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Wednesday, September 30, 2020

ना बैरिकेटिंग ना सेनेटाइजेशंन, रस्सी बांध कर निभाई जा रही औपचारिकता...



रेवांचल टाइम्स - जिले में कोरोना अब अपना विक्राल रूप दिखाने लगा है, कोरोना संक्रमितों की संख्या एक हजार के पार पहुच गई है, लगातार स्थिति बिगड़ती जा रही है, जाच में रोजाना बड़ी संख्या में नए संक्रमित सामने आ रहे है, 20 मार्च से लेकर 31 जुलाई तक 134 दिन में जिले में महज 175 कोरोना संक्रमित थे, जैसे ही पंबंदिया और बंदिशे हटी और सड़को से लेकर बाजार तक भीड़ बढ़ी वैसे वैसे संक्रमण भी उतनी ही तेजी से फैलता गया, प्रशासन की सख्ती भी अचानक ख़त्म हो गई, जिसका खामियाजा यह रहा की अनलॉक के 55 दिन में ही रिकॉर्ड 1000 नए कोरोना संक्रमित मिले, कम्यूनिटी स्प्रेड जैसे हालात के बीच अब तक एक हजार से ज्यादा लोगो को कोरोना अपनी चपेट में ले चूका है, वही जिले में अब तक कई लोग इसकी चपेट में आकर अपनी जान गवा चुके है, इसी क्रम में मंगलवार को कोरोना ने जिले में अब तक के सभी रिकॉर्ड तोड़ दिए, जिले में एक दिन में अब तक के सबसे ज्यादा रिकॉर्ड 53 नए मरीज मिले इसमें 19 छिन्दवाड़ा के शहरी क्षेत्र से है, वही 3 संक्रमितों की इलाज के दौरान मौत हुई, वर्तमान हालात को देख कर यह अंदाजा लगाया जा सकता है की अब जिले में संक्रमण कम्यूनिटी स्प्रेड के दौर में पहुच गया है।


ठीक ढंग से नही हो रहा सेनेटाइजेशंन


शहर में लगातार कोरोना संक्रमण बढ़ता जा रहा है, स्थिति लगातार बिगड़ रही है, गली मोहल्लों से रोजाना नए नए संक्रमित निकल कर सामने आ रहे है, पुरानी घनी बस्तिया हो या नई हाऊसिंग कॉलोनीया ऐसा कोई क्षेत्र नही बचा है जहा संक्रमण न पंहुचा हो, वही लगातार लोगो की इससे मौते हो रही है, विगत एक सप्ताह से रोजाना मृतकों की संख्या में इजाफा हो रहा है, जहा एक तरफ संक्रमण बढ़ रहा है वही दूसरी तरफ इस्से बचाव के लिए होने वाली व्यवस्थाये लडखडाती नजर आ रही है, संक्रमण को रोकने के लिए जो जरुरी कदम उठाये भी जा रहे है तो वो न काफी साबित हो रहे है, अगर किसी भी क्षेत्र में या कही भी कोई कोरोना संक्रमित मिलता है तो सबसे पहले उस घर को छेत्र को सेनेटाइज किया जाना सबसे ज्यादा जरुरी होता है जिस्से की वहा फैले संक्रमण को पूरी तरह ख़त्म किया जा सके, मगर वर्तमान में सबसे ज्यादा समस्या सेनेटाइजिंग को लेकर ही सामने आ रही है, जो काम सबसे पहले होना चाहिए वो कई इलाको में नही किया जा रहा है, संक्रमित मिलने वाले या किसी संक्रमित की मृत्यु होने पर उसके घर को और उसके आस पास के इलाको में समय पर सेनेटाइजेशंन का छिड़काव नही होना आगे समस्या को और बढ़ा भी सकता है, ऐसी ही शिकायते शहर की कॉलोनियों और विभिन्न इलाको से मिल रही है, सेनेटाइजेशन का कार्य समय पर नही होने से संक्रमित व्यक्तियो के घरो के आस पास रहने वाले अन्य नागरिको में भय का वातावरण निर्मित हो रहा है, साथ ही समय पर दवा का छिड़काव नही होने से स्नक्रमन के अन्य लोगो में फैलने का भी डर बना रहता है, जिम्मेदार विभाग को इस और ध्यान देना चाहिए और जल्द से जल्द शहर में सेनेटाइजेशंन के कार्य में सुधार कर अच्छी व्यवस्था बनानी चाहिए जिस्से की संक्रमण को फैलने से रोका जा सके।


