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Monday, November 23, 2020

नर्मदा पुत्रों ने सत्याग्रह की मांगों को लेकर अवैध निर्माण प्रतिबंधित करने डिंडोरी व अनूपपुर जिला कार्यालय में सौंपा ज्ञापन

 



रेवांचल टाईम्स - माँ नर्मदा जन जागरण साईकिल यात्रा बिलपुरा परोपकार समिति ने मॉं नर्मदा गौ सत्याग्रह जन जागरण -जन आंदोलन की मांगों को लेकर व अमरकंटक तीर्थ क्षेत्र में हो रहे अवैध निर्माण तत्काल प्रतिबन्धित करने हेतु डिंडौरी व अनूपपुर जिला कार्यलय में ज्ञापन सौंपा।

        साथ ही समिति के सदस्यों ने यात्रा पथ व अमरकंटक तीर्थ क्षेत्र में दबंग ,माफियों,पूँजीपतियों द्वारा माँ नर्मदा के आंचल (जल संग्रहण क्षेत्र) पर किये जा रहे प्रहारों से जनमानस को अवगत कराकर जन जागरण किया जिससे समाज में माँ नर्मदा एवं बेसहारा गौ वंश के संरक्षण की आवाज़ बुलंद हुई।

        अमरकंटक साइकिल यात्रा में बिलपुरा परोपकार समिति माँ नर्मदा पुत्र दल में प्रमुख कमलेश सिंह मथ्थर चौधरी, विकास केवट, राजेन्द्र चैहान, ब्रजेश कुमार, मनोज सोनी, सुमित नायडू, मनोज पचौरी, लकी चौधरी, लक्ष्मण यादव, संतोष यादव, विजय शर्मा, अजीत चौधरी, दुर्गा सिंह, हर्ष सिंह आदि सदस्यों ने अनूपपुर एवं डिण्डौरी कलेक्टर को अन्न का परित्याग कर सत्याग्रह कर रहे समर्थ सदगुरु भैयाजी सरकार की मांगों का ज्ञापन सौपकर नर्मदा गौ संरक्षण की मांग की।

राज्य सरकार शासन -प्रशासन से नर्मदा गौ सत्याग्रह की प्रमुख मांगें


       मां नर्मदा तट एच.एफ.एल.से 300 मीटर तक के हरित क्षेत्र को मान. उच्च न्यायालय के आदेशानुसार सीमांकन कर प्रतिबंधित क्षेत्र घोषित कर तत्काल संरक्षित किया जाए।

      माँ नर्मदा को जीवंत इकाई का दर्जा देकर ठोस नीति व कानून बनाए।

      दबंग ,भू -खनन माफिया पूँजीपतियों द्वारा लगातार हो रहे हरित क्षेत्र में अवैध निर्माण,अतिक्रमण भंडारण,खनन तत्काल प्रतिबंधित कर अवैध साधन संसाधन भंडारण सामग्री को तत्काल राजसात किया जाए।

      अमरकंटक तीर्थ क्षेत्र में हो रहे निर्माण अतिक्रमण खनन पूर्णतः प्रतिबंधित किया जाए।

    माँ नर्मदा के जल में मिल रहे गंदे नालों विषैले रासायनों को बंद करने व अपशिष्ट द्रव्य पदार्थों के प्रबंधन हेतु प्रभावी ठोस कार्ययोजना लागू की जाए।

        बेसहारा गौ वंश के लिए आरक्षित नगरीय निकायों की गौचर भूमि को संरक्षित किया जाए एवं अवैध अतिक्रमण निर्माण कब्जा से मुक्त कराया जाए।

       मां नर्मदा पथ के तटवर्ती गांव नगरों को जैव विविधता क्षेत्र घोषित कर समग्र गौ नीति के साथ गौ अभ्यारण सुनिश्चित किये जाएं।

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