रेवांचल टाइम्स - आदिवासी बाहुल्य विकास खण्ड मवई , जो कि मंडला मुख्यालय से महज100 किलोमीटर दूर स्थित वनांचल ग्राम जहाँ आज भी मुलभुत सुविधाओं की उपेक्षा का शिकार है। जहां विकास की गंगा प्रवाहित होने की जगह पानी की सूखी टंकी दिखाई पड़ती है। लगभग 20 वर्ष पूर्व से निर्मित पानी की टंकी ग्रामीणों की प्यास बुझाने में निष्फल सिद्ध हुई है । लगभग 5 वर्ष पूर्व ग्राम पंचायत द्वारा संचालित करने का न्यूनतम प्रयास किया गया , वह भी पानी की कमी के चलते सफल नहीं हो सका । इसके पूर्व भी ऐसे ही प्रयास किए जा चुके हैं लेकिन , आम आदमी की पेयजल समस्या जस की तस बनी हुई है। ग्राम से लेकर विकासखंड, विकासखंड से लेकर विधानसभा क्षेत्र तक, विधानसभा से लेकर जिले तक के कितने ही जनप्रतिनिधि आए और गये, परंतु किसी ने भी इसे सुचारू रूप से क्रियान्वित करने की आवश्यकता नहीं समझी। चुनावी समर में लंबे चौड़े वादे और आश्वासन की डींग हांकने वाले सत्ता पाकर सब कुछ भूल गए । अब तो टंकी की सीढ़ियों में बैठकर नशेड़ियों को जाम छलकाते देखा जा सकता है। तथा वाटर सप्लाई वाले चेंबर के गड्ढे में कचरों से पटने लगे हैं ।
धनिक वर्ग अपने घरों में बोर कराकर सुविधाएँ जुटा लिये है, वहीं गरीब और मजदूर वर्ग को पेय जल के लिये कुओं और हैंड पंप पर घंटों इंतजार करना पड़ता है ।
वही शासन और प्रशासन से ग्रामीणों का अनुरोध है कि मूलभूत आवश्यकताओं की ओर अपना ध्यान आकृष्ट करें और जल्द से जल्द बनाई गई पानी टँकी का उपयोग करें।


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