विकास की खोज और भ्रष्टाचार का सामना - revanchal times new

revanchal times new

निष्पक्ष एवं सत्य का प्रवर्तक

Breaking

रेवांचल टाइम्स अखबार पाठकों से अनुरोध करता है कि आप अपने सुझाव हम तक जरूर भेजें.. ताकि आने वाले समय मे हम आपकी मदद से और भी बेहतर कार्य कर सकें... साथ ही यदि आपको लेख अच्छा लगे तो इसे ओरों तक भी पहुंचाए.. प्रकाशन हेतु ख़बरें, विज्ञप्ति मोबाइल- 9406771592 पर व्हाट्सएप्प करें

Friday, September 18, 2020

विकास की खोज और भ्रष्टाचार का सामना


रेवांचल टाइम्स - आदिवासी जिला मंडला जो एक अदुभुत शान्तिपूर्ण मनोरम है जहाँ आदिवासी संस्कृति है और अनेक ऐसे स्थान है जो कि अपने आप मे खुद ही विश्व मे जाने जाते है।

हम बात करे इस आदिवासी जिला मंडला जो कि प्रकृति सौंदर्य से परिपूर्ण है इस जिले में दो दो सांसद भी है और रही बात विकास की तो वो किस चिड़िया का नाम है वो यहाँ के लोग नही जानते जबकि इस आदिवासी जिला के विकास के नाम प्रति वर्ष लाखो करोड़ो रूपये आते है पर जाते कहाँ है और विकास कहाँ है ये सब इस जिले पर रहने वाले जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों का जरूर ही विकास हो जाता है पर जिले में निवास रत भोले भाले आदिवासी आज भी विकास और अच्छे दिन का इंतजार कर रहे है और शासन प्रशासन से मिलने वाली मूलभूत सुविधाएं का भी इंतजार कर रहे है।



       बीजाडांडी आत्म निर्भर भारत और विकास की एक तस्वीर मन मे लिए हम निकल पड़े थे एक ऐसी जगह जहां आत्म निर्भरता, विकास,शिक्षा,स्वास्थ, रोजगार,जागरूकता,और रहन-सहन हमे सब देखने मिला लेकिन एक तश्वीर हमे देखने को मिली वह थी भृष्टाचार से लड़ता विकास आपको बताते हैं कि हम बात कर रहे थे मंडला जिले के जनपद पंचायत बीजाडांडी अंतर्गत ग्राम पंचायत मैली ओर मैली पंचायत के ही पोषक गांव मूसाखोह की जो कि नर्मदा की गोद मे बसा है गांव जाने के लिए मैली से नर्मदा तट किनारे पर छोटी नाव मिलती है ओर 15-20 रु. उसका किराया लगता है  मूसाखोह में अधिकतर लोग कृषी पर आश्रित है और कुछ कश्ती चला कर लोगो इस पार से उस पार लोगो ले जाने का भी काम करते हैं जिससे उनका कुछ खर्चा निकल जाता है या यूं कहा जाए यही उनका रोजगार है गांव पर कुछ लोगो से बात करने पर पता चला कि स्वास्थ्य सुविधा नही है बीमार होने पर नाव से मैली जाना पड़ता फिर बीजाडांडी, गांव में रोड भी जो कि उदयपुर निकलती है पर गाड़िया नही चलती है खुदका ही वाहन हो तो ठीक है वही शिक्षा के लिए प्राथमिक शाला और माध्यमिक शाला है पर स्कूल में बाउंड्रीवाल शासन द्वारा बनवाना था और तारीफ करे शिक्षा विभाग के उपयंत्री की जो कि कितनी हिम्मत है इनकी जो जमीन में बाउंड्री वाल का एक भी ईट नही लगाई और काग़ज़ में बाउंड्री वाल बनाकर पूर्ण कर दी वही शासन के पोर्टल में एंट्री कर रेडी फार यूज कर दी और राशि निकाल ली गई अब आप समझ सकते है कि जमीनी हकीकत काग़ज़ की खानापूर्ति कर किस तरह से ऑनलाइन का फायदा उठाया जा रहा है और जिम्मेदार आखिर क्या कर रहे ये बात किसी से छिपी नही।



             वही स्कूलों में कोई रैगुलर टीचर नही है गेस्ट से ऑफिस का कार्य कराया जा रहा है और रही बात अभी तो वह भी बंद पड़े हुए हैं उनमें सीमेंट, रेत ,सेंटिंग रखी है पूछने पर पता चला स्कूल के सामने ही सर्वाजनिक शौचालय का निर्माण चल रहा है वह पंचायत करवा रही है देखने मे पाया गया  कि वह ठीक माध्यमिक शाला के दरवाजा के सामने  बन रहा जो कि उचित नही है और निर्माण कार्य भी गुनवक्ताहीन है जहां पर भ्रष्टाचार और गैरजिम्मेदारी खुल कर सामने आ रही है विकास ओर विकास कार्य पर कुछ लोगो ने हमे जम के सुनाई कहा सरकार हमे रोजगार दे खाने को दाना नही है सार्वजनिक शौचालय निर्माण करवा रहे हैं हमारी कोई सुध ही नही लेता सरपंच,सचिव भी कभी कभी नही  आते है। और ग्राम पंचायत भवन तो केवल देखने के लिए ही बनाया गया है जो कभी खुलता ही नही है। यहाँ पर लोग आज भी 18 वी सदी में जी रहै है।

 रेवांचल टाइम्स से रवि झरिया की रिपोर्ट

No comments:

Post a Comment