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Sunday, March 7, 2021

बिनेका ग्राम के भोपाल चौक में महिला मंडल के द्वारा आयोजित श्री शिव महापुराण का भव्य आयोजन




रेवांचल टाइम्स - जिसका वाचन सुप्रसिद्ध पुराण वाचक परम पूज्य गुरुदेव  सुरेश मिश्रा मधुर महाराज सेलुआ वाले के मुखार विंद से किया जा रहा है , जिसके छटवें दिवस पर शिव विवाह महोत्सव बहुत ही धूम धाम से मनाया गया जिसमे महाराज  ने बताया कि सती देह त्याग के बाद राजा हिमांचल रानी मैंना  के यहाँ कन्या रूप में प्रकट हुईं राजा हिमांचल व रानी मैंना की तपश्या से प्रशन्न होकर साक्षत दुर्गा देवी ने दर्शन दिया व राजा को वरदान देते हुए माता ने कहा में तुम्हारी तपश्या से प्रशन्न हु में तुम्हारे यहाँ कन्या के रूप में प्रकट होउंगी, कुछ समय पश्चात राजा रानी के संयोग से रानी मैंना गर्भवती हुईं नो महिने पूर्ण होने के बाद दसवें महीने में साक्षात मां जगत जननी कन्या रूप में प्रकट हुईं पूरा हिमांचल प्रदेश भगवती का जन्म उत्सव मनाया एवं जन्म की बधाइयाँ नगर के नर नारियों ने राजा एवं रानी को बधाइयां दी ,कन्या शुक्ल पक्ष के चन्द्रमा के समान दिनों दिन बढ़ने लगीं कन्या के अनेकों नाम हुए ,उनमे से उमा अम्बिका, पार्वती ,भवानी,अपर्णा, आदि नाम हुए एक बार नारद का आगमन राजा हिमांचल के यहाँ हुआ राजा रानी ने मुनि जी का चरण वंदन कर आसान दिलाया फिर पार्वती को बुलाकर कहा कि कन्या की हस्त रेखा देखकर कहा कि हे मुनिदेव आप कन्या की राशि व गुण दोष फेखकर बतावें नारदजी ने कहा यह कन्या बहुत भाग्य शाली व शर्व गुण संपन्न होगी इनका नाम लेकर जो पतिव्रता नारियां पतिव्रत तलवार की धार में चढ़कर अपना जीवन सफल बनाएंगी नारद जी ने बताया इस कन्या का पति जो होगा अमंगल भेष धारी , एवं मंगलों की खान होगा ,घर द्वार से हीन माता पिता से हीन भस्मी लगाने वाला सर्पों की माला पहनने वाला बाघाम्बर धारी ,भांग धतूरा पीने वाला डमरू बजाने वाला ऐंसे गुणों से युक्त पति इनको प्राप्त होगा ऐसा बताकर नारद जी ब्रम्ह लोक को चले गए , माता पार्वती ऐसा सुनकर प्रशन्न हुईं  पर रानी मैंना बहुत दुखी हुईं राजा हिमांचल से बोलीं जो बातें राम चरित मानस इन चौपाइयों में उल्लेखित हैं पति एकांत पाई जब मैंना ,नाथ न  में समझे मुनि बैनां भावार्थ - जब मैंना रानी अपने पति को एकांत में पाईं ओर कहा कि हे नाथ  नारद मुनि के वचन मुझे समझ मे नही आये में पार्वती का विवाह किसी राज घराने के राज कुमार से करुँगी ऐसे भष्मी लगाने वाले अवधूत से उमा का विवाह कदापि नही करुँगी चाहे उमा जन्म भर कंवारी ही क्यों न रहे। माता पिता की बात सुन करके पार्वती जी बोली माँ मैंने रात में बड़ा सुंदर सपना देखी हूँ जिसमे एक गौर वर्ण के ब्राम्हण ने दर्शन दिया और कहा कि शिव को पति बनाना है तो शिव की तपश्या करो इस श्वपन को सुनकर माता पिता बहुत प्रशन्न हुए और माता पिता की आज्ञा लेकर हिमालय की तराई में तपश्या के लिए निकल पड़ीं तपश्या में इतनी लीन हो गईं जिसमे अन्न जल त्याग कर हरे बेल पत्तों का भोजन स्वरूप में ग्रहण किया इसके बाद बारह वर्षों तक सूखे बेल पत्रों का सेवन किया तब उमा का नाम अपर्णा पड़ा इसके बाद सिर्फ वायु का भोजन ग्रहण किया इस घोर तपश्या से प्रशन्न होकर भगवान शिव ने उमा को दर्शन दिया व उमा की प्रेम परीक्षा ली उमा शर्माते हुए अपनी मौन स्वीकृति दी जिसे भगवान शिव मन ही मन समझ गए , भगवान शिव ने कहा कि में तुम्हे अपनी अर्धांगनी बनाऊंगा शिव कैलाश वापस चले गए व पार्वती अपने महल को वापस आ गईं , तत पश्चात इस विवाह प्रस्ताव को ब्रम्हा विष्णु देवों ने राजा हिमांचल के यहां जाकर कहा कि आपकी कन्या का विवाह शिव के साथ करें तो राजा भी इस विवाह प्रस्ताव को स्वीकार कर लिए ओर ब्रम्हा जी के द्वारा लग्न पत्रिका कैलाश पंहुचाई गई जिसमें सोना चांदी हीरे जवाहरात व स्वर्ण मुद्दरायें भेंट में पंहुचाई गई इसके बाद शिव विवाह की तिथि तय हुई , इस तय तिथि को ही महाशिवरात्रि कहते हैं ।और शिव के प्रादुर्भाव को शिव रात्रि भी कहते हैं इस प्रकार कैलाश पर्वत से शिव की बारात हिमांचल राजा के यहां पहुंची जिसमे भांति भांति के बाराती भूत प्रेत जोगनी डाकनी साकनी व शिव गण नंदी भृंगी श्रृंगी आदि गण व देवतांवों के साथ हिमांचल राजा के यहां पहुँची जिस्के बाद शिव पाणीग्रहण सम्पन्न हुआ वहीं मधुर जी महाराज ने अपने वाचन में कहा जो नर नारी इस शिव विवाह कथा को सुनते हैं उनके घर मे  सुख समृद्धि शांति मंगल का आगमन व अमंगल का नाश होता है पूज्य महाराज के वचनों को सेंकडो की संख्या में श्रद्धालुओं ने शिव विवाह श्रवण व मनन किया इस पूरे कार्यक्रम में मंडला से आये हुए  महंत राम दास जी महाराज ,जिला अध्यक्ष राकेश तिवारी , समाजसेवी सुधीर कांशकार,मंडलानगर पालिका अध्य्क्ष पूर्णिमा अमित शुक्ला व सतीश झारिया , धर्मप्रेमी नरेश कछवाहा एवं जिले के कई शिव भक्त उपस्थित रहे जिसमे महेंद्र चंद्रोल ,राजीव चंद्रोल ,विष्णु हरदहा ,देवी हरदहा , संकट मोचन चंद्रोल व मोनू पटेल ,सीताराम चंद्रोल, व  समिति के समस्त महिला एवं पुरुषों ने मिलकर सभी का स्वागत वंदन किया और इस कार्यक्रम को सफल बनाया ।

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