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Monday, June 28, 2021

मनरेगा योजना में धड़ल्ले से चालाई जा रही है जेसीबी मशीन और खुले के हो रहा है ठेकेदारी से काम सरकारी व वन भूमि से हो रही है खुदाई...



रेवांचल टाईम्स :- आदिवासी बाहुल्य जिला मंडला में इन दिनों मनरेगा योजना के अंर्तगत सभी जनपदों की ग्राम पंचायतों में चल रहे है और इन निर्माण कार्यो में ठेकेदारी  जनप्रतिनिधियों चाटुकार ठेका ले रहे है लोग ज्यादा फायदा कमीशन के चलते मशीनों और ठेकेदारों से काम करा रहे है 30 दिन का काम मशीनों से 5 दिन में हो जाता है





         वही पूरे देश मे एक तरफ वैश्विक महामारी फैली है कोरोना संक्रमण काल में जहां आम जनमानस गरीब तबके के मजदूर लोगों को दो वक्त की रोटी के इंतजाम के लिए दर-दर की ठोकरें खानी पड़ रही है। रोजी रोटी कामकाज ठप है, ग्राम पंचायतों में ग्रामीणों को मरने की कगार में है बच्चे बूढ़े और महिलाएं दवाओं तक कि पैसे ना होने के कारण अकारण भूख से बिलबिला रहे हैं ऐसे समय में जब सरकार ने किसी तरह से लोगों को दो वक्त की रोटी के लिए मनरेगा योजना के अंतर्गत काम दे रही है तो स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने उस योजनाएं में कब्जा कर रखे है बेचारे जिले में अधिकारी और कर्मचारी करे भी तो क्या क्यो की सरकार उनकी है और उन्हें नोकरी भी तो करनी है न तो जैसे जिम्मेदार जनप्रतिनिधि का आदेश हो वैसा तो करना ही पड़ेगा न।

      वही ग्राम पंचायतों में काम कराने हेतु राशि भेजी जाती  है। मेढ़ बंधान कूप निर्माण सड़क निर्माण आदि कार्य मजदूरों से कराए जाएं ताकि उन्हें दो वक्त की रोटी के लिए मजदूरी तो मिल सके जिस्से हो रहे पलायन रोका जा सकता है पर ऐसी स्थिति में जनपद पंचायत मंडला, बिछिया, नारायणगंज, बीजादांडी, मोहगांव, घुघरी नैनपुर, मवई, इन जनपदों के अंतर्गत आने वाली ग्राम पंचायत भ्रष्टाचार के आकंठ में डूबी जनपद, पंचायत कहा जाता है उसी जनपद की ग्राम पंचायत में सरपंच सचिव एवं उपयंत्री की मिलीभगत के चलते मेड बंधान एवं अन्य काम धन्ना सेठों और जनप्रतिनिधियों की जेसीबी से मनरेगा योजनाओं से कार्य कराई जा रहे हैं इतना ही नहीं फर्जी बिलों के सहारे इन जनपदों की अधिकतर ग्राम पंचायतो में अब तक जितने काम हुए उनकी अगर जांच सूक्ष्मता से करा ली जाए तो भ्रष्टाचार कितना हुआ और कौन कौन मालामाल हुआ यह पता लग सकता है। ग्राम पंचायत में ज्यादातर काम सड़क, मेड बंधान कार्य जेसीबी से हुए है।


. जो जांच का विषय है, मगर जांच करने वाला कौन है


स्थानीय प्रशासन से लेकर जिला प्रशासन तक सब मौन है।


कई बार कई ग्राम पंचायतों में मनरेगा एवं अन्य योजना के अंतर्गत कराए गए कार्यो की शिकायत की गई है पर जाँच करेगा कौन और किसकी ये आज तक लोगो के समझ मे नही आया है। अब जिले लोग भी समझने लागे है कि पत्थर के आगे सिर फोड़ने से कोई फायदा नही है।

