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Monday, January 4, 2021

कहो तो कह दूँ = खबरदार ! जो अब किसी भ्रष्ट अफसर को हाथ भी लगाया




 रेवांचल टाईम्स डेस्क - जी हाँ ये घोषणा अपने मामाजी यानि शिवराज सरकार के 'सामान्य प्रशासन' विभाग ने जारी कर दी है, उसका साफ कहना है कि आज के बाद यदि किसी  भ्रष्ट  अफसर की जांच करना है तो पहले उसके विभाग से परमीशन  लेनी पड़ेगी कि 'हुजूर आपके विभाग का एक अफसर बड़ा ही भ्रष्टाचारी  है  हमारे पास उसकी कई शिकायतें  आई हैं और हम इसकी जांच करना चाहते है कृपया हमें  परमीशन देने की  कृपा करें'l अब आप ही बताओ ऐसा कौन सा विभाग होना जो अपने  लाडले, प्यारे, दुलारे भृष्ट अफसर या कर्मचारी  की जांच करने की परमीशन जांच  एजेंसियों  को देगा, उसके  भृष्टाचार में ही सबको हिस्सा मिलता है अपने हिस्से पर कौन सा विभाग लात मरवाने का जोखिम मोल लेगा l अभी तक तों ये होता था कि 'ईओडब्लू' और 'लोकायुक्त' भ्र्ष्ट  अफसरों और कर्मचारियों पर डायरेक्ट  एक्शन  ले लेती थी लेकिन अब उनके हाथ में  'बाबा जी का ठुल्लू' रह गया है किसी भी भृष्टाचारी की शिकायत आएगी तो पहले उसे उसी के विभाग में भेजना पडेगा फिर वो विभाग तय करेगा कि मामला जांच के लायक है कि नहीं, ख़ुदाना खास्ता यदि किसी ईमानदार अफसर के पास ये परमीशन की एप्लिकेशन पंहुच भी गई और उसने स्वीकृति दे भी दी तो पहले वो 'समन्वय  समिति' के पास ज़ायेगी और फिर समन्वय कमेटी इस बात का निर्णय लेगी कि जांच होना है कि  नहींl जबसे ये आदेश आया है तमाम भृष्ट अफसरों और कर्मचारियों ने अपनी सरकार और उसके सामान्य प्रशासन विभाग की जय जय कार से आसमान गुंजा दिया है और तो और लोकायुक्त और ईओडब्लू के अफसरों को 'मुंह चिढ़ाने' के लिये भी वे उनके बंगलों के सामने पंहुच गए है इन भृष्टों का साफ़ कहना है कि ये साले 'ईओडब्लू' वाले और 'लोकायुक्त' वाले पता नहीं अपने आप को क्या समझते थे, अरे भाई  भृष्टचार ही तो करते थे किसी का 'मर्डर' 'रेप' तो  नहीं करते थे और फिर 'मलाईदार' पोस्टिंग के लिए जब माल लगता है तो हम अपने घर से  थोड़ी न  पैसा  देंगे  यँही से कमाएंगे और यही खर्च भी कर देंगेl अब अपनी लोकायुक्त और ईओडब्लू वालो को सलाह है कि  बेफालतू में मगजमारी  मत करो अब आप लोगों के पास कोई काम धाम तो बचा नहीं है बेहतरीन फ्री की तनख्वाह लो और दफ्तर  में बैठकर दस रुपये की मूंगफली और चना बुलवा कर फांकते रहो  और टाइम पास करो, किसी भी  भृष्ट अफसर या कर्मचारी की जांच की  परमीशन तो आप लोगों को मिलनी  ही नहीं हैl वैसे  एक सलाह सरकार को भी है कि जैसे  दिग्गी  राजा  की सरकार ने 'राज्य परिवहन' बंद कर दिया था   वैसे ही अब आप भी ये बेफालतू के डिपाटमेंट 'ईओडब्लू' और 'लोकायुक्त' बंद कर दो जब उनके पास कोई काम ही नहीं बचा है तो उन्हें  बैठाये  रखने की जरूरत भी क्या है उन्हें  किसी  दूसरे काम में लगा दो, अपने को तो ये लगता है कि प्रदेश की  पुलिस  फ़ोर्स  भी उस आदेश  का इन्तजार कर रही है जिसमें कहा जाएगा कि आप लोग भी 'रेप' 'मर्डर'  'डकैती' 'लूट' 'जालसाजी' 'अपहरण' कि  एफआईआर  लिखने के पहले हमारी परमिशन लेना तभी  रिपोर्ट लिखना लिखना समझ गए न l 


आखिर कब तक इन्तजार करें हम 


लो भैया बड़े  दिनों से मंत्रीमंडल के विस्तार की खबरें सुन रहे थे इस प्रदेश   के लोग, बीजेपी के पच्चीसों नेताओं ने अपने अपने कुरते  पैजामे  बंडी ड्राय क्लीन करवा कर रख ली थी, दिन भर मोबाइल को अपने कानों  से चिपकाएं  रहते थे कि पता नहीं कब 'मुख्यमंत्री निवास' से फोन आ जाए कि  कल आपको मंत्री पद की शपथ  लेने आना है चमचे भी सुबह से शाम  तक बस एक ही रट लगाए रहते थे कि भैया  इस  बार तो आपका ही नंबर है आप इतने सीनियर हो, क्या ये हाई  कमान को दिखता नहीं है, चमचों की बाते सुनकर नेताजी फूल कर कुप्पा हो रहे थे और आँखों ही  आँखों में शपथ ग्रहण की तस्वीर उन्हें  दिख जाती थी पर मामाजी ने मंत्री मंडल के विस्तार के नाम पर ऐसा बम  फोड़ा कि सबकी हवा निकल गई, कुल जमा दो और वो भी  सिन्धिया जी के खासमखास को मंत्री बना दिया और बीजेपी के बड़े बड़े जोधा टापते  रह गए, कितने अरमान थे, कँहा कँहा से जुगाड़ नहीं लगाया था इस बार मंत्री मंडल में शामिल होने के लिए  पर सारा का सारा कचरा हो गया, जब से मंत्रीमंडल में विस्तार हुआ है और उन बीजेपी नेताओं का  नंबर नहीं आया तबसे चमचों की  संख्या भी कम हो गयी है सुबह से शाम तक नेता लोग रास्ता तकते रहते  हैं  कि चमचे आएंगे ढाढस बँधायेंगे पर चमचे तो ऐसे गायब हुए है जैसे 'गधे के सर से सींग' अपना तो इन  नेताओं को एक ही सुझाव है की सारे  उम्मीदवार एक साथ बैठ कर  मंत्री की कुर्सी की तरफ देख कर ये गाना गाओ  


'हम इन्तजार करेंगे, हम इन्तजार करेंगे, तेरा  क़यामत तक 


खुदा करे  कि क़यामत हो और  मैं  तुझ पर बैठूं


सुपर हिट  ऑफ़ द वीक


'आपके पति  की मौत कैसे हुई' जज ने पूछा 


'जहर खाने  से' श्रीमती जी  ने बताया 


'लेकिन इनके शरीर पर चोटों के  निशान  कैसे हैं' जज ने फिर पूछा 


'ये खाने  से मना कर रहे  थे' श्रीमती जी ने जवाब दिया

                                       चैतन्य भट्ट

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