रेवांचल टाइम्स - प्राचीन हनुमान घाट पहुचे महामंडलेश्वर स्वामी प्रज्ञानंद जी महाराज संस्कृति भवन सोमवारी चौक भेरौगंज सिवनी मे दिनांक 14 दिसंबर दिन सोमवार शाम 7 बजे एक अभिव्यक्ति-युवा संवाद कार्यक्रम के मध्यम से निरंजनी अखाड़ा आचार्य मण्डलेश्वर स्वामी प्रज्ञानंद जी महाराज ने प्राकृतिक आपदा और भूकंप ,स्वास्थ्य के अतिरक्ति जल संरक्षण और प्रदूषण के प्रभाव से जन समान्य को किया मार्गदर्शन एवं अपना शुभाशीष इसके उपरांत पहुचे प्राचीन श्री हनुमान घाट जहाँ महामंडलेश्वर स्वामी प्रज्ञानंद महाराज ने सभी भक्त वृंदो के साथ खिलाया दलसागर तालाब मे मछलियों को भोजन और प्राचीन हनुमान घाट के जीर्णोद्धार एवं सौंदर्यकरण की कार्ययोजना और समीप बन रही सेल्फी पॉइंट प्रभु श्री हनुमान कि गदा और प्रभु श्री राम का धनुष कि आकृति से संजय शर्मा ने दी जानकरी
सिवनी- गत दिवस से सिवनी मे समाजिक ,धार्मिक और खेल संस्थाओ और समाजिक कार्यकर्ताओ के सयुक्त सहयोग एवं पहल से एक अभिव्यक्ति-युवा संवाद का कार्यक्रम विभिन उद्देश को लेकर आयोजित किया जा रहा है इसी के तारतम्य मे आज सिवनी पर पधारे प्रभु निरंजनी अखाड़ा के आचार्य मण्डलेश्वर स्वामी प्रज्ञानंद जी महाराज के सानिध्य और मुखकंठ से सनातन हिन्दू धर्म और संस्कृति मे प्रकृति का जीव जगत और जीव जंतु और प्रकृति के आधार पर उपस्थित जन समान्य और भक्त वृंद को मार्गदर्शन दिया गया उलेखनीय है कि द्वारका एवं शारदा पीठाधीश्वर जगतगुरु शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती जी महराज (भारत के स्वतंत्रा संग्राम सेनानी)के सानिध्य आशीर्वाद कृपा और मार्गदर्शन व प्रेरणा से राष्ट्र नव निर्माण, नगर सौंदर्यकरण एवं स्वच्छता अभियान के अन्तर्गत प्राचीन श्री हनुमान घाट एवं दलसागर तालाब का सौंदर्यकरण कार्य भूतपूर्व एन. सी. कैडेट, समाजिक कार्यकर्ताओ, समाजिक-धार्मिक संस्थाओ, पत्रकार बंधुओ, व्यापारी, जनप्रतिनिधि और जिला प्रशासन,जिला पुलिस प्रशासन व नगर पालिका परिषद सिवनी के सहयोग से गैर रजनैतिक रूप से अग्रसर है एक अभिव्यक्ति-युवा संवाद पर स्वामी प्रज्ञानंद महाराज ने कहा क़ि ये जो प्रकृति है साक्षात परमात्मा का हि एक रूप है यहा वृक्षों क़ि हमारे यहा पूजन है इसलिए हमारे यहा पर्वत अरण्य कि पूजन है ये प्रकृति का संरक्षण हि साक्षात परमात्मा कि पूजा है माँ जगदम्बा आदि शक्ति जगत जननी क़ो भी मूल प्रकृति कहा है जो मुला घार स्वरूप मूल घार निरिया भी है जो मूल प्रकृति का मूल स्वरूप है अर्थात हम प्रकृति का संरक्षण करते है प्रकृति का पोषण करते है ये परमात्म कि आराधना है जिस तरह से वैदिक परम्परा के अनुसार हम जल अक्षत चंदन आदिसे पूजन करते है उसी तरह से यदि वृक्षों हि उनका पोषण करने के लिए उसमे जल डालते है रसायन डालते है उसकी रक्षा-सुरक्षा करते हे उसी तरह