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Monday, September 28, 2020

जल संरक्षण के बड़े-बड़े वादे, कागजों तक ही रह गए सीमित





रेवांचल टाइम्स - आदिवासी बाहुल्य क्षेत्र मंडला में जल संरक्षण को लेकर केंद्र सरकार और राज्य सरकार ने करोड़ों अरबों रुपए पानी की तरह प्रत्येक जिले को दिए गए और सैकड़ों स्टाप डेम, रपटा-सह स्टोरेज, एनीकट,चेक डैम बनाए गए परंतु बनाए गए उक्त निर्माण कार्य में पानी का संरक्षण नहीं किया गया।जल संरक्षण को लेकर सरकार ने बड़े-बड़े दावे किए लेकिन सरकार के सारे दावे कागजों तक सीमित होकर रह गए। निर्माण कार्य के नाम से इस आदिवासी बाहुल्य क्षेत्र में अधिकारी कर्मचारी सिर्फ अपना घर भरा।आज भी पूरे जिले में छोटे से लेकर बड़े नदी नालों में बने एनीकट,स्टाप डेम दुर्दशा का शिकार होकर अपनी दशा में स्वयं आंसू बहा रहें हैं।एक-एक नदी नाले में सात से आठ स्टाप डेम लगातार बनाए गए,परंतु निर्माण कार्य होने के एक ही साल में अर्थ वर्क उखड़ कर अनेकों जगह से दरारे होकर निर्माण कार्य के परखच्चे उड़ गए,जिसके चलते पानी नहीं ठहर पाया,सिर्फ अधिकारी कर्मचारी रुपए कमाने के लिए घटिया निर्माण कर उक्त निर्माण कार्य को उनकी दशा में ही छोड़ दिया गया।जिसके चलते आज मंडला जिले के बहुत से क्षेत्र में पानी की त्राहि-त्राहि मच जाती हैं। समय रहते अगर बने स्टाप डेम का मेंटेनेंस कर गेट लगाकर जल का संरक्षण नहीं किया गया तो आने वाली भीषण गर्मी में पानी की त्राहि-त्राहि मच जाएगी।


सांसद मद से भी बनाए गए करोड़ों के स्टाप डेम


        बता दे कि सांसद मद से सिंचाई विभाग द्वारा सैकड़ों निर्माण कार्य किए गए और निर्माण कार्य के नाम से अधिकारी कर्मचारी  करोड़ों रुपए की होली खेली गई जैसे उन्हें ससुराल से दहेज में मिली हो,और सांसद महोदय ने अपने मद से कराए गए निर्माण कार्यों की मौके में जाकर कभी सुध तक नहीं ली होगी।


करोड़ों के बनाए गए विशालकाय स्टाप डेम में नहीं रुकता पानी


       उल्लेखनीय हैं कि कृषि को बढ़ावा देने के लिए ऐसे क्षेत्रों में एनीकट स्टाप डेम बनाए गए जहां पानी की व्यवस्था न हो और स्टाप बनाने से जल का संरक्षण हो सके लेकिन पढ़ती भूमियों में कृषि उपज तो हो न सकी परंतु अधिकारी कर्मचारियों की जमकर रुपयों की उपज हो गईं।वोट की राजनीति करने वाले मंडला जिले के आदिवासी नेता के द्वारा आज भी बने विशालकाय स्टाप डेम, एनीकटो को मौके स्थल पर जाकर नहीं देखे होंगे। जिस उद्देश्य से एनीकट,स्टाप डेम बनाए गए उस उद्देश्य का लक्ष्य आज तक पूरा नहीं हो पाया।बने स्टाप डेम, एनीकट आज भी अनुपयोगी पढ़े हुए हैं। आज आदिवासी नेता आदिवासी की योजना से ही भ्रष्टाचार कर अपना और अपने परिवार की तरक्की करने में लगा हुआ हैं। वोट की राजनीति करने वाले आदिवासी नेता आज भी आदिवासी की योजनाओं से खिलवाड़ कर आदिवासियों को ही लूटने में लगे हुए।

समय रहते स्टाप डेमों में पानी नहीं रोका गया तो आने वाली गर्मी में पानी की मच सकती हैं त्राहि-त्राहि,जागो नेता जागो अधिकारी।


रेवांचल टाइम्स से शिव दोहरे की रिपोर्ट

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