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Monday, April 5, 2021

मुख्यमंत्री हेल्पलाइन में शिकायत के बाद भी नैनपुर में रसूखदार और सत्ताधारी पार्टी कार्यकर्ताओं के अवैध निर्माण पर नहीं हो रही कार्रवाई



रेवांचल टाइम्स :- राजस्व के सख्त रूख और अमले की सतर्कता के बीच भी जमीन चोरों की सेहत पर कोई असर होता नहीं दिखाई दे रहा है। जैसे जमीन माफिया कल सक्रिय थे। आज भी सक्रिय हैं। मतलब फील्ड कर्मचारियों के शह पर जमीन चोरों का बाजार जमकर फल फूल रहा है। शहर की सरकारी जमीनों पर बदस्तूर कब्जा के साथ निर्माण कार्य चल रहा है। और अधिकारी इस मुगालते में है कि जमीन माफियों की कमर तोड़ रहे हैं। जबकि नोटिस कार्रवाई के बाद भी रसूखदार जमीन चोर का आज भी सरकारी जमीन पर कब्जा ना केवल बरकरार है। बल्कि निर्माण भी धड़ल्ले से चल रहा है। कुल मिलाकर जमीन चोरों को ना तो कानून का भय है..और ना ही नोटिस का डर है।   


ऐसा सोचना की कानून सबके लिए बराबर है..तो लोगों को जल्द से जल्द सोच को बदल लेना चाहिए। यदि ऐसा नहीं है तो बहतराई स्थित सरकारी जमीन पर काबिज रसूखदार जमीन चोर का उदाहरण सुनकर लोगों को अपनी सोच बदलने में मजबूर होना पडेगा।


नैनपुर के वार्ड नंबर 14 के स्थानीय लोगों ने बताया कि कुछ दिनों पहले हम लोगों के घरों और झोपड़ियों को बेजाकब्जा बताकर तहसीलदार ने जेसीबी लगाकर तोड़ दिया। लेकिन रसूखदारों की बाउन्ड्री को नहीं गिराया गया। और उन्हें नोटिस थमाकर निर्माण को बन्द करने के साथ खुद से तोड़ने को कहा गया। बाद में समझ में आया कि रसूखदार जमीन चोरों को दिया गये नोटिस की कार्रवाई केवल दिखावा मात्र था। क्योंकि नोटिस मिलने के बाद भी ना तो निर्माण कार्य ही बन्द हुआ और ना ही तहसीलदार ने दुबारा कार्रवाई की।


बता दें कि नैनपुर नगर के रेवांचल टाइम्स के पत्रकार शालू अली द्वारा मुख्यमंत्री हेल्पलाइन में वार्ड नंबर 14 कि सरकारी भूमि पर हो रहे अवैध कब्जे की जानकारी दी गई थी।

इस शिकायत को मुख्यमंत्री हेल्पलाइन द्वारा नैनपुर नगर तहसीलदार को प्रेषित किया गया था। जिसमें तहसीलदार ने काफी दिनों बाद शिकायत पर कार्यवाही की लेकिन वह केवल खानापूर्ति थी। 

वहां पर स्थित गरीब मजदूरों के मकान तो गिराए गए लेकिन, रसूखदार और सत्ताधारी पार्टी कार्यकर्ताओं के मकान को हाथ भी नहीं लगाया गया।

जबकि वह पूर्णतः अवैध मकान है।

शिकायतकर्ता द्वारा पूछने पर तहसीलदार ने जवाब दिया की मेरे द्वारा अतिक्रमणकारियों को नोटिस दिया गया है और लगभग 15 दिनों बाद यदि वह मकान नहीं गिराते हैं तो प्रशासन द्वारा मकान पर अतिक्रमण किया जाएगा लेकिन आज दिनांक तक किसी भी प्रकार की कार्यवाही तहसीलदार द्वारा नहीं की गई आज दिनांक तक रसूखदार और सत्ताधारी पार्टी के कार्यकर्ताओं के मकान नहीं गिराए गए आखिर ऐसा सौतेला व्यवहार क्यों ?


बताते चलें कि कुछ सप्ताह पहले नैनपुर वार्ड नंबर 14 में नगर प्रशासन ने सरकारी जमीन पर काबिज लोगों को हटाने जेसीबी की कार्रवाई की। इस दौरान केवल गरीब मजदूर परिवार के घरों को तोड़ा गया। साथ ही कुछ लोगों को नोटिस थमाकर सरकारी जमीन छोड़ने का आदेश दिया गया। यद्यपि तोड़फोड़ के दौरान जमकर विरोध हुआ। लेकिन रसूखदार एवं सत्ताधारी पार्टी दल के कार्यकर्ताओं के मकानों पर आँच तक नहीं आई। 


लोगों ने बताया कि तोड़फोड़ कार्रवाई करने वाले कर्मचारी और अधिकारी की स्थानीय रसूखदार जमीन चोर के साथ आपसी सांठगांठ है जिसकी वजह से रसूखदार और सत्ताधारी पार्टी कार्यकर्ताओं के अवैध मकानों पर जेसीबी नहीं चलाई गई। यही कारण है कि नगर में हो रहे अवैध निर्माण कार्य को लेकर कोई सख्त कदम नहीं उठाया जाता। केवल नोटिस देकर कब्जा से हटने को कहा गया। स्थानीय लोगों ने बताया कि राजस्व अधिकारियों को यह भी जानकारी है की इस सरकारी भूमि पर किस तरह से नगर के रसूखदार और सत्ताधारी पार्टी के कार्यकर्ताओं ने कब्जा किया हुआ है और किस-किस ने किया है क्योंकि बिना किसी प्रशासनिक अधिकारी के सांठगांठ के यह धड़ल्ले से किया गया सरकारी भूमि पर अवैध निर्माण असंभव है। बावजूद एसके निगम ने कोई नोटिस जारी नहीं किया। जाहिर सी बात है कि मोटी मलाई और सांठगांठ के चलते इन अवैध मकानों पर जेसीबी का चलना नामुमकिन है। 


देखने वाली बात होगी कि क्या अब राजस्व अमला करोड़ों की जमीन पर काबिज निर्माण के खिलाफ कार्रवाई करते है। क्योंकि अभी तक स्थानीय लोगों का यही मानना है कि बड़े अधिकारियों को शायद जानकारी नहीं है कि फील्ड कर्मचारियों ने जमीन पर निर्माण कार्य को केवल नोटिस का वाकओव्हर दिया है।

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