रेवांचल टाइम्स :- हर वर्ष की तरह इस वर्ष भी संत शिरोमणी रविदास महाराज की 644 वीं जयंती धूमधाम से मनाई गई। इस अवसर पर मेहरासिवनी ग्राम में स्थित संत रविदास मंदिर में पूजा अर्चना कर विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। इस दौरान नगर में बाइक रैली भी निकाली गई।
नगर में निकली बाइक रैली
इस संबंध में संगठन के अध्यक्ष चमन चौधरी ने बताया कि हर वर्ष की तरह इस वर्ष भी संत रविदास की जयंती धूमधाम से हर्षोल्लास के साथ मनाई गई। इस अवसर पर मेहरासिवनी में स्थित रविदास मंदिर से बाइक रैली निकाली जो पहले पिपरिया मार्केट पहुंची,फिर निवास नगर तक पहुंची नगर के मंडला तिराहा, शतचंडी मार्केट,बाजार चौक,आजाद चौक,बस स्टैंड होते हुए जहां संत रविदास की पूजा अर्चना कर रैली वापस मेहरासिवनी कार्यक्रम स्थल पहुंचकर संपन्न हुई।
कार्यक्रम में मंच का संचालन उदय सिंह चौधरी बहुजन समाज पार्टी जिलाध्यक्ष मंडला के द्वारा किया गया। इस कार्यक्रम में मेहरासिवनी सरपंच रामलाल वरकड़े,रविशंकर चौधरी, नन्नू चौधरी, जगदीश रोहित चौधरी, गोपाल, पंचम चौधरी,शिवकुमार चौधरी, देवेन्द्र चौधरी, चौधरी,तरुण चौधरी, विपिन चौधरी, दिवेश चौधरी, सतीश चौधरी, विष्णु चौधरी,रोहित चौधरी, गुड्डू चौधरी, एवं समस्त चौधरी परिवार भारी संख्या में मौजूद रहें।
रविदास जयंती के अवसर पर सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। जिसमें समाज के बालक-बालिकाओं एवं समाज के कार्यकर्त्ताओं के द्वारा भाषण व गीतों की शानदार प्रस्तुति दी गई। इस अवसर पर भंडारा का भी आयोजन किया गया। जिसमें स्वजातीयजन बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।
आज संत रविदास जयंती है. संत रविदास जयंती हिंदू कैलेंडर के अनुसार माघ पूर्णिमा को मनाई जाती है. इस बार माघ पूर्णिमा 27 फरवरी को है और आज मध्यप्रदेश समेत पूरे देश में कई कार्यक्रमों का आयोजन किया जा रहा है. इस साल रविदास जी का 644वां जन्मदिन मनाया जा रहा है. संत रविदास का जन्म उत्तर प्रदेश के वाराणसी में जन्म हुआ था ,और उनकी माता का नाम कलसा देवी और पिता का नाम श्रीसंतोख दास था.
कैसे मनाई जाती है, रविदास जयंती
देशभर में माघ पूर्णिमा के अवसर पर संत रविदास का जन्म दिवस बहुत ही उत्साह के साथ मनाया जाता है. इस दिन लोग कीर्तन जुलूस निकालते हैं. इस दौरान गीत- संगीत, गाने, दोहे सड़कों पर बने मंदिरों में गाए जाते हैं. संत रविदास जी के भक्त उनके जन्म दिवस के दिन घर या मंदिर में बनी उनकी छवि की पूजा करते हैं.
संत रविदास का जन्म वाराणसी के पास के गांव में हुआ था. यही कारण है कि वाराणासी में संत रविदास का जन्म दिवस बेहद भव्य तरीके से मनाया जाता है. इसमें उनके भक्त सक्रिय रुप से भाग लेने के लिए वाराणसी आते हैं.
ऐसे गुजरा संत रविदास का जीवन
संत रविदास के पिता जूते बनाने का काम करते थे. रविदाज भी अपने पिता की जूते बनाने में मदद करते थे. इस कारण उन्हें जूते बनाने का काम पैतृक व्यवसाय के तौर पर मिला. उन्होंने इसे खुशी से इसे अपनाया और पूरी लगने के साथ वह जूते बनाया करते थे.
साधु-संतों के प्रति शुरुआत से ही संत रविदास का झुकाव रहा है. जब भी उनके दरबार पर कोई साधु- संत या फकीर बिना जूते चप्पल के आता था, तो वह उन्हें बिना पैसे लिए जूते चप्पल दे दिया करते थे.
समाज में फैले भेद-भाव, छुआछूत का वह जमकर विरोध करते थे. जीवनभर उन्होंने लोगों को अमीर-गरीब हर व्यक्ति के प्रति एक समान भावना रखने की सीख दी. उनका मानना था कि हर व्यक्ति को भगवान ने बनाया है, इसलिए सभी को एक समान ही समझा जाना चाहिए. वह लोगों को एक दूसरे से प्रेम और इज्जत करने की सीख दिया करते थे.
सबकी मदद करते थे
संत रविदास की एक खासियत ये थी कि वे बहुत दयालु थे. दूसरों की मदद करना उन्हें भाता था. कहीं साधु-संत मिल जाएं तो वे उनकी सेवा करने से पीछे नहीं हटते थे।
रेवांचल टाइम्स निवास से देवेन्द्र चौधरी की रिपोर्ट

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