रेवांचल टाइम्स - आये दी पत्रकारों पर झूठी एफ आई आर को लेकर सुप्रीम कोर्ट का एक बड़ा फैसला पत्रकारों के हित में आया है।
कैप्टन ऑफ कोर्ट की कार्यवाही सुप्रीम कोर्ट ने सभी राज्यों के डीजीपी को दिए निर्देश पत्रकारों पर झुटी FIR की घटनाएं आए दिन होती रहती हैं। पत्रकारों द्वारा जब किसी भ्रष्ट अधिकारी या सरकारी कार्यों का कवरेज किया जाता है। तो अधिकतर वह भ्रष्ट अफसर पत्रकारों को चुनौती देकर झूठी FIR करा देते हैं। जिसकी वजह से पत्रकार को जेल भी जाना पड़ता है ।देशभर में पत्रकारों के विरुद्ध काफी मामले सामने आ रहे हैं ।जिसमें अधिकतर डॉक्टर भ्रष्ट अफसर नेता सहित अन्य रसूखदार लोगपत्रकारों पर झूठी FIR कर देते हैं। जिसकी वजह से पत्रकार लोगों के सामने सच्चाई को उजागर नहीं कर पाते हैं। इसी को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने आदेश किया है। कि अगर पत्रकार पर झूठा मुकदमा दर्ज किया जाता है। तो उसे कैप्टन ऑफ कोर्ट की कार्यवाही मानी जाएगी।
उल्लेख है कि भारतीय संविधान के चौथे स्तंभ मीडिया को माना जाता है ।जिसके तहत मीडिया अपने पत्रकारों के माध्यम से समाज में फैली बुराइयों को जनता व देश के सामने लाने का काम करती है। लेकिन आजकल कुछ भ्रष्ट नेता व अफसर जब कोई गलत कार्य भ्रष्टाचार में लिप्त रहता है। तो उसे पत्रकार ही कवरेज करके जनता के सामने लाता है लेकिन अधिकतर मामलों में यह भ्रष्ट नेता व सरकारी अफसर अपने पावर का दुरुपयोग कर पत्रकार पर झूठा मुकदमा दर्ज करा देते हैं। देशभर में कई शहरों में पत्रकारों की छोटी रिपोर्टों की घटना आए दिन सामने आती रहती है ।इसी को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट मैं एक याचिका दायर की गई थी जिसमें पत्रकारों पर हो रहे अत्याचार पर कोर्ट ने संज्ञान में लेते हुए कहा कि अगर पत्रकार पर झूठी एफ.आई.आर. होती है ।तो उसे कैप्टन ऑफ कोर्ट की कार्यवाही मानी जाएगी वहीं सुप्रीम कोर्ट ने सभी राज्यों के डीजीपी को निर्देशदिए हैं। कि अगर कोई अफसर नेता पत्रकारों के खिलाफ रिपोर्ट करता है तो उसे पूर्ण रूप से जांच में लिया जाए बिना जांच के FIR कानून के विरुद्ध में माना जाएगा।
क्या होता है कैप्टन ऑफ कोर्ट.....?
सिविल कैप्टन ऑफ कोर्ट में अदालत के किसी ऑर्डर रीड या किसी प्रोसेस को जानबूझकरअनदेखा करना या उसके खिलाफ जाकर कैप्टन ऑफ कोर्ट की कार्यवाही मानी जाती है ।अगर अब पत्रकार पर झूठी FIR हुई तो उसे कोर्ट के आदेश को अनदेखा करना माना जाएगा।
सभी राज्यों के डीजीपी को आदेश जारी....
सुप्रीम कोर्ट ने सभी राज्यों के डीजीपी को निर्देश दिए हैं। कि पत्रकारों के झूठे मामले आते हैं तो मामलों को पहले जांच की जाए सीधे FIR नहीं हो सकती ।अगर जांच में पत्रकार दोषी पाया जाता है ।तब जाकर FIR की जा सकेगी ।सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि पत्रकार समाज की बुराइयों से अवगत कराता है ।हर विपदा में सबसे आगे पत्रकार ही आता है। इसलिए पत्रकारों के खिलाफ रिपोर्ट आती है। तो उसे जांच में लेना चाहिए।
अखिलेश बन्देवार के साथ रेवांचल टाइम्स की एक रिपोर्ट

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