रेवांचल टाइम्स - जनरल से एसटी हो गए डायरेक्टर मध्य प्रदेश वेटरनरी डिपार्टमेंट के डायरेक्टर डॉक्टर आर के रोकड़े की दो जाति होने का मामला सामने आया है रोकड़े सामान्य वर्ग में सरकारी सेवा में आए हैं लेकिन गरीब डेढ़ दशक बाद प्रमोशन लेने के लिए उन्होंने खुद को अनुसूचित जनजाति वर्ग का बता दिया है।
मध्य प्रदेश वेटरनरी डिपार्टमेंट के डायरेक्टर डॉक्टर आर के रोकड़े ने पहले खुद को कभी सामान्य जाति का बताया था। अब से निजी फ़ायदा के चलते खुद के साथ साथ अपने पूरे परिवार को अनुसूचित जनजाति का बता रहे हैं। वही 1985 के बाद की ग्रेडेशन लिस्ट में डॉक्टर आर के रोकड़े सामान्य श्रेणी (जाति) के हैं लेकिन 2010 में जब वे संचालक बने तो अनुसूचित जनजाति हो गए। रोकड़े की इन दो - दो जातियां गड़बड़ी कर अब तक किसी का ध्यान नहीं गया है वही रेवांचल टाइम्स की टीम ने जब इस पूरे मामले को जानकारी जुटानी शुरू की तो रोकड़े जाति महाराष्ट्र शासन के अनुसार तेली जाति के अंतर्गत आती है वही श्री आर के रोकड़े के ग्रह ग्राम भरसिंगी में ये आज भी पिछड़ा वर्ग के अंतर्गत आते है और जो उनकी मूल जाति तेली है वह आज भी पिछड़ा वर्ग के अंतर्गत आते है। वही मध्यप्रदेश मध्यप्रदेश में रोकड़े, धनवार जाति के अंतर्गत आते है वही इनके द्वारा अपनी मूल जाति को छुपाते हुए शासन की आर्थिक क्षति पहुँचाई है वही यह बात भी सामने आई है कि 1985 में डॉक्टर रोकड़े पशु चिकित्सक रूप में सरकारी सेवा मैं भर्ती हुए थे। कुछ बात की ग्रेडेशन लिस्ट और अन्य रिकॉर्ड में से सामान्य जाति के हैं। लेकिन जब प्रमोशन की बारी आई तो अतिरिक्त श्रेणी एसटी का दर्शना शुरू कर दिया।
इस तरह होते हैं प्रमोशन
डॉक्टर रोकड़े का उप संचालक के पद पर पहला प्रमोशन 1898 - 99 मैं हुआ इसके 1 साल पहले 1997 की ग्रेडेशन लिस्ट में उन्होंने खुद को एसटी दर्शा दिया। इसके बाद से अब तक यह एसटी श्रेणी में पदोन्नतिया व अन्य लाभ देते आ रहे हैं और शासन को आर्थिक क्षति पहुँचते हुए आरक्षित श्रेणी में ही उनके सभी प्रमोशन हुए हैं। रोचक बात तो वह है कि संचालक पद के लिए पांच साल का संयुक्त संचालक के पद पर कार्य अनुभव होना चाहिए लेकिन डॉक्टर रोकड़े के पास करीब तीन साल का ही अनुभव है। हालांकि उन्होंने कार्यवाहक संचालक का काम संभाला है।
आज भी ग्रेडेशन लिस्ट में नहीं हुआ संशोधन
विभाग में हर साल ग्रेडेशन लिस्ट तैयार की जाती है जिसमें नाम, योग्यता, नियुक्ति का प्रकार श्रेणी/ जाति, जन्म तिथि, गृह जिला, प्रथम नियुक्ति की तारीख, वर्तमान पद, पर नियुक्त पद पदस्थापना आदि का उल्लेख होता है। इसी सूची के आधार पर प्रमोशन किया जाता है इस सूची में यदि कोई गड़बड़ी होती है तो हर वह गड़बड़ी जिस किसी से भी संबंधित हो उसे 30 दिनों के भीतर संशोधन के लिए देना होता है यदि डॉ रोकड़े की जाति/वर्ग को लेकर ग्रेडेशन लिस्ट में कोई गड़बड़ी होती है तो वह संशोधित कर दी जाती है लेकिन जान बूझकर की गई गड़बड़ी को इसलिए अब तक संशोधन नहीं होने से आरक्षित श्रेणी में ही चल रही है।

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