रेवांचल टाईम्स :- जिले में ऐसा कोई गाँव नही है जो शराब माफियाओं की चपेट में न हो गली गली गाँव गाँव मे इनके नुमाइन्दे देशी विदेशी शराब बेच रहे है और न ही पुलिस प्रशासन और न जिला प्रशासन को देखने की फुर्सत है इसकी वजह तो अब लोगों को धीरे धीरे समझ मे आने लगी है प्रदेश के मुखिया आ अबैध कारोबार में अंकुश लगाने की बात मीडिया के सामने कह जरूर रहे पर क्या प्रदेश के मुखिया जो कह रहे है उस पर अमल हो रहा है ।
वही बड़ी तेजी से निवास में बेखौफ फल-फूल रहा,धड़ल्ले से शराब का कारोबार
बेखौफ ढोती है कार,रात के अंधेरे में शराब,नही है किसी प्रशासन डर
मंत्री मिनस्टर की गाड़ी की तरह सिक्योरटी होती है,उस गाड़ी में,,,, गांव गांव परोसते है, शराब,,,,, एक गाड़ी आगे,, और,,एक गाड़ी पीछे,,अवैध शराब की पेटियां वाली गाड़ी होती है, बीच में,,,,
लंबे समय से गांवो में हो रही शराब की अवैध बिक्री।
रेवांचल टाइम्स:- निवास नगर के गाँव-गाँव और वार्ड में बिक रही अवैध शराब समाज में कानून व्यवस्था पर प्रश्न चिन्ह्न लगा रही है। गाँव-गाँव व वार्ड में खुलेआम हो रही अवैध शराब की बिक्री से जहाँ नगर का माहौल खराब हो रहा है, वहीं युवा पीढ़ी भी नशे की लत की आदी होती जा रही है। जिससे दर्जनों ऐसे परिवार है, जो उजड़ने की कगार पर हैं। ऐसा भी नहीं है कि नगर के वार्ड में बिकने वाली शराब कारोबार की जानकारी जिले के आबकारी विभाग और पुलिस प्रशासन को न हो, किन्तु जानकारी के बाबजूद भी अवैध शराब की बिक्री पर लगाम न लगने से आबकारी और पुलिस विभाग की कार्य प्रणाली सवालों के घेरे में खड़ी होती दिखाई दे रही है।
वहीं गांव, मोहल्ला में अवैध शासकीय शराब बनाने की भट्टी भी संचालित हो रही है. चौंक चौराहों पर शराब की बिक्री से छोटे मोटे आपराधिक घटनाओं,एवं एक्सिडेंट का कारण भी बन रहा है. इसके बावजूद क्षेत्र में अवैध शराब के कारोबार पर पुलिस लगाम नहीं लगा पा रही है....
खैर बात जो भी हो लेकिन प्रशासन इन दिनों जहां अपनी वर्दी पर दाग लगा रहा है गांव गांव में बिक रही शराब आबकारी अधिकारी विभाग के लिए निंदनीय की बात होनी चाहिए.... अगर पुलिस महोदय नगर की शराब व्यवस्था पर अंकुश नहीं लगा पा रहे तो नगर के अधिकारियों को शराब व्यवसाय का दलाल कहां जाएगा आपदा में स्थानीय निवास प्रशासन से लेकर जिला प्रशासन अभी तक मौन बैठा है....
विभाग के जिम्मेदार कार्रवाई के नाम पर करते हैं खानापूर्ति।
रेवांचल टाइम्स निवास से देवेन्द्र चौधरी की रिपोर्ट


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