रेवांचल टाइम्स- नैनपुर नगर सहित अंचल में सोमवार को होली का पर्व कोविड की गाइड लाइन के अनुसार मनाया गया। कोरोना संक्रमण के चलते होली उत्सव पर प्रशासनिक पाबंदी से उत्साह कम दिखाई दिया। नगर के लगभग सभी वार्ड में दो दर्जन से अधिक प्रमुख स्थानों पर होली का दहन किया गया। इसके पूर्व विधिवत महिलाओं द्वारा पूजन किया गया। होली को लेकर पिचकारी व विभिन्ना रंगों की दुकाने भी सजीं। जिनकी पूछ परख बाजार में रही। हालांकि बाजार में उत्साह कम रहा।
पर्यावरण संरक्षण के लिए बच्चों ने घरों से कंडे इकट्ठा कर लकड़ी बचाने का संदेश दिया। वार्ड नंबर 6 मंडला सिग्नल कालोनी स्थित पंचमुख हनुमान मंदिर के पास बच्चों द्वारा कंडों की होली जलाई गई। सोमवार सुबह होलिका दहन किया गया। इस वर्ष मेरी होली-मेरे घर का संदेश देने व कोरोना संक्रमण से बचाव के लिए प्रशानिक व नगर स्तर पर भी प्रयास किए गए हैं। बाजार की गली गली घर-घर तक होली पर्व पर नगर प्रशासन एवं पुलिस विभाग द्वारा जागरूकता संदेश दिया गया।
सोमवार को होली होने से इतवार बाजार अधिक संख्या में लोग और भारी मात्रा में भीड़ देखी गई लेकिन कलेक्टर महोदय के आदेश अनुसार नैनपुर प्रशासन एवं पुलिस विभाग द्वारा निरंतर मास्क लगाने एवं सोशल डिस्टेंसिंग रखने की लगातार मुनादी की गई और लोगों को समझाइश दी गई,एवं नगर के थाना निरीक्षक महोदय आर.एम दुबे द्वारा घर में ही होली मनाने के लिए अपील की। बाजार में गोंझी,ईटका,बर्रा टोला,मक्के, बंधा, के रहवासी पहुंचे। उन्होंने हरी सब्जी, अनाज सहित रंग गुलाल की खरीदी की।
नैनपुर क्षेत्र के समीप स्थित गांव में होली का पर्व उत्साह श्रद्धा से मनाने की परंपरा है। इसी क्रम में गाय के गोबर से तरह-तरह की आकृतियां बच्चों द्वारा बनाई गईं। इन्हें कंडों के समान सुखाने के बाद इन्हें माला की तरह पिरोकर होली में अर्पित किया गया।
फाल्गुन मास में मनाई जाने वाली होली और रंगों का त्योहार फगुआ को लेकर नैनपुर अब रंगों में रंग गया है और जगह-जगह रंग गुलाल की दुकानें व्यापारियों के द्वारा लगाई गई थी। हालांकि कोरानाकाल के चलते बाजार में कोई खास चहल-पहल पर्व को लेकर नहीं दिखाई दी। होली को लेकर न सिर्फ नैनपुर में बल्कि आसपास के अंचलों में भी उत्साह है और इस पर्व को लेकर घर-घर में पकवान भी बनाए गए हैं। प्रेम और भाई चारे के प्रतीक पर्व होली को लेकर किवदंती है कि बैर-भाव भूलकर इस पर्व के दौरान सभी एक.दूसरे से गले मिलते हैं। इसे भाईचारा बना रहता है।
हिंदू मान्यता के अनुसार बताया जाता है कि महाशिवरात्रि को भगवान भोलेनाथ और मां पार्वती का ब्याह सम्पन्ना हुआ था। उनके कैलाश पर्वत पर पहुंचने के दौरान शिव गणों द्वारा एक-दूसरे को रंग-गुलाल लगाकर फाग गीत गाए गए थे, तब से होली का पर्व मनाया जा रहा है।

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