से पर्वतों कि रक्षा करते है पर्वतों को न खोदा जाए न कटा जाए उनकी सुरक्षा ही से विलग विलग तरह से क्यो कि संपूर्ण सृष्टि परमात्मा का हि रूप मानी गई है उन्होने कहा कि श्रीमद्भागवत कथा मे ये बताया गया कि ये नदिया है ये मेरी नाड़ियाँ है जब वैध आते है आपके उपचार के लिए तो सबसे पहले क्या देखते है नाड़ी ही देखते है नाड़ी मे हि दोषण आ जाता है हमारा स्वास्थ्य खराब हो जाता है उसी तरह नदियां विराट पुरुष कि नाड़ियाँ है सारा संसार समाज यदि नदियो का अस्तित्व खतरे मे डाल देगा तो इनका अस्तित्व बिगड़ जायगा आज प्रदूषण के कारण जो हमारे पर्यावरण मे जो प्रभाव पड़ रहा है जिससे सारे संसार-समाज का ताना बाना बिगड़ जायगा हम सबको प्रकृति के दिए उपहारों को वृक्षों, नदियो पर्वतों क़ो संरक्षित करना होगा तभी ये सृष्टि बच पाएगी प्रकृति आपदा से इसका संतुलन ना बिगड़े हमे इसपर चिंतन मन करना होगा और जन समान्य को जागरूक करना होगा लक्ष्मी कश्यप ने जो प्राचीन हनुमान घाट जीर्णोद्धार और दलसागर तालाब के सौंदर्यकरण को लेकर जो पहल क़ि है ईश्वर उनके लक्ष्य को अवश्य पूर्ण करेंगे मेरा शुभाशीष सदा रहेगा इस अवसर पर योग सम्राट आचार्य महेंद्र मिश्र ने कहा क़ि ईश्वर कि दी हुई मानव जीवन को ईश्वर ने बहुत अच्छे जीवन को जीने का अवसर दिया किन्तु आज दौड़ भाग और भौतिक वादी सुख के चलते लोग अपने स्वास्थ्य के प्रति उतने गंभीर नही है उन्होने कहा कि कम से कम एक धन्टा रोज योगा करे और समय समय पर भोजन के साथ कम से कम रात्रि मे 8 घंटे आराम करे आप अपने स्वस्थ जीवन के लिए आपको स्वयं जागरूक होने कि आवश्कता है क्यो क़ि हम अपने दिनचर्या और भोजन के प्रति लापरवाही से अनेको रोगो से ग्रसित होते जा रहे है इस अवसर पर नगर निरीक्षक नगर कोतवाली एम. डी. नागोतीया ने कहा कि जहा घर्म है बहा नीति है जहाँ नीति है बहा नियत है धर्म हमे जोड़ता है और सदैव अपने समाज संस्कृति कि मर्यादा मे बनाए रखता है ये बहुत ही अच्छा है जहाँ युवा वर्ग हमारे आराध्य शारदा एवं द्वारका पीठाधीश्वर जगतगुरु शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद जी महराज के शुभ आशीष और प्रेरणा से जो प्राचीन श्री हनुमान घाट का जीर्णोद्धार मे अग्रसरजिसके परिणाम आज शहर देख रहा जिस प्रकार यहा युवाओ और सहयोगी द्वारा बिना किसी निस्वार्थ कार्य से इस स्थल का विकास और सौंदर्यकरण कर रहे वो एक दिन मिशाल रहेगा हर अच्छे कार्यो मे समस्या तो आती है जहाँ अच्छाई होती है बहा बुराई मिलेगी ही और जहाँ बुराई रहती बहा अच्छाई का होना तय है जिसका उदाहरण विभीषण और कैकई है जो हम सब जानते है युवाओ को अपने कार्य मे लगे रहने का प्रोत्साहन हेतु अन्य नागरिको से अपील कि।
अखिल बन्देवार के साथ रेवांचल टाइम्स की एक रिपोर्ट


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