रेवांचल टाईम्स - जलसंकट और रोजगार की तलाश में पलायन कर गए ग्रामीण पानी की समस्या व रोजगार की कमी प्रमुख कारण दमोह जिले के तेन्दूखेड़ा जनपद पंचायत की ग्राम पंचायत सहजपुर के पाड़ाझिर गांव हुआ पूरी तरह खाली तीन घरों को छोड़कर सभी पड़े वीरान और सुनसान गलियां
प्रदेश सरकार या केंद्र सरकार विकास के चाहे लाख दावे करे लेकिन कई ऐसे मामले सामने आते रहते हैं जहां विकास के दावे गलत साबित हो रहे हैं नतीजा यह निकलता है कि पूरा गांव त्रस्त होकर पलायन करने को मजबूर हो जाता है ऐसा ही एक मामला दमोह जिले के तेन्दूखेड़ा से सामने आया है जहां एक ग्राम पंचायत का पूरा गांव ही पलायन कर गया अब यहां खंडहर बन चुके घर व वीरान मकान सूनसान गलियों के अलावा कुछ नजर नहीं आता है हम बात कर रहे हैं जिले तेन्दूखेड़ा ब्लाक की सहजपुर ग्राम पंचायत के पाड़ाझिर गांव अनुसूचित जाति टोला की इस गांव में कुछ वर्षों पूर्व जहां हंसती खेलती जिंदगी नजर आती थी लेकिन सरकार के विकास के कदम यहां किसी भी तरीके से पहुंच ही नहीं पाए गांव में रहने वाले अनुसूचित जाति वर्ग के 100 लोगों के परिवार अपने बीबी बच्चों व परिजनों के साथ अब यहां से पलायन कर गए हैं गांव में ना पानी है ना सड़क और न ही रोजगार ऐसे में यहां जिंदगी में बसर करना बेहद कठिन सा लगता है हमारी टीम ने जब गांव का भ्रमण किया तो यहां के हालात व तस्वीरे कुछ और वयां कर रही थी यहां वीरान व खंडहर घर सुनसान गलियां और पानी एवं सड़क आदि के साधन निश्चित ही सरकार की नजर अंदाजी को बयां कर रही है थी सरकार की उदासीनता के कारण 100 परिवारों का पाड़ाझिर गांव आज पूरी तरह से वीरान हो गया जिस गांव में कभी शोरगुल हुआ करता था वहां पर बात करने वाला भी कोई नहीं मिला पिछले कुछ साल में कई घर थे लेकिन अब यहां सिर्फ तीन घर ही नजर आते हैं
ऐसा था गांव का नजारा
नगर मुख्यालय से करीब 14 किलोमीटर दूर बसा पाड़ाझिर गांव दो हिस्सों में दिखा जिसमें एक हिस्सा में से कुछ परिवार के लोग मुख्य मार्ग के पास रहते हैं वहीं एक वर्ग 100 से ज्यादा परिवार दूसरे हिस्से में रहते थे जो पलायन कर चुके हैं यहां तक जाने के लिए एक कच्चा मार्ग ही है गांव पहुंचे तो देखा कि बिजली के खंभे लगे हैं लेकिन तार कटे व छतिग्रस्त है पानी की सुविधा के लिए हैंडपंप के सिर्फ निशान हैं तीन घर साबित दिखे बाकी खंडहर व वीरान है कुछ मकान के दरवाजों के सामने खकरी लगी है गांव में लगे पेड़ पौधे भी मुरझा गए हैं गलियां सुनसान व वीरान है यहां तक पक्षियों की आवाज तक नहीं सुनाई दी
गर्मी में नहीं मिलता है पानी
मौके पर मिले युवक शिवलाल नुनिया ने बताया कि कुछ काम से वह एक दिन के लिए गांव आए थे और कल ही चले जाएंगे करीब एक दशक पहले तक इस टोला में 100 से ज्यादा परिवार निवास करते थे और 400 आबादी थी बीते वर्षों में सड़क पानी और रोजगार के अभाव में गांव से सभी परिवार पलायन कर गए हैं सिर्फ तीन परिवार ही बचे हैं वह भी जल्द ही पलायन कर जाएंगे वह बताते हैं कि रात के अंधेरे के डर और दिन में मन को उदासी से झकझोर देने वाले हालातों के चलते गांव को अलविदा कह दिया है उन्होंने कहा कि यदि सरकार पिछले 15 -20 वर्षों से गांव में पानी रोजगार संपर्क मार्ग जैसी मूलभूत व्यवस्थाएं जुटा देती तो संभवतः पूरा गांव आज भी आबाद होता लोग अभावों के चलते गांवों से शहरों की ओर जा रहे हैं मगर सरकार पहाड़ों से खाली हो रहे गावों की ओर उदासीन बनी बैठी है
बाहर मिलते हैं ज्यादा पैसे
