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Saturday, April 24, 2021

भीषण कोरोना काल में बेपटरी नैनपुर की स्वास्थ्य व्यवस्था! जिम्मेदार कौन?


रेवांचल टाइम्स :- अब हर तरफ लोग ये कहना शुरू कर दिया है कि कोरोना वायरस के कारण लागू लॉकडाउन से जनजीवन बुरी तरह अस्त-व्यस्त है. केंद्र और राज्य सरकार के राहत के तमाम वादे धरातल पर उतरते नहीं दिखाई दे रहे हैं।

किसी भी शहर की तरक्की करने के लिए सबसे महत्वपूर्ण चीज उस शहर के नागरिकों का स्वस्थ्य रहना है।

लेकिन इन दिनों नैनपुर की चिकित्सा व्यवस्था स्वयं इमरजेंसी वार्ड में नजर आ रही है. नगर में जिस तरह चमकी बुखार ने कहर बरपाया है उसने एक बार पिर स्वास्थ्य विभाग की पोल खोल कर रख दी है. नगर में डॉक्टरों की कमी और बदहाल स्वास्थ्य व्यवस्था ने फिर सबका ध्यान खींचा है.


इस वायरस ने सरकारी अस्पतालों में बदइंतजामी का नजारा भी दिखा दिया. नैनपुर की बदहाल स्वास्थ्य व्यवस्था ने एक सवाल जो उठाया है वह यह कि नगर में आखिर कितने लोग हैं जो आर्थिक रूप से इतने सक्षम हैं कि निजी अस्पतालों और निजी डॉक्टरों से इलाज करा सकें और जो सक्षम नहीं है उनको सरकार सरकारी अस्पताल में अच्छी स्वास्थ्य सुविधा क्यों नहीं मुहैया करवा पा रही है. क्यों नगर के अस्पतालों में डॉक्टरों की कमी है ?. क्यों समय पर उपचार के लिए जरूरी दवाई नहीं मिल पाती ?.


आखिर क्या वजह है कि नैनपुर नगर के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र की आज यह नौबत है, की लोगों को आगे बढ़कर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र को चंदा करके सुविधा उपलब्ध करानी पड़ रही है। आज नगर के प्रबुद्ध नागरिकों   के द्वारा नगर की बिगड़ती स्वास्थ्य व्यवस्था को सुधारने के लिए अपनी अपनी क्षमता के अनुसार ऑक्सीजन सिलेंडर की व्यवस्था करवाई है। जोकि  सरकार और स्वास्थ्य विभाग को करना था।


आखिर क्यों नगर के बेशर्म जनप्रतिनिधियों का ध्यान बधहाल स्वास्थ्य व्यवस्था की ओर आज तक नहीं गया। क्या जब इनके कोई अपनों को यह खो देंगे तब इन्हें शर्म आएगी क्या तब जाकर ये नगर की बदहाल स्वास्थ्य व्यवस्था को सफल बनाने में कामयाब हो पाएंगे।

आज नैनपुर नगर के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र का यह हाल है,कि यहां जब कोई अच्छा चिकित्सक आता है तो नैनपुर के कुछ प्राइवेट डॉक्टर जो कि राजनीतिक रूप से सक्षम है, और उनके राजनीतिक संबंध काफी अच्छे हैं, जिसकी सहायता से वह अपने आर्थिक स्वार्थ के चलते नैनपुर नगर के सरकारी अस्पताल में अच्छे चिकित्सक को ठहरने नहीं देते, और जल्द ही उनका ट्रांसफर दूसरे नगर में करा दिया जाता है।

क्योंकि इससे इनकी दुकानदारी में फर्क पड़ता है यह पैसों के लालची अपने स्वार्थ के चलते नगर की जनता को बदहाल स्वास्थ्य व्यवस्था की भट्टी में झोंक रहे हैं।


यदि बदहाल स्वास्थ्य व्यवस्था को कोसना उचित है, तो नगर की जनता को गलत ठहराना भी उचित होगा क्योंकि गलती नगर की जनता की भी है,कि जिन्होंने आज दिन तक बदहाल स्वास्थ्य व्यवस्था के खिलाफ आवाज नहीं उठाई, नाही जनप्रतिनिधियों से कोई सवाल किया, बल्कि जब भी चुनाव के समय जनप्रतिनिधि जनता के समक्ष गए, और बड़े बड़े झूठे प्रलोभन और वादे किए, नोटों की गड्डी दिखाकर, एवं चुनाव में शराब, साड़ी, कंबल बांटकर जनता के दिलों में विश्वास जताया और विकास करने का वादा किया तब इनके झांसे में आकर नगर की जनता ने अपना बहुमूल्य मत इन्हें दिया और अपना प्रतिनिधि चुना लेकिन यह जनता के भरोसे पर खरे नहीं उतरे और उन्होंने धोखे और झूठे वादों के सिवा नगर की जनता को कुछ नहीं दिया।


नगर की जनता को इनके किए हुए पापों की सजा इन्हें देनी ही चाहिए तथा चुनाव के समय जब भी यह वापस जनता के समक्ष पहुंचे तो निश्चित ही इन प्रतिनिधियों से तथा नगर की प्रत्येक राजनीतिक पार्टियों से सवाल पूछना चाहिए,कि आखिर क्यों नगर की स्वास्थ्य व्यवस्था बदहाल है ?

आखिर क्यों नगर विकास से कोसों दूर है ? 

आखिर युवा बेरोजगारों के लिए कहां है वह रोजगार जो देने के वादे राजनीतिक पार्टियों ने किए थे ?


अगर हादसे का शिकार एंबुलेंस का इंतजार करते-करते सड़क पर दम तोड़ दे...


अस्पताल में बिस्तर खाली ना होने की वजह से गर्भवती महिला जमीन पर बच्चे को जन्म देने को मजबूर हो जाए... 


तो यकीनन ये किसी भी समाज के लिए शर्मिंदगी और नगर सरकार के जनप्रतिनिधियों की क्षमताओं और उसकी संवेदनशीलता पर प्रश्नचिन्ह है। 


एक तरफ भारतीय जनता पार्टी के नेता और देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कहते हैं

"कि गरीब को सिर्फ स्वास्थ्य की गारंटी मिल जाए तो ये उसके लिए सबसे बड़ी सौगात होगी वरना कितना भी कमाए उसकी सारी कमाई अस्पताल और दवाओं में ही बर्बाद हो जाएगी।"


लेकिन नैनपुर नगर में हालात इससे भी ज्यादा बदतर हैं, और जिला चिकित्सा आयोग की ओर से रोजाना जारी की जा रही संक्रमित व्यक्ति और मरने वालों की रिपोर्ट ने इस बात को सत्यापित भी कर दिया है। नैनपुर नगर की बिगड़ती स्वास्थ्य व्यवस्था की तस्वीर आज जनता के सामने है। जिससे इस स्थिति में पनप रहे सवाल नैनपुर की बदहाल स्वास्थ्य व्यवस्था के लिए उठ रहे हैं।


नगर की युवा सरकार नगर की खस्ताहाल सेहत की जिम्मेदारी से बच पाएगी ?


नगर का विपक्ष भी नैनपुर को बीमार बनाने के कसूरवार क्यों नहीं हैं?


और नेता अस्पतालों और मरीजों की बदहाली पर भी राजनीति करते रहेंगे ?

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