सीबीएसई 12वीं का रिजल्ट 31 जुलाई तक आ जाएगा, लेकिन 12वीं के रिजल्ट में 10वीं के तीन विषयों के 30 प्रतिशत मार्क्स शामिल करने के फार्मूले पर अनेक शिक्षाविदों को एतराज। - revanchal times new

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Thursday, June 17, 2021

सीबीएसई 12वीं का रिजल्ट 31 जुलाई तक आ जाएगा, लेकिन 12वीं के रिजल्ट में 10वीं के तीन विषयों के 30 प्रतिशत मार्क्स शामिल करने के फार्मूले पर अनेक शिक्षाविदों को एतराज।

 



रेवांचल टाइम्स  - राजस्थान बोर्ड में तो 12वीं प्री बोर्ड की परीक्षाएं ही नहीं हुई। स्कूलों से सत्रांक मांगने पर भी असमंजस। 

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17 जून को केन्द्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में एक हलकनामा प्रस्तुत कर बताया है कि सीबीएसई की 12वीं परीक्षा का रिजल्ट 31 जुलाई तक आ जाएगा। इसके साथ ही सरकार ने रिजल्ट घोषित करने का फार्मूला भी बताया। सरकार के हलफनामे में बताया गया  है कि 10वीं कक्षा के तीन विषयों में प्राप्त अंकों का 30 प्रतिशत तथा 11वीं कक्षा के पांच विषयों में प्राप्त अंकों का 30 प्रतिशत एवं 12वीं प्री बोर्ड के प्राप्त अंकों का 40 प्रतिशत अंकों को मिलाकर 12वीं का परिणाम घोषित किया जाएगा। सरकार ने भले ही 12वीं के रिजल्ट का अपना फार्मूला बता दिया हो, लेकिन अनेक शिक्षाविद इस फार्मूले से सहमत नहीं है। राजस्थान में कैथोलिक मिशनरी स्कूलों से जुड़े शिक्षाविद् और कोटा के सेंट पॉल स्कूल के प्रिंसिपल सुसई मणिक्कम ने कहा कि 10वीं के विषयों के अंक जोड़ना उचित नहीं होगा। विद्यार्थी 11वीं कक्षा में बोर्ड के विषयों का चयन करता है। इन विषयों के चयन में 12वीं के बाद उच्च शिक्षा का भी ध्यान रखा जाता है। जबकि 10वीं में विद्यार्थियों को अनेक विषय पढ़ने पड़ते हैं। 10वीं की शिक्षा और 11वीं और 12वीं की शिक्षा में बहुत अंतर होता है। विद्यार्थी जितना फोकस 12वीं की परीक्षा के लिए करता है, उतना 10वीं के लिए नहीं करता। उन्होंने कहा कि सरकार ने 10वीं के तीन विषयों के जो 30 प्रतिशत अंकों का मापदंड रखा है, उसे हटाया जाना चाहिए। 11वीं के विषयों के साथ साथ 12वीं के प्री बोर्ड व प्रैक्टिकल के अंक को ही रिजल्ट का आधार बनाया जाना चाहिए। इसी से विद्यार्थियों को उनकी योग्यता के अनुरूप परिणाम मिल सकेगा। यदि 10वीं के 30 प्रतिशत अंक जोड़े जाते हैं तो योग्य विद्यार्थियों के परिणाम पर प्रतिकूल असर पड़ेगा। 

कमेटी में शिक्षाविदों की कमी:

12वीं का रिजल्ट किस फार्मूले से घोषित किया जाए इसके लिए सरकार ने एक कमेटी का गठन किया था। लेकिन इस कमेटी में अधिकांश सदस्य ब्यूरोक्रेट हैं। चूंकि कमेटी में शिक्षाविद कम है, इसलिए 10वीं कक्षा के अंकों को वेटेज दिया गया है। यदि कमेटी में शिक्षाविदों की संख्या ज्यादा होती तो 12वीं के रिजल्ट में 10वीं के अंकों का समावेश नहीं किया जाता। हालांकि सरकार की ओर से यह भी कहा गया है कि जो विद्यार्थी इस फार्मूले से सहमत नहीं होगा, वह सीबीएसई की 12वीं बोर्ड की परीक्षा भी दे सकता है। 

राजस्थान में प्री बोर्ड भी नहीं:

सीबीएसई में 12वीं कक्षा के रिजल्ट में प्री बोर्ड के 40 प्रतिशत अंक शामिल किए गए हों, लेकिन राजस्थान माध्यमिक शिक्षा बोर्ड से जुड़ी स्कूलों में 12वीं कक्षा में प्री बोर्ड की भी परीक्षा नहीं हुई है। हालांकि अभी राज्य बोर्ड ने 12वीं के रिजल्ट का फार्मूला घोषित नहीं किया है। 12वीं की परीक्षा रद्द करने के बाद राज्य बोर्ड भी सीबीएसई के फार्मूले पर नजर लगाए हुए था। अब राज्य बोर्ड को 12वीं के रिजल्ट के लिए स्वयं का फार्मूला लागू करना होगा। लेकिन राज्य बोर्ड से जुड़ी स्कूलों में पहले ही असमंजस की स्थिति बनी हुई है। बोर्ड ने स्कूलों के प्राचार्यों को निर्देश दिए हैं कि 21 जून से विद्यार्थियों के सत्रांक वेबसाइट पर अपलोड किए जाएं। प्राचार्यों के सामने सबसे बड़ी समस्या यह है कि जब विद्यार्थी स्कूल में आए ही नहीं तो फिर उनकी योग्यता के अनुरूप अंक कैसे दिए जाएंगे। बोर्ड ने सत्रांक भेजने का कोई फार्मूला भी नहीं दिया है।

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