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Monday, March 22, 2021

कान्हा नेशनल पार्क में चल रही है भारी धांधली


रेवांचल टाईम्स :- मंडला विश्वविख्यात कान्हा नेंशनल पार्क दिनों दिन बदनाम होता जा रहा है। यहां पर वन्य प्राणी तो सुरक्षित हैं ही नहीं रिसोर्ट कारोबारी मालामाल हो रहे हैं और आला अधिकारी बेहिसाब धांधली कर रहे हैं। सरकारी जमीनों में रिसोर्ट कारोबारियों ने अवैध कब्जा कर लिया हें। अवैध तरीके से कई कारोबार यहां पर रिसोर्टों के माध्यम से चल रहे हैं। इस तरह की खबर लगातार प्रकाशित हो रही है। नक्सली भी यहां पर सक्रिय है इसके बाद भी शासन प्रशासन का नहीं जागना समझ से परे होता जा रहा है। 2018 में बाघों की गणना के बाद मध्यप्रदेश में बाघों की संख्या ज्यादा थी इसलिये मध्यप्रदेश को टाइगर स्टेट का दर्जा दिया गया है। लेकिन लगातार बाघों की मौत होने की वजह से यह दर्जा कहीं छिन न जाए यह खतरा भी बना हुआ है। पार्क विगत कई वर्षों से वन्य प्राणियों की सुरक्षा को लेकर चर्चित है। शासन द्वारा पार्क प्रबंधन और वन्य प्राणियों की सुरक्षा के लिए करोड़ों रूपये खर्च किये जा रहे हैं इसके बाद भी बाघों की मौत होना जांच का  विषय बन गया है। केटीआर में 10-12 सैंकड़ा अधिकारी कर्मचारी तैनात हैं। रोजाना मोबाइल पेट्रोलिंग होती है या नहीं क्योंकि बाघों की मौत पर अंकुश नहीं लग पा रहा है। सितंबर 2020 में केटीआर के तीन आईएफएस, दो एसडीओ, चार आरओ का स्थानांतरण होने से हड़कंप मचा। नये अधिकारी पदस्थ किये गये। लेकिन स्थिति ठीक नहीं हुई। बताया जा रहा है कि यहां पर पार्क अधीक्षक की कार्यप्रणाली अत्यंत संदिग्ध है। भ्रष्टाचार और मनमानी यहां पर चरम सीमा पर पहुंच गई है। केटीआर में यदि विशेष ध्यान नहीं दिया गया तो इस पार्क का अस्तित्व भी मिट सकता है ऐसी संभावना जानकारों द्वारा जताई जा रही है। पार्क प्रबंधन की घोर लापरवाही की वजह से कान्हा नेशनल पार्क में बाघ कहीं भूख से मर रहे हैं तो कहीं फंदा लगाकर मारे जा रहे हैं। शिकारी यहां पर सक्रिय हैं और किसी के कानों में जंू तक नहीं रेंग रही है। कान्हा टाइगर कोर जोन के लगभग दर्जन भर रक्षक कार्यालय पर संलग्न हैं। सूचना के अधिकार से यह खुलासा हुआ है। सरकार के निर्देश के बाद भी वनरक्षकों को कार्यालयों में अटैच करने वाले संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कोई दण्डात्मक कार्यवाही भी नहीं की जा रही है। वनरक्षकों को वन्यप्राणियों की सुरक्षा के लिए तैनात किया गया है। लेकिन ये आलाअधिकारियों की संरक्षण में मौज कर रहे हैं। पूर्व में शासन ने केटीआर के आला अधिकारी क्षेत्र संचालक बफर एवं कोर जोन के उप संचालक, एसडीओ, चार आरओ का ट्रांसफर कर पदस्थ तो किया था लेकिन कोई सुधार नहीं हो पा रहा है। यहां पर लगभग 15 वर्षों पार्क अधीक्षक अंगद की तरह जमे हुए हैं। इनका ट्रांसफर क्यों नहीं किया जा रहा है यह जांच का विषय हो गया है। सूचना के अधिकार के माध्यम से जानकारी ज्ञात हुइ फील्ड में कंप्यूटर ऑपरेटर, आकस्मिक सुरक्षा श्रमिक, केडब्ल्यूएस श्रमिक की भर्ती प्रक्रिया एवं विज्ञापन की प्रति मांगी गई थी लेकिन लिखित में बताया गया कि डब्ल्यू एस एक निजी संस्था है जो कान्हा टाइगर रिजर्व में कार्यरत कर्मियों की है फिर बताया गया कि कान्हा टाइगर रिजर्व के अधीन नहीं है यह जांच का विषय हो गया है। भर्ती में मनमानी की गई है और रिश्तेदारों को नियुक्त किया गया है। कान्हा टाइगर बफर में कार्यरत एक कर्मचारी मात्र दसवीं पास है उसे किस आधार पर सहा.ग्रेड 3 में भर्ती किया गया यह गंभीर जांच का विषय है। केटीआर में लगभग 6 वन परिक्षेत्र हैं इन सभी वनपरिक्षेत्रों में रेंजरों को आवास आवंटित हैं तो फिर चुनिंदा रेंजरों को शहर में क्यों आवास आवंटित किये गये हैं ये भी जांच का विषय बन गया है। आर टीआई में इसका भी गोलमोल जवाब दिया गया। इस तरह से कान्हा नेशनल पार्क में भारी गड़बड़ी चल रही है। कोई उच्चस्तरीय जांच नहीं करा पा रहा है। जनापेक्षा है सरकार कान्हा में मची लूट खसोट पर लगाम लगाये।

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