में एस.सी. एस.टी. का उत्पीड़न शोषण तो बढ़ा ही है । लेकिन ओबीसी भी असमानता और शोषण की चक्की में पिस रही है। जबकि पिछड़े वर्ग से ही हमारा मुख्यमंत्री आता है । पिछड़े वर्ग के लोगों के अंदर सुगबुगाहट शुरू हो गई है कि पिछड़ा पिछड़े का ही शोषक है परंतु वह भी क्या करें क्योंकि उसकी लगाम कहीं और है यह सब पिछड़ा वर्ग भलीभांति समझ चुका है। हमारा पिछड़ा वर्ग का मुख्यमंत्री जिस पार्टी से जुड़ा है वह पार्टी वैचारिक रूप से  पिछड़ा वर्ग की घोर विरोधी है। शुभचिन्तक हितैषी कतई नहीं हो सकती । याने भाजपा जमुलेबाज पार्टी जो घोर सांम्प्रदायिक है ओर कार्पोरेट घरानों की एजेंट है।इसीलिए तो मध्यप्रदेश के किसान परेशान है नित प्रतिदिन ठगी व शोषण का शिकार आये दिन होते जा रहै है। राज्य सरकार न्यूनतम समर्थन मूल्य को कानूनी दर्जा देने में मौन धारण किये हुए है । वही अभी अभी देवास जिले के नेमावर में जो घटना कारित हुई है वह अति निंदनीय है इससे आक्रोशित होकर आदिवासी समाज सम्पूर्ण प्रदेश में न्याय की माँग कर रहा है परंतु उक्त हैवानियत पुर्ण घटना है पर प्रदेश सरकार मौन है समस्त पिछड़ा वर्ग एवं धरती पुत्र किसानों द्वारा उक्त घटना से आक्रोशित आंदोलित आज सिवनी मुख्यालय में हजारों की संख्या में पहुँचे आदिवासी समाज के कंधे से कंधा मिलाकर न्याय की आबाज को बुलंद किया है ।



यहां यह भी उल्लेखनीय है कि चरम पर पहुँची महँगाई हर दिन बढ़ते पेट्रोल डीजल रसोई गैस खाने का मीठा तेल और सुरसा की तरह बढ़ती बेरोजगारी भुखमरी से ध्यान बटाने के लिए उक्त घटना जैसी हरक़तों को प्रदेश में प्रयोजित कर प्रदेश सरकार अपनी नाकामी झुपाने के लिए हैवानियत पर उतर आई है। कॉस मामा की सरकार न्याय प्रिय ओर मानवता वादी होती तो आज दिनांक के पहले ही दरिंदे दानव जेल के सीखचों में बंद होते जो आज स्वच्छंद रूप से घूम रहे है। उनके घूमने पर अनेकों प्रश्न निरउत्तरित है। अतएव धरती पुत्र किसान ओबीसी वर्ग माँग करता है कि आदिवासी समाज द्वारा प्रेषित ज्ञापन व न्याय की माँग को तत्काल संज्ञान में लेकर दोषियों को कड़ी से कड़ी इबरतनॉक दंड दिलाते हुए ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति ना हो ।शासन प्रशासन को चुस्त दुरुस्त करने की ओर दृढ़ता पूर्वक कदम बढ़ाने का साहस जुटाने की आशा अपेक्षा महामहिम राष्ट्रपति से की जाती है । ताकि संविधान की क्षत्रछाया में तमाम मानवजाति फल फूल सके और भाईचारा के अटूट बंधन में जी सके।

        वही जिले में 08 जुलाई से सँयुक्त किसान मोर्चा केंद्र की मोदी सरकार के निरंकुशता ज्वलंत जनसमस्याओं बढ़ती महंगाई के विरोध में गांव गांव सड़कों में आकर दोपहर 10 बजे से 12 बजे तक प्रदर्शन करेगा। जिसकी अपील नागरिकों से की गई है।


सँयुक्त किसान मोर्चा एटक ,महिला फेडरेशन, फुटकर फूटफाथ संघ का समर्थन-नर्सेस आंदोलन को...


 जिला चिकित्सालय सिवनी के परिसर में अपनी 12 सूत्रीय माँगो को लेकर आंदोलित नर्सेस एशोसिएशन के आंदोलन धरना स्थल पर  सँयुक्त किसान मोर्चा ,एटक,महिला फेडरेशन,फुटकर फुट फाथ संघ के प्रमुखों ने अपने समर्थकों के साथ पहुँचकर आंदोलितजनों को लिखित समर्थन देकर उक्त न्यायोचित माँगों का समर्थन किया और उनके संघर्ष को तन मन धन से कंधे से कंधा कदम से कदम मिलाकर हर संभव सहयोग करने की घोषणा की ओर प्रदेश की शिवराज सरकार से माँग किया है कि वर्तमान घोर संकट में कोरोना आपदा काल मे सेवारत नर्सेस मजबूरन आंदोलित है। जिसके कारण आमजनों के जनजीवन के स्वास्थ्य रक्षा में प्रतिकूल असर पड़ रहा है चूँकि देखने मे यह आया है कि अपने स्वास्थ्य लाभ उपचारार्थ रोगियों को उचित सेवाएं नहीं मिल पा रही है जिसके कारण से जिले में जन आक्रोश बढ़ रहा है जो आगे विस्फोटक स्थिति धारण कर सकता है क्योंकि मरीजों की पीड़ा सुनने के लिए अस्पाताल में कोई नही है। डॉक्टर अपनी आदत अनुसार वार्डो में औपचारिक रूप से फर्राटे से भ्रमण कर अपनी अपनी क्लीनिक में धन कमानें के लिए पूरी ईमानदारी व निष्ठा से सेवायें दे रहे है।और सिस्टरों  के हड़ताल में जानें से मरीजों का कोई पुरशाने हाल नहीं है।जिसके कारण दूरदराज से आये हुए मरीज व उनके परिजनों द्वारा अस्पाताल प्रबंधन को कोसने के साथों साथ सरकार की भी थू-थू कर रहे हैं। जबकि प्रदेश स्तरीय आंदोलनकारी नर्सेस एशोसिएशन द्वारा अपनी न्यायपूर्ण माँग सरकार के समक्ष चरणबद्ध तरीके से गुहार लगाई गई थी और सरकार का कर्तव्य बनता है कि इस संवेदनशील सेविकाओं के माँग पत्रों पर गंभीरता पूर्वक विचारकर  त्वरित निर्णय लेना था क्योंकि उक्त आंदोलनकारीयों का संबंध सीधे सीधे जन स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़ा है हड़ताल की नौबत नही आना चाहिए था परंतु मध्यप्रदेश की जुमलेबाज सरकार ने  उनकी न्यायोचित माँगो को नजर अंदाज कर आंदोलन करने को बाध्य कर  आम नागरिकों के जीवन मरण में घोर  संकट खड़ा कर दिया है।इस आंदोलन के दरमियान मध्यप्रदेश का कोई भी नागरिक चिकित्सा सेवा के आभाव में मरता है तो उसकी जबाबदेह व क्षतिपूर्ति की जिम्मेदार घोषणावीर मामा शिवराज की सरकार होंगी ।ऐसी माँगे उक्त 12 माँगों के साथ समर्थन कर्ताओं रामकुमार सनोडिया राजेश पटेल ,कामरेड अली एम आर खान, एम रहमान,किरण प्रकाश ,शकुन चौधरी, रजनी गोखले,अंगद सिंह,तीरथ सनोडिया,संतोष ठाकुर व अन्य की ओर से की गई है।

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