रेवांचल टाईम्स :- देश का अन्नदाता किसान जो पूरे देश का पेट भरता है, आज अपनी जायज मांगो को लेकर पिछले 50 दिनों से हड्डी कपाने वाली ठंड में बारिश और मावठ के बीच खुले आसमान के नीचे बैठा है और यह अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण व दुःखद है की उनमे से 60 किसानों (अन्नदाताओं ) ने अपने प्राणों की आहुति दे दी है। यह ऐतिहासिक किसान आंदोलन हमारे देश का अब तक का सबसे बड़ा आंदोलन है। देश के अन्नदाताओं के साथ आखिर ऐसा अन्याय अत्याचार केन्द्र सरकार द्वारा क्यों किया जा रहा है...? क्या जय जवान, जय किसान का नारा हमारे देश मे सिर्फ एक नारा मात्र है, इसका कोई अर्थ नही, क्या हमारा देश सिर्फ कहने को कृषि प्रधान देश है, जहाँ अन्नदाताओं की कोई सुनवाई नही या फिर देश का किसान सिर्फ सत्ता के शिखर तक पहुँचने का रास्ता मात्र है।
महामहीम,आम आदमी पार्टी आपसे अनुरोध करती है की आप इस मामले मे तत्काल मध्यस्थता करें एवं केंद्र सरकार को निम्नलिखित आदेश दें।
हमारे देश के अन्नदाताओं की सारी मांगो को तत्काल प्रभाव से मानकर इन तीनो काले कानूनों को अविलंब वापिस लेना चाहिए।
भारत के अब तक के सबसे बड़े किसान आंदोलन में प्राण गवाने वाले हमारे देश के अन्नदाताओं को शहीद का दर्जा मिलना चाहिए, साथ ही हर शहीद के परिवार को जीवन यापन करने के लिए 1 करोड़ रुपये की सम्मान राशि केंद्र सरकार को तत्काल देनी चाहिए ।
सरकार द्वारा न्युन्तम समर्थन मूल्य (MSP) का कानून बनाया जाए, जिसके तहत देश में MSP के नीचे किसी भी प्रकार की फसल खरीद को गैरकानूनी करार दिया जाये।नवीन शर्मा प्रकाश पाठक हेमंत विश्वकर्मा नीतेश नामदेव महेश साहू गोपाल सिंह बघेल नर्वदा प्रसाद ब्रजेन्द्र यादव मुमताज़ खान रोहित विश्वकर्मा आदि
रेवांचल टाइम्स से हेत सिंह रघुवंशी की रिपोर्ट

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