रेवांचल टाइम्स :- देशभर में आज संविधान के निर्माता बाबा साहेब बीआर अंबेडकर की जयंती कोरोना गाइडलाइन को मद्देनजर रखते हुए मनाई जा रही है. 31 मार्च 1990 को उन्हें मरणोपरांत सर्वोच्च नागरिक सम्मान भारत रत्न से सम्मानित किया गया था. उन्होंने ना सिर्फ आजादी की लड़ाई में ना सिर्फ एक अहम भूमिका निभाई बल्कि सम्पूर्ण राष्ट्र के लिए संविधान निर्माण की भी जिम्मेदारी उठाई. हर साल उनकी जयंती को धूमधाम से सेलिब्रेट किया जाता है. लेकिन इस वर्ष कोरोनावायरस के चलते सरकार के नियमों का पालन करते हुए शांतिपूर्ण ढंग से अंबेडकर जयंती मनाई गई।
14 अप्रैल 1891 में जन्मे बाबा साहेब की इस साल 130 वीं जयंती मनाई जा रही है.
आपको बता दें, डॉ. बीआर अंबेडकर की जयंती के दिन सार्वजनिक अवकाश भी घोषित किया गया है. उन्होंने देश से जाति प्रथा और समाज में कुव्यवस्था को खत्म करने में अहम भूमिका निभाई थी. उनका मानना था कि सभी जाति के लोगों को एक जैसा अधिकार मिलना चाहिए ताकि आगे चलकर किसी भी प्रकार भेदभाव ना हो. उन्होंने अपने जीवन काल में कई महत्वपूर्ण आंदोलनों में भी हिस्सा लिया. एक दलित परिवार से आने वाले बीआर अंबेडकर ने अपने जीवन में बहुत यातनाएं झेलीं लेकिन कभी किसी कमजोर का साथ नहीं छोड़ा. यही वजह है कि वे आज भी लोगों के दिलों में जिंदा हैं. उन्हें आज भी उतने ही आदर और सम्मान के साथ याद किया जाता है.
जैसा कि हमें प्रतीत है कोरोना संक्रमण के बढ़ते मामलों को देखते हुए मध्य प्रदेश सरकार ने प्रदेश में कोरोना कर्फ्यू लगाया है। जिसमें त्योहारों में अधिक भीड़ भाड़ एवं रेलियां निकालने पर पाबंदी की है।
इस बीच मध्य प्रदेश सरकार के नियमों का सम्मान करते हुए दलित समाज द्वारा शांतिपूर्ण ढंग से नैनपुर में स्थित बांसुरी वादन चौक में डॉक्टर भीमराव अंबेडकर की मूर्ति पर माल्यार्पण करते हुए प्रदेश में चल रहे संक्रमण के लिए प्रार्थना की गई और मिठाई बांटकर लोगों को बाबासाहेब आंबेडकर के जीवन परिचय की जानकारी दी गई।
वार्ड नंबर 8 तालाब टोला में स्थित बौद्ध मंदिर में दलित समाज द्वारा एकत्र होकर भी पूजा एवं प्रार्थना की गई प्रसाद वितरण कर सभी को डॉक्टर भीमराव अंबेडकर के जीवन जीने के तरीके से अवगत कराया गया और लोगों को बाबा साहब अंबेडकर की तरह सभी समाज के लोगों का आदर करने का संदेश दिया गया।
नैनपुर रेवांचल टाइम्स से शालू अली की रिपोर्ट


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