रेवांचल टाईम्स - आधिकारिक सूत्रों से पता चला है की निलंबित किये मण्डला के जिला प्रबंधक मनोज श्रीवास्तव को डिडोरी जिला प्रबंधक के पद पर बाहाल कर दिया गया है वहीं एक अन्य निलंबित बालाघाट के जिला प्रबंधक को भी अन्यत्र बाहाल करने की कवायद की जा रही है। जानकारी मिली है की यह नियुक्ति प्रमुख सचिव खादय विभाग मध्यप्रदेश शासन के स्तर पर की गई है इस नियुक्ति के पीछे केन्द्रीय शासन के एक मंत्री का दबाव होना बताया गया है तथा इसकी आड में लाखों रूपये की डीलिंग किये जाने की जानकारी मिली है।.....
बालाघाट एवं मण्डला जिले में उजागर हुये अमानक पशु आहार तुल्य चांवल के मामले में प्रारंभिक जांच के पष्चात आर्थिक अपराध प्रकोष्ट भोपाल द्वारा विभिन्न धाराओं के अंतर्गत मण्डला एवं बालाघाट जिले के नागरिक आपूर्ति निगम के अधिकारियों एवं मिलिंग से संबंधित व्यक्तियों के विरूद्ध अपराध कायम कर विवेचना प्रारंभ की है।
वही दूसरी तरफ मण्डला तथा बालाघाट जिले के जिला प्रबंधकों को निलंबित करने, गुणवत्ता निरीक्षकों एवं नियंत्रकों की सेवाओं समाप्त करने आदेश जारी किये गये थे लेकिन निगम के आला अफसरों की संलिप्तता के चलते निलंबित किये गये जिला प्रबंधकों आरोप पत्र निलंबन किये जाने के संबंध में आरोप पत्र जारी किये जाने के पूर्व ही उन्हें पद पर पूननियुक्त बाहाल किये जाने की जानकारी प्राप्त हुई है।
आधिकारिक सूत्रों से पता चला है की निलंबित किये मण्डला के जिला प्रबंधक मनोज श्रीवास्तव को डिडोरी जिला प्रबंधक के पद पर बाहाल कर दिया गया है वहीं एक अन्य निलंबित बालाघाट के जिला प्रबंधक को भी अन्यत्र बाहाल करने की कवायद की जा रही है। जानकारी मिली है की यह नियुक्ति प्रमुख सचिव खादय विभाग मध्यप्रदेश शासन के स्तर पर की गई है इस नियुक्ति के पीछे केन्द्रीय शासन के एक मंत्री का दबाव होना बताया गया है तथा इसकी आड में लाखों रूपये की डीलिंग किये जाने की जानकारी मिली है।
यह उल्लेखनीय है की प्रमुख सचिव खादय के पद पर नियुक्त अधिकारी पूर्व में नागरिक आपूर्ति निगम के प्रबंध संचालक पद पर रह चुके है तथा इनके कार्यकाल के दौरान बालाघाट जिले सहित प्रदेश के अन्य जिलों में अमानक स्तर के चांवल उपार्जित कर सार्वजनिक वितरण प्रणाली के माध्यम से उपभोक्ताओं में वितरित किया गया है।
इस प्रकार एक ओर इस मामले में आर्थिक अपराध विभाग द्वारा संलिप्त अधिकारियों तथा राईस मिलर्स के विरूद्ध आपराधिक प्रकरण दर्ज कर उनके विरूद्ध विवेचना की कार्यवाही की जा रही है तो दूसरी तरफ विभाग के आला अफसरों के सरक्षण में किये गये इस मामले में संलिप्त अधिकारियों को पून नियुक्ति देकर उन्हें बचाने और मामले को रफा दफा करने की कोषिष की जा रही है।

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