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Monday, November 30, 2020

झूला पुल से हुई नगर की कनेक्टिविटी, रेत के वाहन उड़ा रहे है लोगों की नींद





रेवांचल टाईम्स - जिले में अबैध रेत उत्खनन से लेकर परिवहन में रोक लगाने में नाकाम साबित हो रहा है जिला प्रशासन प्राचीन माहिष्मती और आज के मंडला नगर में प्रशासन के द्वारा बनाए गए झूला पुल से आसपास के इलाके के लोगों की कनेक्टिविटी मुख्य शहर तक आसान हो गई है । पूर्व की तुलना में अब आवाजाही सुविधाजनक होने से लोग खुश हैं लेकिन झूला पुल के दूसरी ओर रिहायशी क्षेत्र में  निवास करने वालों की रात की नींद उड़ गई है। कारण यह है कि परिवहन करने वाले वाहन रात भर यहां से चल रहे हैं। यह व्यवस्था लोगों की समझ से परे हैं।


पुण्य सलिला नर्मदा के तट पर बसे मंडला नगर में नागरिकों को सुविधा देने के लिए भारी भरकम बजट से झूला पुल तैयार किया गया है। काफी समय से ऐसे प्रोजेक्ट की आवश्यकता महसूस की जा रही थी जो बड़े हिस्से कि लोगों की पहुंच आसान कर सकें । जनभावनाओं को ध्यान में रखते हुए सरकार ने इस प्रोजेक्ट को मंजूरी दी और इस दिशा में क्रियान्वयन कराया। झूला पुल के बन जाने से आसपास के बहुत बड़े हिस्से को मुख्य क्षेत्र से कनेक्ट करने का रास्ता प्रशस्त हो गया है। हजारों की आबादी को झूला पुल का लाभ कनेक्टिविटी के मामले में मिल रहा है और उनकी काफी परेशानियां हल हो गई हैं । लेकिन झूला पुल के बनने से बड़ी समस्या यह भी खड़ी हो गई है कि रिहायशी क्षेत्र में रहने वाले लोगों की रातों की नींद गायब हो गई है। कारण यह है कि झूला पुल के रास्ते से होकर पूरी रात भर रेत ढोने का काम ट्रैक्टर ट्रॉलीया कर रही हैं। यह काम सब हो रहा है जबकि झूला पुल के दोनों किनारों पर जिला प्रशासन का एक बोर्ड लगा हुआ है। जिसमें साफ तौर पर चेतावनी दी गई है कि रेत ट्रॉली और अन्य वाहन यहां से नहीं आ जा सकते लेकिन इसकी अनदेखी लगातार की जा रही हैं। स्थिति यह है कि पूरी रात भर यह वाहन रेत का परिवहन यहां से करते हैं। रेत वाहनों की आवाजाही से लोगों की नींद में खलल पड़ रहा है और उन्हें बिना किसी कारण से आंखों- आंखों में रात गुजारनी पड़ रही है। इसके चलते इस क्षेत्र के काफी लोग अनिद्रा की बीमारी की जद में आ गए हैं। लोग बताते हैं कि नींद नहीं होने से अगला दिन काफी मुश्किल भरा गुजरता है और उनके सामने कामकाज की चुनौती आ खड़ी हो जाती है। अपने स्तर पर लोगों ने इस समस्या का समाधान करने की कोशिश की लेकिन रेत परिवहन करने वाले मानने को तैयार नहीं है। लोगों की चिंता इस बात को लेकर भी है कि आखिर मंडला नगर और उसके आसपास ऐसा कौन सा आवश्यक कार्य होने जा रहा है, जिसके लिए रेत खनन और परिवहन को दिन के बजाय रात में करना जरूरी हो गया है। नागरिकों ने जिला प्रशासन के संज्ञान में इस मामले को लाया है। मांग की है कि व्यापक जनहित में रात्रि कालीन रेत परिवहन संबंधी काम को अभिलंब बंद कराया जाए ताकि लोगों को राहत मिल सके।

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