         वही जानकारी के अनुसार मंडला जनपद पंचायत की ग्राम पंचायत साल्हेडण्डा में मिट्टी मुरुम सड़क का निर्माण कार्य मनरेगा योजना से कराया जा रहा है जो कि ग्रामीण यांत्रिकी सेवा संभाग विभाग मंडला के द्वारा ठेका में दिया गया है , जिसका अर्थ वर्क शुरू कर दिया है । यह सड़क मार्ग दो जिलो को जोड़ने का काम करेंगी , लेकिन इस सड़क मार्ग की लंबाई महज डेढ़ किलोमीटर की है और इसकी लगभग 47 लाख रुपए की बताई जा रही है जिसमें जनप्रतिनिधि के चाहेते ठेकेदार के द्वारा अवैध रूप से जंगल से जे सी वी मशीन लगवा कर अवैध रूप से मुरुम खुदाई कर ढुलाई जा रही हैं। जो नियम विपरीत है। जब मशीनों से काम करवाया जा रहा है तो मजदूरों को क्या काम मिल पाएगा  ? 

       वहीं आदिवासी बाहुल्य मंडला जिले में मजदूरों को 100 दिनों का सरकार के द्वारा काम देने का वादा किया गया है, पर मजदूरों को काम ना देकर मशीनों से काम किया जा रहा है । 

ऐसे काम कराये जायेगे तो ठेकेदार,जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों की तो जेब गर्म होना तय है क्योंकि सब निजी स्वार्थ और कमीशन का खेल है। वही सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार कि यह ठेकेदार के बड़े बड़े निर्माण कराया करा चुके है और इनके द्वारा किये गए निर्माण कार्यो की गुणवत्ता तो खुद निर्माण कार्य ही बखान कर देते है अधिकतर कार्य इनकी सेटिंग से मिल जाते विना निविदा के और ये बात तो विभाग को भी देर से पता चलता है।और इनके द्वारा आज तक जितने भी कार्य किये है वह पर निर्माण कार्य का सूचना पटल तो होता ही नही है जिससे लोगो को पता चल सके कि निर्माण कार्य क्या है कितने का है और ठेकेदार कौन है बस काम चलता है और हो जाता है। अगर स्थानीय लोगो की माने तो ये ठेकरदार महोदय बाहर से मंडला में आये थे जब इनके पास साइकिल भी नही थी पर अब जनप्रतिनिधियों की चाटुकारिता ने आज सब संसधानों से सम्पन्न है और ये मंडला मैं ही अपना गढ़ बना लिया है और बड़ी तेजी अपना कारोबार फैला लिया है जनप्रतिनिधि व अधिकारियों के संरक्षण में फल फूल रहा है इनके कामों के चर्चे तो सभी लोग जानते है , निर्माण स्थल पर काम का बोर्ड ना लगाना इनकी आदत मे शामिल है यह बात विभाग तो जानता है पर कर कुछ नहीं पाता है। यही आलम वन विभाग का है जो कि उनके जंगल से अवैध रूप से मुरूम ढुलाई जा रही है पर कुछ नही कर सकते है वही जो इस अबैध मुर्र्म निकल रही जेसीबी भी एक जनप्रतिनिधि की है जो वर्तमान में पार्षद है वही वन विभाग भी इन माफियाओं के सामने बोना नजर आ रहा है। आम लोगो के सामने वन विभाग तो तत्काल कार्यवाही करता है पर क्या इन माफियाओं के ऊपर अपनी सख्ती और नियम दिखा पायेगा

                पर अब देखना यह कि ये जो मनरेगा योजना के अंतर्गत ठेकेदारी मशीनों का उपयोग कहा तक सही है ये तो विभाग और प्रशासन ही बता पायेगा और क्या ऐसे में जिले से हो रहे मजदूरों का पलायन रुक पायेगा ये बहुत बड़ा सवाल है।

                इनका कहना 

      ग्राम पंचायत के अंतर्गत जो लगभग दो किलोमीटर की मिट्टी मुर्र्म सड़क बनाई जा रही है वह ग्राम पंचायत से नही है जानकारी के अनुसार ये निर्माण कार्य रोजगार गारंटी योजना से है और ग्रामीण यांत्रिकी सेवा संभाग 1मंडला के द्वारा बनाई जा रही है जिसमे यह कार्य ठेकेदार कोई मिश्रा जी करवा रहे है जहाँ पूरा कार्य ट्रक्टरों और जेसीबी से चल रहा है ग्राम से कोई मजदूर नही है। वही इनके द्वारा यही जंगल से ही मुर्र्म निकली जा रही है।

                                माखन उइके

                             सचिब ग्राम पंचायत 

                           साल्हेडण्डा मंडला

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