रेवांचल टाईम्स - लिंगापोंडी लैम्पस अन्तर्गत आने वाली सोसायटी का शिकायत के बाद हुआ निरीक्षण
प्रबंधक को क़्वालिटी की जानकारी नहीं,सेल्स मैन मैं मजबूर जैसा आएगा बाटेंगे कहना बुलाकर पंचनामा बनवाकर सोसाइटी से अमानक गेंहू चावल वापस करने को कहा, यही नियम व जिम्मेदारी भी प्रबंधक और सेल्स मैन की, जिला स्तर के अधिकारी बिल्कुल किसी को कोई परवाह नही कैसे भी अनाज आये और बाटें, निरीक्षण के दौरान जिला अधिकारी का फोन नहीं लगा, मिलीभगत और अधिकारियों की लापरवाही बर्दाश्त नहीं कि जायेगी,
जब खरीदी केंद्रों से किसान से अनाज खरीदते समय उच्च गुणवत्ता मांगा जाता है फिर सोसाइटी में अमानक अनाज क्यों यह बिना अधिकारियों के मिलीभगत के संभव नहीं।
ख़रीदी केंद्रों में किसान परेशान दलाल और व्यापारियों के मजे, और बेचारे किसान मजबूर हैं 1100,/1200 सौ में अनाज बेचने के लिए उसी अनाज को दलाल और व्यापारी स्टैडर्ड रेट पर ख़रीदी केंद्रों में बेचकर मालामाल हो रहे हैं, सरकार तुगलकी बिल लेकर किसानों के हित की बिल की बात कर रही है प्रशासन साथ दे रहा है,
किसान खरीदी केंद्रों में मजबूर है लाचार है अपने यहाँ अपनी अनाज नहीं बेच पा रहा बाहर कही भी क्या बेचेगा? उचित दाम घर पर ही नहीं मिल रहा बाहर कहाँ मिलेगा,
दिखने लगा किसान विरोधी बिल का असर चारो तरफ़ किसान परेशान है हाहाकार मचा है, और सरकार सरकारी खर्चे पर प्रशासन से कार्यक्रम बिल के हित मे कराकर वाहवाही लूटने की कोशिश में, हकीकत जानकर भी उनके उनकी पार्टी के प्रतिनिधि भक्त बनकर अच्छे बिल का राग अलाप रहे हैं।


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