पाड़ाझिर गांव पहुंची टीम ने गांव में मिले सिर्फ शिवलाल नूनिया से बात की और खाली गांव के बारे में पूछा तो बताया पूरा गांव शहर की ओर पलायन कर चुका है ग्रामीणों को गांव में कोई काम करने पर मजदूरी अधिक नहीं मिलती थी और ज्यादा पैसे देने के चक्कर में मशीनों से काम हो जाता था वहीं मनरेगा के तहत काम करने पर भी तत्काल राशि न मिलने से काम का कोई मतलब नहीं रह जाता था इसलिए दूसरे राज्यों और अपने आसपास के शहरों में जाकर काम करते हैं तो नगद राशि एक साथ मिल जाती है कई दिनों तक काम करने से एक बड़ी राशि हमारे पास जमा हो जाती है जिसका हम उपयोग कर लेते हैं गांव में काम करने पर कठिन मेहनत के बाद 100 से 150 रुपए तक अधिकतम मिल पाते हैं लेकिन दूसरे शहर और राज्यों में जाकर काम करने से 300 से 500 रुपए तक मेहनताना मिलता है वही काम करते हैं वहां रुकने का ठिकाना भी मिल जाता है
तेंदूपत्ता से होता है जीवन बसर
ग्राम पंचायत सहजपुर के पाड़ाझिर 27 मील पानी की समस्या के साथ ही जीवन बसर की चिंता भी परिवारों में रहती है हालांकि अप्रैल और मई में जंगलों में तेंदूपत्ता आ जाते हैं जिसे तोड़कर परिवार का पालन पोषण हो जाता है लेकिन तेन्दूपत्ता का सीजन निकलते ही ग्रामीणों के सामने रोजगार का संकट खड़ा हो जाता है गर्मी आते आते पानी की विकट समस्या खड़ी हो जाती है पानी और रोजगार के अभाव में अंततः ग्रामीणों को अपना घरबार छोड़कर बड़े शहरों की ओर पलायन करना पड़ता है जिस तरह की आज यह पाड़ाझिर गांव खाली और वीरान पड़ा हुआ है और घरों में पत्थरों की दीवार खड़ी हुई है
कभी नहीं गया नेताओं और अधिकारियों का ध्यान
कहने को तो केंद्र और प्रदेश मे भाजपा की सरकार है वो भी 15 सालों से लेकिन आज तक इस गांव की ओर किसी जनप्रतिनिधि तथा नेताओं का ध्यान नहीं गया जहां एक और प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान विकास की लंबी लंबी बात करते हुए ठकते नहीं जहां कहते हैं कि शहर के साथ गांव का भी विकास विकसित होना चाहिए लेकिन अगर इस गांव का कभी दौरा किया जाए तो प्रदेश के मुखिया भी हैरत में आ जाएंगे वहीं अगर बात क्षेत्र के नेताओं की जाए तो कम है यह क्षेत्र जबेरा विधानसभा में आता है जहां बीजेपी के सत्ताधारी विधायक है जहां केंद्र से लेकर प्रदेश में भी सरकार बैठी हुई है जहां केंद्र में एक मंत्री हैं लेकिन आज तक इन नेताओं का भी ध्यान इस गांव की ओर नहीं पहुंचा जहां पीएम मोदी गांव गांव लोगों को पीएम आवास योजना से जोड़ने की योजना के तहत पक्के घर बना राशि दे रहे हैं और लोगों को बसाने की बात कहते हैं लेकिन इस गांव का तो कोई पता नहीं चलता है कि इस गांव में एक भी आवास बना हुआ है कि नहीं सिर्फ खंडहर कच्चे मकान देखे जाते हैं वो भी वीरान और खाली
जब हमारी रेवांचल की टीम ने गांव में मौजूद शिवलाल नुनिया से बात की तो उन्होंने बताया कि मैने तो अभी तक अपने क्षेत्र के विधायक तक को नहीं देखा लेकिन नाम जरुर सुना है लेकिन कोई फायदा नहीं है शिवलाल ने बताया कि केवल यहां नेता उस समय आते थे जब पूरा गांव रहता था और चुनाव के समय वोट मागने के बाद जब जीत जाते थे तो वह इस गांव की सुध तक नहीं लेते थे इस गांव में सबसे बड़ी समस्या पानी और रोजगार की है
इनका कहना
पंचायत सचिव राजेश ठाकुर ने बताया कि बहुत समय पहले पलायन कर गए थे उनका नाम भी वोटर लिस्ट से कट गया है जबलपुर जिला के कठौदा गांव में रहने लगे हैं और वही वोटर लिस्ट में जुड़ गया है
राजेश ठाकुर सचिव सहजपुर तेन्दूखेड़ा
सरपंच गणेश ठाकुर ने बताया कि यहां पानी की समस्या होने के कारण करीब 30 साल पहले ही लोग चले गए थे यहां से सभी ने जमीन जायदाद भी बेंच दी है और जबलपुर कठौदा गांव में बस गए हैं दो तीन परिवार के लोग रहते हैं वह बताते हैं कि यहां पानी की बहुत समस्या है इस साल पहली बार 10 से 25 एकड़ में गेहूं की बोवनी हुई है
गणेश ठाकुर सरपंच सहजपुर तेन्दूखेड़ा
जनपद सीईओ रानू जैन का कहना है कि यदि रोजगार नहीं मिल रहा है तो ग्रामीण शिकायत कर सकते हैं उन्हें रोजगार दिलाया जाएगा पानी की समस्या के लिए प्रयास जारी है जल्द ही निराकरण होगा
रानू जैन सीईओ जनपद तेन्दूखेड़ा
एसडीएम भारती देवी मिश्रा का कहना है कि ये मेरी जानकारी में नहीं है मैं दिखवा लेती हूं
भारती देवी मिश्रा एसडीएम तेन्दूखेड़ा




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