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Thursday, October 22, 2020

जिले का आरटीओ कार्यालय बना दलालों गढ़ खुलेआम खेली जाती पैसों की होली


रेवांचल टाइम्स - आदिवासी बाहुल्य के मुख्यालय डिंडोरी के आरटीओ कार्यालय  इन दिनों दलालों का गढ़ बन चुका है जो कि यहां पर आरटीओ कार्यालय का कोई भी काम बाहर से करवाने वाला आता है उसे दलाल अपनी पैनी नजर बनाए बैठा रहता है और जैसे ही उसे कोई भोला भाला व्यक्ति नजर आता है दलाल उसे तुरंत झटपट लेता है और उससे आरटीओ कार्यालय के अंदर जाने के पहले पहले ही पूरी रामायण पढ़ा दी जाती है और लाइसेंस बनवाने के नाम पर या बीमा फिटनेस या फिर नाम ट्रांसफर के नाम से भोले भाले व्यक्ति से कई हजारों रुपए लूट लिए जाते हैं और ग्रामीणों!  से आए लोग इन दलालों को अपनी मेहनत और पसीने की कमाई देकर खाली हाथ चले जाते हैं और अपना लाइसेंस की तारीख लेकर उल्टे पांव लौट जाते हैं और दलाल इन पैसों आरटीओ ऑफिस में अपने बाबू और कमीशन खोरी में अपनी जेब गर्म करता है और ग्रामीण लोगों को तारीख पे तारीख मिलती है आखिर यहां कारोबार किसके संरक्षण में होता है यहां एक अहम सवाल है अगर किसी प्रकार की मिली भगत नहीं है तो नजर आ रहा है इन दलालों पर आरटीओ कार्यालय के उच्च अधिकारी की नजर क्यों नहीं पड़ रही है जो कि यहां पर आरटीओ कार्यालय पर सवालिया निशान छोड़ती है सूत्रों की माने तो इन दलालों द्वारा आरटीओ में बड़े-बड़े काम किए जाते हैं और इनके बिना इस कार्यालय में किसी भी व्यक्ति का कोई काम नहीं हो पाता जैसे हमारे सिस्टम को दीमक खा गई क्या आरटीओ कार्यालय में दलालों के बिना अब कोई काम नहीं हो सकता क्या इसकी जानकारी अधिकारी को भी नहीं है क्या अधिकारी को जानकारी होने के बावजूद भी अधिकारी अनजान बन बैठा है अब देखना यह होगा कि दलालों की दलाली आरटीओ कार्यालय में किस हद तक चलती है और भोली भाली जनता को किस हद तक लूटा जाता है

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