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Wednesday, September 30, 2020

सड़क ना होने से जमुआ ग्रामीण परेशान




 सड़क ना होने से जमुआ ग्रामीण परेशान सन् 1914 में लखनादौन को तहसील का दर्जा मिला जिसका कार्यालय लखनादौन नगर पर संचालित किया गया है। यह जिले की 100 बर्ष पुरानी एकमात्र तहसील है।


रेवांचल टाइम्स:- आजादी को 70 साल से अधिक हो गया पर आज भी दलदल में चल रहे ग्रामीण।


-जिले की पहली तहसील लखनादौन, जिले में कांग्रेस की सत्ता का सर्वाधिक विधायक रहने वाली विधानसभा भी लखनादौन विधानसभा ही है और इस विधानसभा में कितना विकास हुआ इसका नजारा लखनादौन तहसील के जमुआ गांव में नजर आता है।



जमुआ गांव तहसील मुख्यालय से लगभग 20 किलोमीटर दूर एक ऐसा गांव है जहां पर सरकारी योजनाएं तो दूर पैदल चलने के लिए रोड भी नहीं है जहां पर रोटी बनाई गई वह दलदल में तब्दील हो गई, आज भी इस गांव में मरीजों को चारपाई पर रखकर मुख्यालय तक ले जाया जाता है इतना ही नहीं बैलगाड़ी भी इस कीचड़ भरे दलदल में फस कर रह जाती है, सरकारी योजना का बखान तो किया जाता है पर सरकारी योजनाओं का क्या लाभ है इस दिव्यांग से पूछे जो कीचड़ में फंसी अपनी साइकिल को निकालने के लिए औरों की मदद ले रहा है,

कांग्रेसी विधायक योगेंद्र सिंह बाबा की विधानसभा का यह क्षेत्र आज भी मूलभूत सुविधाओं से मोहताज है डिजिटल इंडिया के सपने जरूर देखे जा रहे हैं पर जिला प्रशासन और स्थानीय प्रशासन की लापरवाही और कर्मचारियों की बेरुखी के चलते आज भी लखनादौन विधानसभा में ऐसे गांव हैं जहां मूलभूत सुविधाएं तो दूर पैदल चलने के लिए रोड भी नहीं है।

गांव के पंच की माने तो जिला कलेक्टर से लेकर एसडीएम और जनपद सीईओ को भी इनकी परेशानियों की जानकारी है पर लापरवाह प्रशासन ना तो इनकी सुनता है और ना ही सुध लेता है भला हो ग्राम पंचायत के सरपंच सचिवों का जिन्होंने रोड को दल दल के रूप में बनाकर सरकारी राशि को खर्च तो कर दी पर चलने योग बना नहीं पाए।

अब जब बात मीडिया तक पहुंची तो अधिकारी कैमरे के सामने बोलने से कतराते हुए यह कह दिया कि मामला संज्ञान में है जल्द से जल्द गांव में पक्की सड़क बनवाई जाएगी अब देखना होगा कि और कब तक यह ग्रामीण यूं ही बदहाली की जिंदगी जीते हैं।


वाइट

1-अरत सिरसाम पंच

2-अनिता ग्रामीण


रेवांचल टाइम्स से मुकेश जायसवाल की रिपोर्ट

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