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Monday, February 15, 2021

कहो तो कह दूँ - "तू इस तरह से मेरी जिंदगी में शामिल है"






रेवांचल टाईम्स :- पिछले दिनों  महाकाल के दर यानी उज्जैन में बीजेपी के विधायकों के  लिए  दो दिवसीय पाठशाला लगाई  गयी  तमाम बीजेपी विधायकों को वंहा पार्टी के बड़े नेताओं ने नसीहतें दीं। इस दौरान सबसे बड़ी शिक्षा ये दी गयी कि विधायक 'दलालों' से बच कर रहें क्योंकि जैसे  ही व्यक्ति सत्ता में आता है 'दलाल'  चारो तरफ घेरा डालने लगते हैं इसलिए इन दलालों को अपने पास मत फटकने देना l अपने को तो बड़ा ही अचरच हुआ कि मामाजी यानि मुख्यमंत्री शिवराज सिंह ने ये नसीहत कैसी दे डाली, 'दलाल' तो जिंदगी के हर कदम पर आपके साथ है वो तो ईश्वर  की तरह 'सर्वव्यापी' हो चुका है उससे कैसे बच पाओगे l अब आप कहेंगे  कि दलाल कैसे इतना इम्पोर्टेन्ट  हो  गया  तो हम आपको बतलाये देते है कि बिना 'दलालों' के जिंदगी चल ही नहीं सकतीl आपको ट्रेन में रिज़र्वेशन करवाना है  सारी सीटें फुल हैं  दलाल की मदद लो वो  तत्काल आपको बर्थ दिलवा देगा, आपको गाडी का लायसेंस बनवाना हो, गाड़ी का रजिस्ट्रेशन करवाना हो तो दलाल के बिना काम नहीं होगा, आपको मकान बेचना हो या फिर  या खरीदना हो दलाल की  जरूरत पड़ेगी l मुम्बई में तो बिना दलाल के आप न तो मकान किराये से ले  सकते हो और न  मकान किराये पर दे सकते हो ,  शेयर खरीदना है तो दलाल जरूरी है,  बैंक से लोन चाहिए तो  तो बिना दलाल के लोन पास नहीं हो सकता  हो सकता, कलेक्ट्रेट में नामांतरण करवाना हो, गरीबी रेखा का कार्ड बनवाना हो, खसरा में अपना नाम  चढ़वाना  हो तो दलाल की शरण में तो जाना ही पड़ेगा, किसे भी सरकारी डिपाटमेंट  में चले जाओ कोई काम करवाना है तो दलालों का मुंह ताकना ही पड़ता है कोई बड़ा  टेंडर  लेना हो तो बिना दलाल के टेंडर हाथ में नहीं  आने  वाला, विदेशों से रक्षा सौदे होने है तो उसमें भी दलाल के बिना काम नहीं चलताl दलाल का कितना महत्त्व है कि बंबई  में  शेयर मार्किट यानी  'बम्बई स्टॉक एक्सचेंज' की बिल्डिंग के लिए जो रास्ता जाता है उसे 'दलाल स्ट्रीट' कहा जाता है कुछ समय पहले तक तो बाकायदा एक मैगजीन भी 'दलाल स्ट्रीट' के नाम से निकलती थीl एक  फिल्म भी 'दलाल' के नाम से  आई थी जिसका एक गीत बड़ा ही मशहूर हुआ था 'चढ़ गया ऊपर रे अटरिया पे लोटन कबूतर रां'l   दलाल शब्द तो इतना महत्वपूर्ण हो गया है की अब  नेशनल टीवी चेनल्स की टी वी डिबेट  में विपक्षी पार्टी के प्रवक्ता खुले आम टीवी  ऐंकरों  को 'दलाल' कहने लगे है 'प्रेस'  अब 'मीडिया' हो गया है मीडिया यानि 'मीडियम' यानि 'माध्यम' यानि 'दलाल' ये बात अलग है कि  दलाल को 'बिचौलिये' 'ब्रोकर'  'मीडियेटर' जैसे शब्दों से भी नवाजा जाने लगा है क्योकि पह्ले जमाने में देह व्यापार  के धंधे में  में इस शब्द का उपयोग किया  जाता था पर बाद में तो हर जगह 'दलाल' का  साम्राज्य  सा हो गया हैं ,अब मामाजी आप ही बताओ जो  दलाल समाज के हर कोने में घुसा हुआ है उससे कैसे बचा जा सकता है अपने को लगता है मामाजी को एक दिन 'निदा फाजली' द्वारा लिखा गया  'आप तो ऐसे न थे' फिल्म  का  ये  गीत  शांति  से  बैठकर  सुन  लेना  चाहिए


'तू इस तरह से मेरी जिंदगी में शामिल है, जहां भी जाऊं तो लगता है तेरी महफ़िल है'


नारायण त्रिपाठी नहीं मानेंगे


बीजेपी के मैहर से चुने गए विधायक नारायण त्रिपाठी पर बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष की डांट फटकार का लगता है कोई असर नहीं हुआ है वे अलग विंध्य की मांग का अपना झंडा बुलंद किये हुए हैं  एक दिन रैली निकाल दी तो अब प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी जी को  को चिठ्ठी लिखा मारी  कि कैसे विंध्य की उपेक्षा हो रही है और अब जरूरत है कि अलग से विंध्य  प्रदेश बना दिया जाए, नेता हो तो ऐसा l अपने इलाके के  लिए अपने लोगों की ऐसी  फिक्र l एक अपना महाकोशल है एक मंत्री नहीं बना लेकिन कोई 'चूं चपट' नहीं कर रहा, उपेक्षा के 'लपाड़े' पर 'लपाड़े' खा रहा है लेकिन मजाल  है कि कोई कुछ बोल देl कब से पृथक महाकौशल की मांग कुछ सामाजिक  संस्थाएं कर रही थी लेकिन किसी ने उनका साथ नहीं दिया और आज ये हालत है कि महाकौशल सबसे  ज्यादा उपेक्षित  हो  चूका  है लेकिन किसी को चिंता नहीं है, बीच  में  अपने विधायक  अजय  भैया ने आवाज  उठाई  थी,  ट्वीट  कर कर के महाकौशल के दर्द को सामने लाने की कोशिश भी  की थी पर बाद में पता नहीं क्या हुआ  उनकी भी आवाज डूब सी गयी l अपन तो मानते है  त्रिपाठी  जी को कम से काम अपने इलाके की आवाज तो बुलंद  कर रहे हैं ये बात अलग है कि उनका  सपना अलग  विंध्य  के मुख्यमंत्री बनने का हो  वो भविष्य की बात है लेकिन जिस दमदारी से वे विंध्य के लिए  लड़ रहे है उससे  महाकोशल के नेताओं को भी शिक्षा लेने की जरूरत है वरना महकौशल  ऐसी ही  पिछड़ता   जाएगा और नेताओ के मुंह पर ताले लगे  रहेंगे l 


सुपर हिट ऑफ़ द वीक


'तुम मुझे कितना प्यार करते हो' श्रीमती जी ने श्रीमान  जी से ' वेलेंटाइन डे' पर पूछा 


'जितना तुम सोच भी नहीं सकती'


'फिर भी  कितना' श्रीमती जी ने फिर पूछा 


'इतना कि दिल करता है कि तुम्हारी जैसी एक और ले आऊं' श्रीमान जी का उत्तर था

                                        चैतन्य भट्ट

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