रेवांचल टाइम्स डेस्क - 29 सितम्बर को विश्व हृदय दिवस मनाया गया ... वैसे अपन ने 'दिल दिवस' के बारे में कभी सुना नहीं था पर आजकल हर रोज कोई न कोई दिवस मनाया जाने लगा है... कुछ दिनों में 'छिंगली दिवस' ,'घुटना दिवस', 'गर्दन दिवस', 'टखना दिवस' 'कोहनी दिवस' 'भोंह दिवस','कमर दिवस', 'अंगूठा दिवस', 'आँख दिवस', 'सर के बाल दिवस', और भी ना जाने कौन कौन से दिवस मनाये जाने लगेंगे! खैर बात चल रही थी हृदय दिवस की, इस दिवस पर कई अखबारों में बड़े बड़े आर्टिकल छपे जिसंमे बताया गया कि यदि दिल को स्वस्थ रखना है तो ये सारे उपाय करने चाहिए,अपन ने भी सोचा बुढ़ापा पास आ रहा है जरूरी है कि दिल स्वस्थ रहे सो पूरे आलेख पढ़ डाले .... पर जब सोचने बैठे तो पता लगा कि इनमे से कोई भी उपाय इस देश के किसी भी व्यक्ति के लिए मुमकिन नहीं है l
पहला सुझाव ये दिया गया कि रोजाना 140 ग्राम मेवा खाना है, अरे भैया इधर दो जून की रोटी तो मुश्किल हो रही है मंहगाई के कारण, टमाटर 100 रूपये किलो मिल रहे है तो गंवार फल्ली 80 रुपया किलो कोई भी सब्जी 70 रूपये से कम नहीं है अब किसकी औकात है कि वो हजार रूपये किलो वाले काजू और आठ सौ रूपये किलो की बादाम रोजाना खा सके और वो भी थोड़ी बहुत नहीं पूरे 140 ग्राम यानि 250 रूपये रोज के मेवे, इसलिए ये विचार अपन ने त्याग दिया।
दूसरा उपाय बताया गया कि 5OO ग्राम सब्जी और फल खाओ, सब्जी वो भी आधा किलो भला एक आदमी अकेला कैसे खा सकता है इंसान है कि हाथी सोचने वाली बात है, रहा फल का सवाल तो कंही सेब को चमकदार बनाने के लिए उसमें मोम की पालिश की जा रही है तो कंही पपीता और केले को पकाने के लिए उसमे इंजेक्शन ठूंसा जा रहा है ऐसे जहरीले फल खाकर दिल ठीक होना तो दूर कब 'हार्ट अटेक' आ जाये कहना मुश्किल है सो ये दूसरा उपाय भी गया हाथ से ........
तीसरा उपाय बताया गया है गुस्सा न करो, अब कोई इनसे पूछे कि इतनी परेशानियों इतनी झंझटों के बीच आदमी गुस्सा न करे क्या या संभव है, लड़का एक क्लास में दो दो साल लगा रहा है, लड़की की शादी नहीं हो पा रही है, घर का खर्चा पूरा पड़ नहीं रहा है, बिजली का बिल हजारो में आ रहा है, नगर निगम हर साल सम्पति कर बढ़ाता जा रहा है ऑफिस में रोज बॉस डांट रहा है,ऊपर से कोरोना का टेंशन ऐसे में कौन सा ऐसा 'संत' पैदा हो गया है जो अपने गुस्से पर काबू कर ले तो इस उपाय से भी तौबा ..........
जम कर हँसे,,,,,,,, एक उपाय ये भी बताया गया है ये भी कोई बात हुई, हंसाने और हंसने लायक छोड़ा कंहा है सरकार ने पहले नोट बंदी, फिर जीएस टी, और अब पता नहीं कौन सी नई स्कीम लेकर आने वाले है भाई जी , पेट्रोल के दाम आसमान छू रहे है पेट्रोल डलवाने जाओ तो ऐसा महसूस होता है कि पेट्रोल नही बल्कि अपने जिस्म का खून गाड़ी में डलवा रहे है ऐसे में भला कोई कैसे हंस सकता है सकता है ....आप ही बताओ
पांचवा उपाय है कि हमेशा परिवार के पास रहो, अपनी तो समझ से बाहर है कि जिन लोगो ने भी ये सलाह दी है उन्हें वास्तविकता से कोई लेना देना नहीं है क्या ,परिवार अब बचे कंहा हैं संयुक्त परिवार अब सपना हो गए है फैमिली के नाम पर पति पत्नी और बच्चे ,खर्चा इतना है कि दोनों ना कमाए तो महीना पूरा नहीं पड़ता, अब बीबी कंही पोस्टेड है और हस्बैंड कंही दूसरी जगह,लड़का बाहर पढ़ रहा है तो बिटिया कंही दूसरी जगह नौकरी कर रही है ऐसे में कैसे परिवार के साथ रहे आदमी, ये जवाब तो करोड़पति में पूछे जाने वाले सवाल के उत्तर जैसा है
वॉक करे.... ये भी कहा है हृदय को ठीक रखने लिए. अब वे ही बताये कि कंहा वॉक करे आदमी, बाग़ बगीचे बचे नहीं है, फुटपाथ पर अतिक्रमण है सड़कों पर गंदगी और धूळ का अम्बार है ऐसे में घूमे तो घूमे कंहा, दूसरी बात भरी जवानी में तो घुटनो में दर्द शुरू हो गया है अब ऐसे घुटने लेकर कोई इंसान कैसे घूम सकता है ये ही सोचने वाली बात है इसके अलावा भी कुछ और उपाय बताये गए है पर सच्ची बात तो ये है कि इनमें से कोई भी उपाय संभव नहीं है
इसलिए भैया अपन ने तो सारे आलेख पढ़ कर सोच लिया कि ये सारे उपायों को अपनाना 'डॉन' को पकड़ने की तर्ज पर मुश्किल ही नहीं असंभव इसलिए जितने दिनों तक 'हार्ट' को साथ देना है दे नही तो 'राम नाम सत्य' तो एक न एक दिन होना ही है दो चार साल पहले हो जाएगा तो क्या फर्क पड़ता है।
चैतन्य भट्ट

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