बड़ी मशीन गायब


कोरोना काल के शुरुवाती दौर में जब शहर में संक्रमण न के बराबर था, जहा कभी कभार हफ्ते भर में इक्का दुक्का संक्रमित मिला करते थे उस दौर में नगरनिगम द्वारा बाहर से दो विशेष अत्याधुनिक सेनेटाइजर मशीने बुलवाई थी, जो की विशेष रूप से सेनेटाइजर छिड़काव के कार्य के लिए ही बनाई गई थी, इन मशीनों को बड़े विशाल जनरेटर की सहायता से चलाया जाता था, यह मशीने बड़ी और उची इमारतों के साथ लंबी दुरी तक दवा का छिड़काव करने में भी सक्षम थी, संक्रमण के प्रथम दौर में इस मशीनों से ही शहर को रोजाना सेनेटाइज किया जाता था, प्रत्येक गली मोहल्ले के साथ मुख़्य बाजार और सड़को पर सुबह शाम इस्से दवा का छिड़काव होता था, यह मशीने काफी हद तक संक्रमण को रोकने में मदतगार साबित हुई, मगर जैसे ही शहर में अब संक्रमण की रफ़्तार बढ़ी तो यह मशीने कही नजर नही आ रही है, हमें कहे तो यह अत्याधुनिक सेनेटाइजर मशीने कही गायब हो गई है, जब संक्रमण नही के बराबर था तब बड़ी मशीनों से रोजाना पुरे शहर को सेनेटाइज किया जाता था, दुकान से लेकर प्रत्येक घर हर वार्ड में इन मशीनों से दवा का छिड़काव किया गया, वही जब आज कोरोना अपना विक्राल रूप दिखा रहा है और हर भीड़ भाड़ वाली जगहो में सबसे ज्यादा सेनेटाइजेशंन की जरुरत है तब निगम की यह बड़ी मशीने कही नजर नही आ रही है, बढ़ते संक्रमण को रोकने और आमजन की सुरक्षा को देखते हुए तत्काल इन मशीनों को वापस फिर से शुरू कर पुरे शहर को सुबह शाम सेनेटाइज किया जाना चाहिए, जो काम पूर्व में लॉकडाउन के समय किया गया उस काम की सबसे ज्यादा जरुरत आज अनलॉक में है।

