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Thursday, December 31, 2020

शासन द्वारा बैगा जनजाति के विभिन्न योजनाओं को लागू किये जाने को लेकर महामहिम राज्यपाल के नाम कलेक्टर को सौपा ज्ञापन

 


रेवांचल टाईम्स - जिले की विशेष पिछड़ी बैगा जनजाति के मूलभूत आवश्यकताओं एवं रोजगार के संसाधनों से जुड़ी मांगों के संबंध में विशेष पिछड़ी बैगा जनजाति लोग आदि काल से वनांचलों एवं दूरदराज ग्रामीण क्षेत्रों में निवास करते आ है शासन द्वारा बैगा जनजाति के विभिन्न योजनाओं को लागू किये जाने बावजूद बैगा जनजाति तक मूलभूत सुविधाएं से रहती है वंचित आज भी बैगा जनजाति का जीवन वनों पर निर्भर है। बैगा बाहुल्य मंडला डिंडौरी के क्षेत्रों में शिक्षा का स्तर अत्यन्त दयनीय है। विभिन्न सुविधाओं के अभाव में बैगा जनजाति विलुप्त होने की कगार पर है अंत: बैगा जनजाति के हितों के संबंध में मांगों की पूर्ति को लेकर आज कलेक्टर मंडला को राज्यपाल के नाम ज्ञापन सौपा गया जिसमें उनकी मूल माँगे थी कि शिक्षा व्यवस्था- मध्यप्रदेश शासन द्वारा बैगा जनजाति की शिक्षा में सुधार लाने के लिए अनेकों प्रयास किय जा रहे हैं किन्तु वनांचलों में विद्यालयों एवं शिक्षाकों की कमी तथा शिक्षकों द्वारा घर से विद्यालय अप-डाउन करने कारण शिक्षा व्यवस्था चौपट हो चुकी है।

   वही मण्डला, डिंडीरी, बालाघाट, उमरिया, शहडोल अनुपपुर जिलों के बैगा बाहुल्य ग्रामों में शिक्षा का स्तर अत्यंत दयनीय है। बहुत मुशकिल से 10वीं तक कि पढ़ाई पूरी की जाती है और 12वीं कक्षा तक की पढ़ाई कर पाते हैं। अत प्रत्येक विद्यालय में शिक्षक सह प्रेरक की नियुक्ति की जाये, जो विद्यालय मुख्यालय में रहकर ग्रामीण क्षेत्रों में नियासरत मेगा बच्चों को शिक्षा के लिए प्रेरित करे तथा बच्चों को शिक्षा प्रदान करे।


 बैगा जनजाति के छात्र-छात्राएं जो 12वीं उत्तीर्ण कर चुके है, उनके उच्च शिक्षा के लिए इंजीनियरिंग कॉलेज, मेडिकल कॉलेज, उद्यानिकी महाविद्यालय, पेटनरी कॉलेज, आदि में बिना परीक्षा के कॉलेज में सीधे प्रवेश दिया जाये।

     म.प्र. शासन द्वारा विशेष पिछडी बैगा जनजाति के अभ्यर्थियों को बिना किसी पात्रता परीक्षा या भर्ती प्रक्रिया अपनाये बगैर तृतीय एवं चतुर्थ श्रेणी के पदों पर सीधी भर्ती किये जाने प्रावधान किया है। किन्तु हाल ही में म.प्र पुलिस विभाग द्वारा आरक्षक वर्ग हेतु जारी नोटिफिकेशन में बैगा जनजाति के लिए विशेष भर्ती का प्रावधान नहीं किया गया है। अत भर्ती प्रक्रिया में सीधी भर्ती का प्रावधान किया जावे।

      गर्वनिंग बॉडी गठित करने विषयक:- राज्य एवं जिला स्तर में बैगा विकास अभिकरण पिछले 3 वर्षो से भंग है। अतः समस्त अभिकरणों में की गर्वनिंग बाडी का गठन किया जाये तथा बैगा जनजाति के लोगों को ही अभिकरण में सदस्य बनाया जाये।

