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Thursday, May 13, 2021

मध्य वर्ग के लिए आफत बनकर आई कोरोना की दूसरी लहर, देश मे ऐसे बढ़ेगा अमीर-गरीब के बीच का फासला

 



रेवांचल टाइम्स:- कोरोना वायरस महामारी के बीच  मिडिल क्लास परिवारों पर दोहरी मार पड़ रही है. एक तरफ संक्रमण से जान जाने का खतरा तो वहीं दूसरी तरफ भूख से।कोरोना की पहली लहर में महामारी ने करोड़ों लोगों को गरीबी की तरफ धकेल दिया था वहीं इस दूसरी लहर में और भी ज्यादा लोग गरीबी की दहलीज पर खड़े हैं.


कोरोना महामारी की इस दूसरी लहर ने लोगों की कमर तोड़ कर रख दी है. जहां एक तरफ लोग इसके संक्रमण से पीड़ित हैं और अपनी जान गंवा रहे हैं. वहीं दूसरी तरफ इस घातक वायरस की चेन तोड़ने के लिए लगे लॉकडाउन और कर्फ्यू से आम आदमी के सामने दो वक्त की रोटी का भी संकट पैदा हो गया है। कोरोना की ये दूसरी लहर मिडिल क्लास परिवारों पर आफत बन कर आई है। इस लहर ने करोड़ों मिडिल क्लास परिवारों को गरीब परिवारों की श्रेणी में लाकर खड़ा कर दिया है. विकराल रूप धारण कर चुकी इस महामारी के बीच लोगों का जीवन जीना मुहाल हो रहा है. 


पहली लहर ने ही मचा दी थी तबाही


कोरोना वायरस की दूसरी लहर में देश के मिडिल क्लास परिवारों का सबसे बुरा हाल है. प्यू रिसर्च सेंटर के आंकड़ों के मुताबिक पहली लहर में तीन करोड़ 20 लाख मिडिल क्लास लोगों को गरीब बना दिया. अगर दुनिया की बात करें तो करीब पांच करोड़ 40 लाख मिडिल क्लास लोग गरीबी के मुहाने पर खड़े हैं. इस कोरोना के बाद आए चौतरफा संकट पर एक्सपर्ट्स का कहना है कि हर तरह से बेहद बुरी खबरें आ रही हैं. इससे भारत की ग्रोथ रुक सी गई है. देश में अब पहले से कहीं ज्यादा असमानता होने की आशंकाएं हैं.


पहली से ज्यादा खतरनाक है दूसरी लहर


CMI के आंकड़ों पर नजर डालें तो कोरोना की पहली लहर में ऑर्गनाइज्ड और अनऑर्गनाइज्ड सेक्टर मिलाकर करीब 12 करोड़ लोगों को अपनी जॉब से हाथ धोना पड़ा. 

इसमें करीब दो करोड़ नौकरीपेशा और बाकी लेबर क्लास शामिल थे. 

वहीं अब दूसरी लहर में ज्यादा त्राही मची है. कोरोना की चेन तोड़ने के लिए ज्यादातर राज्यों में लॉकडाउन लगाया गया है. ऐसे में अब हालात के और भी ज्यादा बिगड़ने की संभावना है.


मिडिल क्लास पर सबसे ज्यादा बोझ


कोरोना की पहली लहर में अप्रैल से लेकर जून 2020 के दौरान देश की विकास दर 23.9% नीचे थी. अब इसका बोझ मिडिल क्लास पर पड़ रहा है. पिछले साल मार्च में GST कलेक्‍शन करीब 97 हजार करोड़ था, जो मार्च 2021 में 26 प्रतिशत बढ़कर 1.23 लाख करोड़ हो गया, क्योंकि FMCG कंपनियों ने डेली यूज होने वाले सामान के रेट बढ़ा दिए. इसके अलावा देश में डीजल और पेट्रोल के दाम आसमान छू रहे हैं. 31 मार्च 2020 को पेट्रोल की औसत कीमत 71.75 रुपये प्रति लीटर और डीजल की 64.34 रुपये प्रति लीटर थी, वहीं 31 मार्च 2021 को पेट्रोल 90.82 रुपये और डीजल 81.14 रुपये हो गया. 

मध्य प्रदेश में तो कीमत 100 के भी पार है. सरकार एक्साइज ड्यूटी कम करने का नाम नहीं ले रही. बिजली के दामों से भी मिडिल क्लास को राहत नहीं है.


"अर्थव्यवस्‍था में सुधार की संभावना बेहद कम"


      RBI के पूर्व गवर्नर रघुराम राजन के अलावा कई जाने माने अर्थशास्‍त्रियों का मानना है, कि अभी अर्थव्यवस्‍था में सुधार की संभावना बेहद कम है क्योंकि भारत में कोरोना वैक्सीन लगाने की दर 9 प्रतिशत से भी कम है. यानी एक दिन में 100 में से महज 9 लोगों का ही वैक्सीनेशन किया जा रहा है. इस गति से भारत में हार्ड-इम्यूनिटी डेवेलप  होने में काफी समय लग जाएगा. जब- जब कोरोना का प्रकोप बढ़ेगा तब-तब अर्थव्यवस्‍था को नुकसान पहुंचता रहेगा. इसके इतर सरकार दावा कर रही है कि कोरोना वैक्सीन लगने के साथ अर्थव्यवस्‍था फिर से पटरी पर आ जाएगी.


नैनपुर रेवांचल टाइम्स से शालू अली की रिपोर्ट

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