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Saturday, October 24, 2020

जिला अस्पताल प्रबंधन पर मृतक के परिजनों ने लगाया लापरवाही के गंभीर आरोप



रेवांचल टाइम्स - आदिवासी बाहुल्य  जिला डिंडोरी मुख्यालय के अंतर्गत ग्राम पंचायत मणियारास के निवासी  गणेश राठौर की मृत्यु को कोरोना से होना अस्पताल प्रबंधन द्वारा बताया गया वैसे तो जिला चिकित्सालय हॉस्पिटल हमेशा ही विवादों में घिरा रहता है जिसके बाद परिजनों ने नाराजगी जताते हुए अस्पताल प्रबंधन पर भारी लापरवाही का आरोप लगाते हुए मुख्यमंत्री के नाम एसडीएम को ज्ञापन सौंपा ज्ञापन में निष्पक्ष जांच कार्यवाही करने की मांग की है मामले को लेकर पिछले दिनों अस्पताल प्रबंधन द्वारा कोरोना से मौत होने की पुष्टि के बाद ही परिजन आश्चर्य है। और मामले की जांच कराकर अस्पताल प्रबंधन के जिम्मेदार के खिलाफ कड़ी कार्यवाही करने की मांग की गई है भारतीय जन शक्ति चेतना पार्टी की अगुवाई में परिजनों ने एसडीएम को ज्ञापन सौंपा

मृतक के शरीर पर मिले काटा पीटी के गंभीर निशान जिससे परिजनों ने आशंका जताई गणेश राठौर का बेटा गुप्तेश्वर राठौर ने जानकारी देते हुए बताया कि उनके पिता लंबे समय से अस्थमा बीमारी के मरीज थे जिन्हें सांस लेने में तकलीफ होती थी 6 अक्टूबर को अचानक तबीयत ज्यादा खराब होने पर मृतक गणेश को जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया जहां बिना जांच रिपोर्ट आई ही मृतक को 8 अक्टूबर को जबलपुर रेफर कर दिया गया आरोप है कि जहां मृतक के सही तरीके से इलाज नहीं किया गया जिस कारण 15 अक्टूबर को उनकी मौत हो गई जिसके बाद उनके परिजन जबलपुर पहुंचे और जब जबलपुर पहुंचे तो उन्होंने देखा कि अपने पिता के शरीर पर कई जगह काटा पीटी के निशान देखकर भयभीत हो गया और उसका कहना था कि मेरे पिताजी के शरीर से कुछ अंग निकाले गए हैं बाद में कोरोना प्रोटोकॉल के हिसाब से उनका द अंतिम संस्कार जबलपुर में ही कर दिया


परिजनों का कहना है कि अगर कोरोनावायरस से मौत हुई है तो पोस्टमार्टम क्यों हुआ जानकारी के मुताबिक कोरोनावायरस पाए जाने पर परिजनों को भी कोरोना टेस्ट कराना जरूरी होता है और अगर कोरोनावायरस से किसी व्यक्ति की अगर मौत हो जाती है तो उसके पोस्टमार्टम की दिशा निर्देश नहीं है लेकिन यहां सवाल उठता है कि अगर गणेश राठौर  कोरोना से संक्रमित था तो उसके परिवार का कोरोना टेस्ट क्यों नहीं कराया गया और अगर कोरोना से ही उनकी मौत हुई है तू उनके शरीर पर काटा पीटी के निशान क्यों थे परिजनों का कहना है कि अस्थमा की बीमारी को कोरोना वायरस बता कर जबलपुर रेफर कर दिया गया जबलपुर अस्पताल में भी सही इलाज ना होने के चलते उनकी मृत्यु हो गई और परिवार जन का कहना है कि उनके शरीर पर काटा पीटी के निशान देखकर उनके शरीर से कई अंग निकाले गए हैं इस गंभीर मामले को लेकर परिजनों ने निष्पक्ष जांच करने के साथ कड़ी कार्यवाही की मांग की है। और सबंधितो की सूक्ष्मता जाँच करते हुई दोषियों के ऊपर कार्रवाई करने की मांग की गई है।



रेवांचल टाइम्स से प्रमोद पड़वार की खास रिपोर्ट

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