रेवांचल टाईम्स डेस्क :- देश भर में समोसा बनाने वालों के लिए एक बहुत बड़ी खुशखबरी सामने आई है l "रिन्यूबल डीजल" बनाने वाली सबसे बड़ी कंपनी "नेस्ते ओवाईजे लो" ने बताया है कि समोसा तलने के बाद जो तेल बच जाता है उस तेल से अब हवाई जहाज उड़ाए जाएंगे, अपने को तो ये मालूम था कि हवाई जहाज में जो पेट्रोल लगता है वो बड़ा ही मंहगा होता है इसलिए उसकी टिकिट भी मंहगी होती है, यही कारण है कि अधिकतर लोग बाग़ हवाई जहाज में बैठने का सपना देखते ेदेखते इस दुनिया से ही रवानगी डाल देते हैं l हम लोग बचपन में जब कभी कोई हवाई जहाज घर के आँगन या छत के ऊपर से गुजरता था तो सभ्यता के नाते हाथ हिलाकर उसमें बैठे लोगो को "टाटा" करते थे भले ही वो देखे न देखे लेकिन हम अपनी सभ्यता नहीं छोड़ते थे, आज कल के बच्चे भी उसी परम्परा को आगे बढ़ा रहे हैं लेकिन जब से ये बात सुनी है कि अब समोसा तलने के बाद तो तेल बचेगा उससे हवाई जहाज उड़ाए जाएंगे मन में एक आशा सी जाग गयी है कि अब हमें भी हवाई जहाज में बैठने का मौका जरूर मिल जाएगा और उसके पीछे कारण भी बहुत साफ़ है जो तेल दो तीन बार समोसा तलने के बाद समोसा वाला फेंक देता था जब वो तेल हवाई जहाज बनाने वाली कंपनिया खरीदेंगी तो जाहिर सी बात है सस्ता ही बिकेगा, क्योकि दुकानदार सोचेगा कि फेंकने से अच्छा तो ये ही हैं कि चार पैसे मिल रहे है और जब हवाई जहाज इस तेल से चलेगा तो उसकी टिकिट भी कम होगी और जब टिकिट कम होगी तो अपने जैसा आम आदमी भी हवाई जहाज में सैर करने की बरसों से दबाई इच्छा पूरी कर लेगा , लेकिन दिक्कत यही है कि इस देश में जिस चीज की मांग बढ़ी तो समझ लो उसकी कालकबाजारी शुरू हुई , अभी देखा नहीं "रेमेडीसीवीर" इंजेक्शन जिसकी कीमत हजार रूपये के आसपास थी कैसे चालीस से पचास हजार में बिक गए कंही ऐसा ही इस तेल के साथ न हो जाए बस अपने को तो रात दिन यही चिंता खाई जा रही है l जैसे पहले एक ने "फोटो कॉपी" की दुकान खोली उसकी देखा देखी दूसरे ने फिर तीसरे ने और उसके बाद हर दो कदम पर फोटो कॉपी की दुकान खुल गयी, ऐसा ही "एसटीडी सेंटर" के साथ हुआ एक ने खोला फिर दूसरे ने और देखते देखते हजारों की तादात में एसटीडी सेंटर खुल गए, अपने को लगता है उसी की तर्ज पर अब ऐसा न हो कि हर आदमी अपना दूसरा काम धाम छोड़कर समोसा की दूकान खोल ले क्योकि इसमें "आम के आम और गुठलियों के दाम" वाली स्कीम है पहले तेल से समोसे बनाओ उनको बेचो और फिर समोसा तलने के बाद जो तेल बचे उसको हवाई जहाज वालों को बेच दो, बस अब एक बात और पता लगाना है कम्पनी से कि क्या सिर्फ समोसे वाले तेल से ही हवाई जहाज उड़ाएंगे या फिर जलेबी, भजिया, पकोड़ी, मंगोड़ा, आलूबंडा, भाजीबड़ा के तेल से भी हवाई जहाज उड़ सकेगा ये "क्लेरिफिकेशन" जरूरी हो गया है अब l
एसटीएफ में पोस्टिंग पाने लम्बा जुगाड़
जबलपुर के सिटी हॉस्पिटल के संचालक "श्री सरबजीत सिंह मोखा जी" जैसा उन्हें जांच अधिकारी एडीशनल एसपी "रोहित काशवानी" साहब सम्बोधित करते हैं की जांच पड़ताल के लिए जो "एसटीएफ" बनी है तब से उस एसटीएफ में पोस्टिंग करवाने वालों के बीच होड सी लग गयी है क्योकि ये एसटीएफ अब "सोने के अंडे देने वाली मुर्गी" बन गयी है जिस अस्पताल वाले के पास खड़े हो जाओ और कहो मैं एसटीएफ में हूँ और नकली इंजेक्शन वाले मुख्य कर्ता धर्ता सपन जैन ने आपका भी नाम उजागर करने की बात कही है उतना कहते ही "दक्षिणा" का ढेर लग जाता है अब जिस एसटीएफ में सिर्फ इतना बोल देने से मालामाल होने की उम्मीद है उसमें भला कौन पोस्टिंग नहीं चाहेगा तो हर पुलिस वाला एसटीएफ में पोस्टिंग पाने के लिए ऊंचे ऊंचे जुगाड़ लगा रहा है कोई "तुर्की" के राष्ट्रपति से जुगाड़ लगा रहा है तो कोई इजराइल के प्रधान मंत्री से फोन करवा रहा है, कोई अमेरिका के बाइडन को सेट करने में लगा है तो कोई बांग्ला देश की प्रधानमंत्री से जुगाड़ लगवाने की फिराक में है, कोई बाबा रामदेव से फोन करवा रहा है तो कोई बीजेपी के ख़ास "अनुपम खेर" और "कंगना राणावत" से कहलवाने के चक्कर में घूम रहा है इधर श्री मोखा जी की पूरी की पूरी फॅमिली इसमें इन्वाल्व दिखाई दे रही है रोज नए नए खुलासे हो रहे है जैसे अपने ज़माने के मशहूर जासूसी उपन्यासकार "कर्नल रंजीत" के उपन्यासों के नायक "मेजर बलवंत" नए नए खुलासे करता था वैसे ही अपने एसपी साहेब रोज नए नए खुलासे कर रहे हैं इस मामले में पकडे जाने वालो की ऐसी मांग है कि जब तक जबलपुर पुलिस उनका रिमांड मांगती उसके पहले ही इंदौर पुलिस उन्हें उठा कर ले गई l देखना तो ये है कि एसटीएफ में पोस्टिंग पाने की किन किन लोगों की इच्छा पूरी होती है और किसका जुगाड़ सबसे सॉलिड साबित होता है l
सुपर हिट ऑफ़ द वीक
"तुम हमेशा हर बात पर मेरा, मेरा करती हो हम दोनों पति पत्नी है इसलिए "मेरा" नहीं "हमारा" कहना चाहिए श्रीमान जी ने श्रीमती जी को समझाया
इतना सुनते ही श्रीमती जी कुछ ढूंढने लगीं श्रीमान जी ने उनसे पूछा
"अब अचानक क्या ढूंढने लगीं"
"हमारा पेटीकोट" श्रीमती जी का उत्तर था
चैतन्य भट्ट

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