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Saturday, October 24, 2020

कोविड सेंटर तक पाजीटिव मरीज को लाने के लिए लोगों की जान खतरे में डालने का प्रयास हुई, ऑडियो वायरल

 



रेवांचल टाइम्स - आडियो वायरल होने के बाद बीएमओ ने कहा यह मेरी आवाज नहीं

        कोरोना संक्रमण महामारी से लड़ने के लिए अनेक दावे किए जाते रहे है लेकिन तथाकथित रूप से सोषल मिडिया पर वायरल कुछ ऑडियो लांजी में ऐसे दावों को खारिज करते नजर आ रहे है। लांजी सिविल अस्पताल परिसर में हाल ही में कोरोना मरीजों के लिए कोविड सेंटर प्रारंभ किया गया है ताकि लांजी के मरीजो को सहुलियत हो लेकिन इसके बावजूद मरीज को कोविड सेंटर तक लाने के लिए शासकीय वाहन की अनुपलब्धता ने प्रषासन की पोल ही खोल दी है जबकि इस मामले में लांजी सिविल अस्पताल बीएमओ खुद को अलग-थलग कर रहे है।


- तथाकथित ऑडियो में खुली पोल

लांजी तहसील मुख्यालय अंतर्गत आने वाले ग्राम दिघोरी में एक युवक के कोरोना पाजीटिव आने के बाद उसे लांजी कोविड सेंटर तक लाने के लिए शासकीय वाहन के नहीं होने का हवाला दिया गया है, साथ ही दो आॅडियों में उसे कहा जा रहा है कि हम सिविल अस्पताल लांजी से बोल रहे है और आप अपने साधन या किसी बाईक सवार से लिफ्ट लेकर अस्पताल आ जाओं और किसी को यह मत बताना कि आप कोरोना पाजीटिव हो। वहीं दूसरी ओर कथित तौर पर डाॅक्टर द्वारा मरीज को यह कहते सुना जा सकता है आप 108 में फोन लगाकर बोलो कि मेरे पेट में दर्द है और लांजी अस्पताल जाना है लेकिन एंबुलेंस चालक को यह मत बताना कि आप कोरोना पाजीटिव हो।


- बीएमओ का कहना है

इस संबंध में जब लांजी सिविल अस्पताल बीएमओ डाॅ. प्रदीप गेडाम को फोन पर चर्चा की गई तो उन्होने कहा कि हां दिघोरी का एक मरीज है लेकिन उन्होने उससे बात नहीं कि और यह वायरल हो रहे आडियो में उनकी आवाज ही नहीं है।


- लोगों में कोरोना का भय

कोरोना मरीज को कोविड सेंटर में लाने के लिए शासकीय वाहन का नहीं होने का वायरल ऑडियो के बाद लोगों में भय का माहौल है, ऐसे में यदि किसी मरीज के घर पर नियमानुसार क्वारेंटाईन की सुविधा नहीं हो तो क्षेत्र में डर का माहौल निर्मित होना स्वाभाविक है। वहीं 02 पुरूषों और एक महिला कर्मी की आवाज में वायरल हो रहे 04 ऑडियो सुनने के बाद लोगों का प्रषासन पर भरोसा कायम रखना मुष्किल साबित हो रहा है। कोई कैसे इतना अमानवीय हो सकता है कि एंबुलेंस कर्मी और अस्पताल तक पंहुचने के लिए मदद करने वाले से कोरोना पाजीटिव होने की बात छिपाकर दूसरों की जान को खतरे में डालने की सोच सकता है।


- पोल खुलेगी कैसे ?

अगर माना जाए कि ऑडियो गलत है तो आवाज का सर्टिफिकेषन करवाकर पहले तो यह साबित करवाया जाना चाहिए कि यह ऑडियो गलत है और यदि किसी के द्वारा मिमिक्री कर बनाया गया हो तो उसके खिलाफ कानूनी कार्यवाही की जानी चाहिए। इसके अलावा अगर सर्टिफिकेषन में यह साबित हो जाता है कि उक्त सभी अस्पताल के कर्मी है तो उन स्वास्थ्य कर्मियों के खिलाफ विभागीय जांच कर सख्त कार्यवाही की जानी चाहिए आखिर कैसे किसी की जान को धोखे में रखकर कोरोना पाजीटिव मरीज को अस्पताल बुलाया जा रहा है?



रेवांचल टाइम्स बालाघाट से खेमराज बनाफरे की रिपोर्ट

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