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Saturday, June 5, 2021

विश्व पर्यवारण दिवस और हो रही जगलो की अबैध कटाई जबाबदार की मौनं सहमति....





मंडला :- आदिवासी बाहुल्य जिला हमारा मण्डला जिले के चारो ओर पर्यावरण की दृष्टि से बहुत संपन्न है, वही जंगल जिले की शान है साथ ही इन जंगल मे वैगा आदिवासी निवास करते है और उसमें अनेक प्रकार के जानवर पाए जाते है साथ ही इस जिले में विश्व प्रसिद्ध कान्हा नेशलन पार्क है जहाँ देश विदेश में जाना जाता है इस पार्क में सभी प्रकार के जानवर पाए जाते है, वही इन जंगलो से तरह तरह से जड़ी बूटी भी मिलती है इस जिले के बैगा आदिवासियों का जीवन यापन भी जंगलो पर आधारित है।



       पर लगता है कि अब जैसे इसे किसी की नजर लगी है यहां विकास के नाम पर हजारों वृक्ष वैध अवैध रूप से काटे जा रहे हैं और जबाबदार विभाग भी इन अवैध कटाई के सामने बोना नजर आ रहा है और जंगलों लगातार पेड़ काटने की बात करें तो वन परिक्षेत्र अंजनिया, मोहगांव के अंतर्गत बसे ग्रामों में वनों की कटाई अवैध रूप से की जा रही है। वही जानकारी के अनुसार क्षेत्रीय ग्रामीणों के द्वारा वनों की कटाई की जा रही है  वनों कि कटाई के संबंध में वन विभाग को कोई जानकारी नहीं है वही ग्रामीणों बताया कि गांव के ग्रामीण अपने निस्तार के लिए जंगल से लकड़ी लेकर जाते हैं। साथ ही ग्रामीणों का आरोप है की फॉरेस्ट गार्ड बीट गार्ड की मिलीभगत से ही लोग महीनों से अवैध कटाई कर रहे है सागौन, सरई की लकड़ी घर में ला रहे हैं जिसकी शिकायत रेंजर से लेकर वरिष्ट अधिकारियों से की जाती है पर कार्यवाही के नाम पर केवल खाना पूर्ति की जाती है वनों की वीट के अधिकारियों से की गई है लेकिन अभी तक कोई सुनवाई नहीं हुई और लगातार कटाई जारी है अगर देखें तो फॉरेस्ट ऑफिस के कुछ दूर में ही कटाई की जाती है और वहीं से ढोया भी जाता है लेकिन अधिकारियों द्वारा अभी तक कोई कार्यवाही नहीं की गई है।



वन परिक्षेत्र मवई अंतर्गत जनपद मुख्यालय मवई से आसपास के ग्रामो को प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना अंतर्गत सड़क का निर्माण कार्य किया जा रहा है जिसमें जंगलो के पेड़ भी कांटा जा रहा है।पर्यावरण की दृष्टि से हमारे क्षेत्र में बहुत अच्छी स्थिति थी, पर अब लगातार हावी होता डेवलपमेंट पेड़ों को काल के गाल में समाता जा रहा है। पेड़ों के लगातार कटने से पर्यावरण को खतरा बढ़ता जा रहा है। प्रशासन विकास के नाम पर लगातार पेड़ों को काट-काट कर सड़क निर्माण कार्य करा रही है। जिससे आवागमन का साधन तो बन रहा है पर पर्यावरण संरक्षण के नाम पर कोई ठोस कदम नहीं उठाया जा रहा है। विकास के नाम पर छायादार वृक्षों को काटा जा रहा है तथा और घने छायादार वृक्षों को काटने का कार्य चल रहा है। सरकार के निर्देश से इस जंगल में सड़क निर्माण के नाम पर लगातार वृक्ष तो कांटे ही जा रहे हैं परंतु इसका भरपूर फायदा आसपास के लोग और वनविभाग उठा रहा है जिसमें सैकड़ों पेड़ों को कटाई अवैध तरीके से हो रही है।इस तरह से अधिकांश पेड़ों को काट कर लगातार जंगल को नुकसान पहुंचाया जा रहा है। सैकड़ों पेड़ों की बलि पहले ही प्रशासन कर चुका है तथा सैकड़ों पेड़ आस पास के वासिंदो के द्वारा लगातार काटा गया।


पर्यावरण संरक्षण के लिए ग्रामीणों का सराहनीय प्रयास

पर्यावरण को लेकर अब ग्रामीण भी जागरूक हो चले हैं और ग्रामीणों ने स्थानीय तौर पर वनों की अबैध कटाई को लेकर कड़े नियम बना इसे बचाने के साथ ही वृक्षारोपण करने अभियान चलाया जा रहा है इस वृक्षारोपण को बचाने के लिए ग्राम वासियों का भरपूर सहयोग मिल रहा है जिसमें ग्राम विकास समिति का भरपूर सहयोग है वही अबैध कटाई को रोकने के लिए यदि कोई असमाजिक तत्वों द्वारा इस जंगल को नुक्सान पहुंचाया जाता है तो 2000रू से लेकर 10000 रुपये तक का जुर्माना लगाया जाता है। जिसको ध्यान में रखकर बहुत से लोग पेड़ों को नुक्सान पहुंचाने की सोचते भी नहीं है। लोगों की जागरूकता हमें आक्सीजन सिलेंडर को कंधे में रखने से निजात दिला सकता है लेकिन यदि हम इस संबंध में उदासीन रहे हो कोविड महामारी के दौरान सिलेंडरों को लेकर आक्सीजन के लिए दौड़ते लोगों को देखा है वहीं हमारे जीवन का हिस्सा बन जाएगा। क्षेत्रीय नागरिकों की भूमिका और जागरूकता हमारे नगर गाँव ज़िला और देश को पर्यावरण के प्रति जागरूक करता है।

         वही अब लोगो को चेतना जरूरी है

सवाल यह है कि पूरे देश में इस तरह बनाए जा रहे सड़क, कारखाने, रेल पटरी, सुरंग और विस्तार में काटे जा रहे छायादार वृक्षों की कटाई से हो रही है यह विकास हमारे भविष्य और स्वास्थ्य की समस्या के साथ साथ बीमारियों को भी जन्म दे रहा है। प्रशासन द्वारा विकास के नाम पर लगातार हो रहे पर्यावरण के नुक़सान पर ध्यान नहीं दिया गया तो आने वाले समय में लोगों के लिए पर्यावरण को बचाने बहुत समस्या बढ़ती जाऐगी।

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