       वही बैगा जनजाति विलुप्त होने के कगार पर है। जिसके संरक्षण हेतु म.प्र.शासन एवं माननीय न्यायालय के द्वारा बैगा जनजाति के दम्पत्ति को दो संतान प्राप्ति उपरान्त भी नसबंदी नहीं किये जाने के निर्देश हैं। जिसके बावजूद विभाग द्वारा शासकीय नौकरी एवं शासन प्रशासन की योजनाओं में तीसरी संतान होने पर आपत्ति लगा दी जाती है। अतः बैगा जनजाति के दम्पत्ति को तीसरी संतान होने पर भी शासकीय नौकरी एवं अन्य शासकीय योजनाओं का लाभ प्रदान किया जाये।

       बैगा जनजाति के शिक्षित बेरोजगार युवक-प्रूपतियां जो 12वीं / स्नातक उत्तीमण कर चुके है। उन्हें वर्ग-3, वर्ग-2 वर्ग-1 शिक्षक में सीधी भर्ती की जाये एवं भी उपरान्त डी.एड. बी.एड. का प्रशिक्षण कराया जाये।

         यह संघ वर्ष 2019 से बैगा समाज के हितों तथा विभिन्न अधिकारों के लिए संघर्ष करते आ रही है। संगठन आर्थिक रूप से कमजोर होने के कारण विभिन्न आवश्यकताओं की पूर्ति नहीं कर पा नहीं हो पा रही है अत: संगठन को विशेष अनुदान प्रदान करने की कृपा करें।

    . बैगा परिवार के पोषण आहार की राशि रु. 1000.00 बैगा परिवार की बैगा मुखिया को दी जा रही है। किन्तु ऐसे महिलाएं जो अन्तरजातीय विवाह कर बैगा बच्चों को जन्म दी हैं एवं बैगा परिवार का पालन पोषण कर रही हैं। ऐसे बैंगा परियार के मुखिया महिला को उसके पति या पति के पिता का जाति प्रमाण पर के आधार पर लाभ प्रदान किया जाये। ताकि बैगा परिवार का भरण पोषण हो सके।


विशेष भर्ती अंतर्गत चयन समिति में सदस्यता प्रदान करने विषयक:- म.प्र. के विभिन्न विभागों में विशेष भर्ती अभियान अंतर्गत भर्तियां की जाती है, परंतु चयन समिति में बैगा जनजाति का सदस्य न होने के कारण समितियों द्वारा चयन प्रक्रिया में मनमानी तथा गड़बड़ियां की जाती है। जिससे अनावश्यक भर्ती प्रक्रिया में विलम्ब होता है  प्रत्येक जिले में भर्ती घयन समिति में संघ के सदस्यों को समिति का सदस्य बनाया जाये।


बैगानी धर्म कोड के संबंध में- बैगा जनजाति के लोग हमारे पूर्वजों से हिन्दू धर्म के अनुयायी रहे है तथा हमारे द्वारा ग्राम के देवी-देवता, खेत-खनिहाल. जन्म-मृत्यु विवाह आदि सातों संस्कार बैगानी रीति रिवाज, परम्परा अनुसार करते आ रहे है तथा हमेशा से ही प्रकृति के पूजक रहे हैं बैगा जनजाति की परम्परा, रीति-रिवाज, खान-पान, रहन-सहन आदि सभी आदिवासी समुदाय से भिन्न है। किन्तु सर्व आदिवासी संगठनों द्वारा समस्त आदिवासी 

बैगा जनजाति अति पिछड़ी जनजाति है। संपूर्ण जनजीवन वन पर आश्रित है तथा रीति रिवाज, परम्परा आदि सभी आदिवासी समुदाय से भिन्न है। ग्रामीण क्षेत्रों में शिक्षा तथा जागरुकता का आभाव है। ऐसी स्थिति में सर्व आदिवासी लिए पृथक से धर्म को लागू किया जाता है तो बैगा जनजाति के अतित्व को ख़तरे है

 सर्व आदिवासी समाज के लिए यदि पृथक से आदिवासी धर्म कोड लागू किये जाते हैं तो बैंगा जनजाति के लिए पृथक से बैगानी धर्म कोड लागू की जाये अन्यथा बैगा जनजाति का हिंदू धर्म कोड यथावत रहने दिया जाये।

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