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Wednesday, September 23, 2020

देश के अन्नदाता का फरमान कृषि बिल के खिलाफ प्रदेश भर में विरोध प्रदर्शन जारी


रेवांचल टाइम्स  - 24 सितम्बर को अपनी प्रमुख मांगों को लेकर किसानों के द्वारा आयोजित आंदोलन  रैली का आम आदमी पार्टी सिवनी समर्थन करती है  उक्त जानकारी आम आदमी पार्टी के जिला मीडिया प्रभारी के द्वारा जारी अपनी  प्रेस विज्ञप्ति में दी है 

  राजेश पटेल ने बताया कि किसानों के अधिकार व सम्मान की लड़ाई में आम आदमी पार्टी किसानों के साथ है व महंगाई के इस दौर में  किसानों के द्वारा रखी गई प्रमुख माँगो जिसमे अतिवृष्टि से हुई फसल छति मुआवजा राशि 50000/हेक्ट.,फसल बीमा का शत प्रतिशत लाभ सुनिश्चित किये जाने,बची हुई फसल को न्यूनतम समर्थन मूल्य पर विनिश्चय किये जाने,विगत सरकार द्वारा किसानों की 2 लाख रुपये तक की बची हुई कर्जमाफी , किसान विरोधी अध्यादेश को वापस लिए जाने,खेत सड़क योजना अन्तर्गत मार्गो का निर्माण करने जैसी प्रमुख माँगो का समर्थंन करती है।

उक्त प्रमुख माँगो को लेकर पूर्व में भी आप ने जिला कलेक्टर के माध्यम से  मुख्यमंत्री को ज्ञापन प्रेषित किया था ।

इस रैली आंदोलन के आयोजक  जागरूक सभी किसान भाइयों का आभार के साथ आम आदमी पार्टी आमजन से अपील करती है कि अन्नदाता किसानो के समर्थन में आगे आकर कार्यक्रम को सफल बनायें,व कोरोना जैसी महामारी के आवश्यक दिशा निर्देशों का पालन भी करे ।

कृषि अध्यादेश के विरोध में प्रदर्शन करेगी व सौपेगी ज्ञापन


श राजेश पटेल ने आगे बताया है कि आम आदमी पार्टी कृषि अध्यादेश के विरोध में राष्ट्रीय स्तर पर संसद से सड़क तक  विरोध कर रही है इसी तारतम्य में  मध्यप्रदेश में भी प्रदेश अध्यक्ष श्री पंकज सिंह के नेतृत्व में 24 सितम्बर को पूरे प्रदेश में शांतिपूर्ण प्रर्दशन होगा व सिवनी  में जिला अध्यक्ष अधिवक्ता दुर्गेश विश्वकर्मा के नेतृव में अध्यादेश में हस्ताक्षर नही किये जाने की माँग का ज्ञापन राष्ट्रपति के नाम सौपेगी  भारत एक कृषि प्रधान देश हैं।अर्थ व्यवस्था की रीड़ कहे जाने वाले किसानों के आर्थिक सामाजिक ताने बाने को छिन बिन करने वाला ये काला कानून किसान की जमीन किसान का बीज और उसकी मेहनत फिर भी बह अपने खेत में मजदूर कहलायेगा। फायदा पूंजीपति उठायेगा। किसान के स्वाभिमान पर चौट हैं। किसान को बर्बाद करने उसका भविष्य खराब करने की साजिश हैं।

     

         क्या देश पुनः सांमातवाद पूंजीपति व्यवस्था की ओर लौट रहा हैं। आजादी से पहले वाला वही उत्पीड़न तंगहाली गरीबी भुखमरी और अभाव की जिन्दगी जीने पर भारतीयों को षणयंत्र पूर्वक मजबूर किया जा स्हा हैं।


                क्या? हमारा प्रजातंत्र पूंजीपतिओं के हाथ की कठपुतली बनने जा रहा हैं। मतदान किया हैं तो काले कानून का विरोध भी करना होगा।

         

अखिलेश बंदेवार कै साथ रेवांचल टाइम्स की एक रिपोर्ट

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