रेवांचल टाइम्स - आदिवासी बाहुल्य विकास खंड मवई जितना कहे उतना ही कम है वही बिना कोई कारण और सूचना बिजली कटौती होना तो सामान्य सी बात हो गई थोड़ी बारिश पानी और हवा चल जाए तब तो कहना ही क्या 4 से 5 दिन भी लग जाते हैं लाइन दुरुस्त होने में ऐसी कितनी ही शिकायतें आती रहती है ।इससे पूर्व भी शिकायतें से लेकर धरना तक दिया गया पर अधिकारियों के कान में जू तक नही रेगी वही गांव की विद्युत व्यवस्था से संबंधी खबर अधिक पुरानी नहीं है ।
परंतु हम जिस खबर को आपसे साझा कर रहे हैं वह तो अलग ही है । मीटर की रीडिंग और बिल की रीडिंग में भारी असमानता देखने को मिलती है । यह असमानता कहीं 600 तो कहीं 700 और 7:50 यूनिट तक देखी गई है। कौन रीडिंग लेता है ' कहां से लेता है कैसे लेता है पता नहीं। उपभोक्ता से मनमाना पैसा लूटने का शानदार फंडा बना हुआ है। शिकायत हेतु मोबाइल नंबर बिल में दिया तो गया लेकिन वह नंबर सिर्फ उपभोक्ता को बेवकूफ बनाने के लिए हो गया है । बिल मिलने के दिन से रोज उस नंबर को डायल कर रहे हैं ' लेकिन कभी लगता नहीं वर्षों से ओव्हर रीडिंग का नाम देकर एडजस्ट करने की बात कहीं जाती है, लेकिन आज तक नहीं हो पा रहा है। बिल की रीडिंग और मीटर की रीडिंग फोटो से देखी जा सकती है। इस तरह से की जाने वाली घोर लापरवाही उपभोक्ता को परेशान किए जा रही है। संबंधित विभाग उपभोक्ताओं कोइन परेशानियों से निजात दिलाने की कृपा करें ।
रेवांचल टाइम्स मवई से मदन चक्रवर्ती की रिपोर्ट


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