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Friday, February 5, 2021

शहर में खुलेआम हो रहा गांजे का अवैध कारोबार पुलिस प्रशासन की घोर लापरवाही



रेवांचल टाईम्स  - शहर में काफी दिनों से गांजे का कारोबार धड़ल्ले से किया जा रहा है, शहर सहित गांव की गलियों में बिक रही नशीली वस्तुएं युवाओं की जिंदगी तबाह कर रही हैं। आलम यह है कि शहर में अधिकांश जगह खुलेआम पुलिस-प्रशासन के आँख के नीचे गांजे की बिक्री हो रही है। शहर के गली मोहल्लों में गांजा आसानी से मुहैया हो रहा है। लेकिन पुलिस प्रशासन धृतराष्ट्र की भूमिका में मशरूफ है है। यही वजह है कि गांजे का अवैध कारोबार करने वालों के हौसले बुलंद हैं। शहर के संभ्रात घराने के युवा इसकी चपेट में आ चुकें है और रोजाना नदियों के घाट के अलावा शहर के कुछ महत्वपूर्ण इलाकों में शाम ढलते ही गांजे की चीलम से धुंआ उड़ाते हुए युवाओं की टोलियां दिखाई देती है। बावजूद इसके पुलिस प्रशासन कोई पहल नही कर रहा है और पुलिस की इसी लापरवाही के चलते धीरे-धीरे शहर में गांजे की लत में युवा आ रहें है। खुलेआम मिल रहे गांजे की बिक्री भी लगातार बढ़ रही है। बीतें एक साल से गांजे के अवैध धंधे में लिप्त कारोबारियों पर पुलिसिया चाबुक नही चला हैं। यहां यह भी बताना जरूरी है कि शहर व ग्रामीण क्षेत्र में कई वर्षों से गांजे का अवैध कारोबार खुलेआम हो रहा हैं। गांव-गांव तक फैला यह व्यापार तेजी से लोगों के बीच नशा बांट रहा हैं। नशे के इस अवैध व्यापार को रोकने के लिए नारकोटिक्स एक्ट बनाया गया है, लेकिन पुलिस व आबकारी विभाग गांजे की बिक्री पर अंकुश नहीं लगा पा रही हैं।

अक्सर देखा जाता है कि नशे के आदी व्यक्ति कहीं भी चिलम सुलगाने लगते है। चाहे वह सार्वजनिक स्थान हो या फिर खुला मैदान, इतना ही नही इस तरह का नशा करने वाले लोग सडक़ के किनारे भी बैठ कर चिलम चढ़ाने लगते हैं। छोटे तबके के लोगों के अलावा शहर के रसूखदारों परिवारों के युवाओं को इस नशे की लत लग चुकी है। पर विडंबना यह है कि नगर थाने के कोतवाल साब अब तक मामलें में अपनी आंखे मूंदे हुये है। पूरे शहर में गांजे के शौकीनों को आसानी से गांजा मुहैया हो जाता है,क्योंकि नैनपुर क्षेत्र में गांजे के कई अड्डे स्थित है जहाँ 24 घंटे खुलेआम गांजे की बिक्री होती है।प्रतिमाह लाखों रूपए का हो रहा है गांजे का अवैध कारोबार पुलिस प्रशासन द्वारा कार्यवाही नहीं करने से गांजे के कारोबारी बेखौफ होकर खुलेआम नशे के नाम पर मौत की पुडिय़ा बेच रहे है। एक अनुमान के मुताबिक शहर व शहर से लगे आस-पास के ग्रामीण इलाकों में प्रतिमाह लाखों रुपये की गांजे की बिक्री हो रही है जिसकी दो ही वजह संभव है या तो गांजे का अवैध कारोबार पुलिसिया संरक्षण में फल-फूल रहा है या फिर पुलिसिया खुफिया तंत्र को गांजे के अवैध कारोबार के विषय में कोई इनपुट नहीं मिल पा रहा है। ऐसे में दोनों ही स्थितियों को शहर के हित नहीं माना जा सकता है।

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