रेवांचल टाइम्स -कुदरत का खेल भी कितना निराला है 'कोई चंद्रलोक में जीवन की कल्पना करता है 'तो कोई गलियों और कचरू में जीवन की तलाश करता है ।कोई महलों में रहकर हताश है 'निराश है ' खिन्नऔर उदास है ' ।कोई अतृप्तऔर दुखी अथवा परेशान है ।वही कोई विक्षिप्त अथवा अर्ध विक्षिप्त नग्न अथवा अर्धनग्न हाल में हंसता कभी मुस्कुराता जाने किस परम आनंद में लीन है 'यह तो विधाता ही जाने ग्राम मवई से लगभग 16 किलोमीटर दूर ग्राम खड़ देवरी का रहने वाला एक विक्षिप्त मवईकी गलियों ' कूचों 'बाजारों में घूमता फिरता मिलता है ।पूछे जाने पर अपना नाम सिंग राम बताता है ।यही कोई 40 -42साल की उम्र होगी उसकी |लगभग पांच-छह सालों से यह विक्षिप्त कचरा और गलियों में भटक रहा है ।सर्दी हो ,गर्मी हो 'या फिर हो बरसात अपने हालात पर ही रहता मस्त ।ताज्जुब की बात है कभी कुछ मांगता नहीं किसी से फिर भी कोई ना कोई मिल ही जाता है उसे देने के लिए ।यदि कुछ समाजसेवी और मानवीय गुणों से युक्त लोगों का सहारा मिल जाए और इसे रेस्क्यू टीम के द्वारा किसी आश्रय स्थल अथवा अनाथालय तक पहुंचा दिया जाए 'तो शेष जिंदगी उसकी बदल सकती है ।
रेवांचल टाइम्स -मवई से मदन चक्रवर्ती की रिपोर्ट ।

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