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Thursday, January 21, 2021

बच्चों के चेहरे में आएगी खुशी 23 जनवरी को ह्दय रोग से पीड़ित बच्चों का जांच परीक्षण



रेवांचल टाईम्स :-  राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन की योजना राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (आरबीएसके) के अंतर्गत 0 से 18 वर्ष तक के बच्चों को निःशुल्क स्वास्थ्य सेवाएं जिला शीघ्र पहचान एवं हस्तक्षेप केन्द्र में दी जा रही है। जिससे कि पीड़ित बच्चे निरोगी हो सके। इसी उद्देश्य से आरबीएसके अंतर्गत बालाघाट कलेक्टर दीपक आर्य के निर्देशन में 23 जनवरी शनिवार को सुबह 10.30 बजे से जिला शीघ्र पहचान एवं हस्तक्षेप केन्द्र जिला चिकित्सालय बालाघाट में मुख्यमंत्री बाल ह्दय उपचार योजना के अंतर्गत ह्दय रोग से पीड़ित बच्चों का निःशुल्क जांच परीक्षण श्री कृष्णा ह्दयालय एवं क्रिटिकल केयर सेंटर नागपुर द्वारा किया जाएगा।

मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉक्टर मनोज पांडे ने ऐसे ह्दय रोग से पीड़ित बच्चों को शिविर में आकर लाभ लेने की अपील की है। शिविर में श्री कृष्णा ह्दयालय एवं क्रिटिकल केयर सेंटर के विशेषज्ञ द्वारा जांच परीक्षण किया जाएगा। परीक्षण के बाद चिन्हित बच्चों को शल्य चिकित्सा के लिए निःशुल्क भेजा जाएगा। शिविर के पहले आरबीएसके टीम और आशा कार्यकर्ता द्वारा हदय रोग से पीड़ित बच्चों को चिन्हित किया जा रहा है। बताया गया कि अभी तक 60 बच्चों का पंजीयन कर लिया गया है। शिविर में कार्डियोलाॅजिस्ट भी अपनी सेवाएं ईको जांच में देंगे।

हृदय रोग से पीड़ित बच्चों को मिलेगा लाभः

मुख्यमंत्री बाल हृदय उपचार योजना के अंतर्गत 0 से 18 वर्ष के ह्दय रोग से पीड़ित बच्चों को योजना के तहत जांच परीक्षण कर सर्जरी कराई जाएगी। शिविर में हर वर्ग के पीड़ित बच्चों का जांच परीक्षण कर निःशुल्क शल्य चिकित्सा के लिए चयनित किया जाएगा। जिनका निःशुल्क उपचार श्री कृष्णा ह्दयालय एवं क्रिटिकल केयर सेंटर नागपुर में किया जाएगा।

तीन माह निःशुल्क फालोअपः

योजना के तहत हृदय रोग से पीड़ित चिन्हित बच्चों का शासन द्वारा निःशुल्क उपचार किया जा रहा है। बच्चों की सर्जरी के बाद अगले तीन माह तक बच्चों का फालोअप निःशुल्क किया जाता है। फालोअप में तीन माह तक आवश्यक दवाईयां, जांच परीक्षण निःशुल्क दी जाती है। इस दौरान पीड़ित बच्चे के साथ दो व्यक्ति का रहना, खाना भी निःशुल्क रहता है।

ये दस्तावेज जरूरीः

जिला शीघ्र हस्तक्षेप प्रबंधक राजाराम चक्रवर्ती ने बताया कि निःशुल्क मुख्यमंत्री बाल हृदय उपचार योजना के अंतर्गत 23 जनवरी शनिवार को जिला शीघ्र पहचान एवं हस्तक्षेप केन्द्र जिला चिकित्सालय बालाघाट में सुबह 10.30 बजे से हृदय रोग से पीड़ित बच्चों का जांच परीक्षण किया जाएगा। शिविर में चयनित बच्चों को अपने साथ जन्म प्रमाण पत्र, आधार कार्ड, मूलनिवासी प्रमाण पत्र, परिचय पत्र, दो कलर फोटो लाना आवश्यक है।

बच्चों में हृदय रोग की पहचानः

सिविल सर्जन डाॅ एके जैन ने बताया कि अब बच्चे भी हृदय रोग से अछूते नहीं रहे। आम तौर पर बच्चों में होने वाले हृदय रोगों को पहचानना कठिन होता है क्योंकि इसके लक्षण बहुत सामान्य होते है। माता-पिता भी बच्चों में हृदय रोगों के लक्षणों की पहचान नहीं कर पाते और समय पर इसकी पहचान नहीं होने के कारण ये रोग गंभीर हो जाते है। अनदेखी के कारण ही ये बीमारियां जीवन के लिए भी खतरा बन जाती है। हृदय रोग से पीड़ित बच्चों की पहचान बच्चों में बार बार बुखार आना, सांस लेने में तकलीफ, कमजोरी या थकान, होंठ नीले पड़ जाना, एक पैर में सूजन, दिल की धडकन की ताल में परिवर्तन, लगातार या सूखी खांसी, त्वचा पर चकत्ते, अंगुलियां के सिरे मोटे हो जाना ह्दय रोग से पीड़ित की पहचान की जा सकती है।

सात साल की उम्र तक दिखाई देने लगते है लक्षणः

बचपन में शारीरिक गतिविधियों का अभाव, मधुमह, उच्च रक्तचाप और रक्त में कोलेस्ट्रॉल के स्तर का बढना मोटापे का कारण बन सकता है। इस सभी लक्षणों को चिकित्सा विज्ञान की भाषा में मेटाबोलिक सिंड्राम कहा जाता है। इसके कारण उम्र बढने के साथ-साथ हृदय संबधी समस्याएं पैदा होने की संभावना काफी अधिक हो जाती है। शारीरिक गतिविधियों में भाग नहीं लेने वाले अधिकत्तर बच्चों में सात साल की उम्र तक मेटाबोलिक सिंड्राम का कम से कम एक लक्षण जरूर दिखाई देने लगता है। यह अलग बात है कि माता-पिता इन लक्षणों की पहचान नहीं कर पाते और बच्चा हृदय रोग से ग्रस्त हो जाता है।

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