एक छोटे फायर वाहन के भरोसे पूरा शहर


समय पर सब जगह सेनेटाइजेशंन न होना इसकी सबसे बड़ी वजह से संसाधनों की कमी, अगर हम बात करे वर्तमान स्थिति की तो आज पूरा शहर निगम की एक छोटी बनाई गई सेनेटाइजर मशीन के भरोसे है, नगरनिगम का एक छोटा फायर वाहन जिसका इस्तमाल सकरी छोटी गलियो और घनी बस्तियों में आगजनी की घटना होने पर आग बुझाने के लिए किया जाता था आज उसी वाहन का इस्तमाल सेनेटाइजेशंन के लिए किया जा रहा है, वाहन छोटा होने और टेंक छमता कम होने की वजह से वह जरा से छिड़काव के बाद खाली हो जाता है जिस्से वाहन को दिन में कई बार कई राउंड वापस भरने के लिए कर्मचारियों को दौड़ना पड़ता है, जिसके चलते समय ख़राब होता है और कार्य भी प्रभावित होता है और ज्यादा इलाका कवर नही हो पाता, शहर में लगातार बढ़ते कोरोना संक्रमण और बढ़ते संक्रमित इलाको को देखते हुए अब सेनेटाइजेशन के लिए संसाधन और मशीने बढ़ाये जाने की आवश्यकता है, वर्तमान में अगर हम बात करे तो पिछले एक सप्ताह से ज्यादा समय से मृतकों की संख्या में लगातार इजाफा हो रहा है, जो छोटा वाहन इस कार्य में लगा हुआ है वह अस्पताल से लेकर मोक्षधाम तक ही सिमित है, जिसके चलते शहर के अन्य इलाको में समय पर सेमेटाइजेशन नही हो पा रहा है, वही दिनों दिन संक्रमितों की संख्या भी लगातार बढ़ रही है, नए नए इलाके संक्रमित क्षेत्रो की सूचि में जुड़ते जा रहे है, इन्ही सब बातो को देखते हुए अब दवा छिड़काव के लिए इस छोटे वाहन के अलावा अलग से पूर्व में शरू की गई बड़ी मशीन लगाये जाने की जरुरत है, जिस्से की संक्रमण को फैलने से समय पर रोका जा सके।


रस्सी बांध कर निभाई जा रही औपचारिकता


छिन्दवाड़ा शहर सहित जिले की तहसीलों में विगत कुछ दिनों से कोरोना संक्रमण की रफ़्तार तेज हो गई है, लगातार आये दिन दर्जनों नए संक्रमित मिल रहे है, अब संक्रमण शहर की घनी बस्तीयो और पॉश इलाको तक पहुच गया है, इसी के साथ कंटेंटमेंट क्षेत्रो का दायरा और संख्या भी लगातार बढ़ती जा रही है, रोज शहर के नए नए इलाके कंटेंनमेंट छेत्र घोषित हो रहे है, ऐसे में इन क्षेत्रो में जो व्यवस्थाये होनी चाहिए वो नही हो रही है न ही ठीक ढंग से इन इलाको को सील किया जा रहा है, स्थिति यह है की बैरिकेटिंग तक नही की जा रही है बस खाना पूर्ति के लिए रस्सी बांध कर कंटेंनमेंट छेत्रो को कवर सिल किया जा रहा है, जिस घर में संक्रमित मिलता है उस घर को पूरी तरह से सिल किया जाना चाहिए, जिस्से की उस घर से संक्रमण बाहर कही और दूसरे इलाके में न फैले साथ ही उस परिवार से सभी सदस्यों को अन्य किसी बाहरी व्यक्ति के संपर्क में आने से रोका जा सके, मगर छिन्दवाड़ा में संक्रमित इलाको की सिलींग तक ठीक से नही हो रही है, बस सिंगल रस्सी बांध कर औपचारिकता रस्म अदायगी निभाई जा रही है, कंटेंनमेंट छेत्र महज कागजो तक सिमित है, उसीका नतीजा है की संक्रमित और कंटेंनमेंट इलाको के लोग बिना किसी डर के खुलेआम शहर में घूम रहे है, रस्सी के ऊपर निचे से आवा जाही हो रही है, प्रशासन कंटेंनमेंट इलाको में भी सही ढंग से नियमो और बंदिशो का पालन नही करवा पा रहा है, जल्द व्यवस्था में सुधार कर कंटेंनमेंट क्षेत्रो को रस्सी की जगह लोहे की ग्रिल या बास बल्ली की बैरिकेटिंग कर निधारित समय अवधि के लिए पूरी तरह सील किया जाना चाहिए, कंटेंनमेंट इलाके के घरो में आवा जाही और उस घर के लोगो के घर से बाहर निकलने और घुमने फिरने पर पूरी तरह सख्ती से रोक लगाई जाये, कंटेंनमेंट क्षेत्रो में सख्ती से लॉक डाउन का पालन होना चाहिए, इस क्षेत्रो में मौजूद व्यापारिक प्रतिष्ठान बंद रखे जाने चाहिए जिससे की संक्रमण को फैलने से रोका जा सके।

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