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एक ही माँ बाप के दो सन्तान दोनो की जाति अलग अलग सरकारी पद पाने के लिए भाई और बहन की जाति अलग - अलग ये कैसे?...




रेवांचल टाईम्स :- पशु पालन के संचालक ने अपने निजी स्वार्थ को सिद्ध करने के लिए कोई भी हद पार कर सकते है ।

       वही एक जीता जागता उदाहरण है मध्यप्रदेश के पशुपालन विभाग के संचालक का है जहाँ पर श्री आर. के. रोकड़े की जाति अनुसूचित जनजाति की श्रेणी है और उसकी बहन पिछड़ा वर्ग की श्रेणी में नोकरी कर रही है। एक माँ बाप की दो संताने बहन पिछड़ावर्ग श्रेणी में और भाई अनुसूचित जनजाति की श्रेणी में! 




           वही पूरा मामला इस प्रकार से है कि डॉ आर. के. संचालक पशु पालन विभाग भोपाल की तथा बहन श्रीमति पुष्पा सावरकर का है। शिक्षिका दोनो सगे भाई बहन है। और वही इनके पिता का नाम स्वर्गीय आत्माराम रोकड़े और माता श्री मति वेणु बाई रोकड़े है।



           पर चौकाने वाली वात ये है कि डॉक्टर आर. के. रोकड़े की जाति प्रमाण पत्र और पद क्रम सूची में उल्लेख के अनुसार वे धनवार जाति  है। जो कि मध्यप्रदेश में अनुसूचित जनजाति के अंतर्गत आती है और उसी जाति के अंतर्गत डॉ आर. के. रोकड़े शासकीय पद का लाभ ले रहे है। पर वही इनकी बहन श्रीमती पुष्पा सावरकर शादी के पूर्व कुमारी पुष्पा रोकड़े थी जो कि शादी होने के पस्चात वे सावरकर हो गई जो कि वह जाति भी अन्य पिछड़ा वर्ग के अंतर्गत आती है वही श्री मति पुष्पा सावरकर की वे पदक्रम सूची 2020 के अनुसार शिक्षिका के पद में कार्यरत है तथा उनकी जाति अन्य पिछडा वर्ग श्रेणी के अंतर्गत आती है जिससे वह शासकीय सेवा का लाभ ले रहे है। और वही उनके सगे भाई डॉ आर. के. रोकड़े ने खुद को अनुसूचित जनजाति का बताकर और प्रमोशन पर प्रमोशन लेते चले गए पर अब इस बात की जांच भी हुई और नतीजा सिफर रहा।

                वही डॉ आर. के. रोकड़े की अनुसूचित जनजाति की श्रेणी के आधार में ले रहे शासकीय सेवा का ले रहे लाभ में रेवांचल टाईम्स की टीम ने इनके ग्रह ग्राम से लेकर इनके पूर्वजो तक कि जानकारी प्राप्त की है वही रेवांचल टीम ने की प्राप्त जानकारी के अनुसार डॉ आर. के. रोकड़े द्वारा अपने विभाग को अपनी चल अचल संपत्ति से भी पूर्णतः अवगत न कराते हुए अपनी ग्रह ग्राम भारसिंगी राज्य महाराष्ट्र की सम्पत्ति को अपने विभाग के सामने नही बताई है जैसा कि इनके द्वारा विभाग के समक्ष प्रस्तुत अचल सम्पत्ति पत्रक में सिर्फ सिवनी और भोपाल के ही सम्पत्ति का विवरण इनके दिया गया है। जिस्से इनके पूर्वजो के मूलनिवास का पता न चल सके और यह अनुसूचित जनजाति के अंतर्गत का लाभ लेते रहे।  जिसकी शिकायत जाँच हेतु रेवांचल टाईम्स की टीम ने डॉ आर. के. रोकड़े के उच्च अधिकारियों को लिखित में मय साक्ष्य दी है। अब देखना यह कि इनके विभाग और जाँच कर्ता दीये गए साक्ष्य में क्या कार्यवाही करते है।

      अब देखना यह बाकी है कि रेवांचल टाईम्स की टीम के द्वारा दिये गए दस्तावेजो के आधार पर होने वाली जांच में क्या जांच अधिकारी कर्मचारी ये पता लगा पाऐगें की भाई और बहन में आख़िर किसकी जाति सही है? 

                 वही जब रेवांचल की टीम ने इस सम्बंध में डॉ आर.के. रोकड़े से उनका पक्ष जानना चाहा तो उनका मोबाइल अटेंड नही हुआ।

                        शेष अगले अंक में लगातार....

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