रेवांचल टाइम्स - जिले के आज शहर से लेकर गाँव गाँव तक रखा गया हल छठ का व्रत वही भाई बहन नाला में सामूहिक रूप से हलषष्ठी व्रत की पूजा किया गया पूजा में अपनी संतान की लंबी उम्र के लिए हरछठ की पूजा के रूप में माताओ ने संतान की लंबी उम्र व उनकी सुख-समृद्घि की कामना से दिनभर निर्जला व्रत रखा और पूजन के बाद बिना हल लगे अन्न से व्रत का परायण किया व्रत पूजन के बाद माताओ ने अपनी संतान को पोता लगाकर शुभाषीश भी दी माताएं पूजन सामूहिक रूप से मंदिरों में करती लेकिन रविवार को घर मे हलष्षठी व्रत पर्व मनाया गया कोरोना संक्रमण को देखते हुए इस बार मंदिरों में सामूहिक आयोजन नहीं होगा। इसके लिए मंदिरों में बाकायदा सूचना लगा दी गई है ताकि पर्व के दिन मंदिरों में भीड़ जमा न हो सके और व्रतियों को निराश होकर लौटना नहीं पड़े। रविवार को भाद्रपद कृष्णपक्ष की षष्टी तिथि में हलषष्टी व्रत आस्था और भक्ति के साथ मनाया गया इस व्रत को शास्त्रों में भी संतान की रक्षा के लिए श्रेष्ठ बताया गया है। इससे सुबह से ही घरों में आस्था और भक्ति का माहौल रहा घरों में पूजा-अर्चना भी हुई
क्या है व्रत महत्व
व्रत में शक्कर और मिट्टी की चुकिया, सात प्रकार के अन्न (जौ, गेहूं, चना, धान, अरहर, मूंग, मक्का), पांच प्रकार की भाजी और महुआ, आम, पलास की पत्ती, कांसी के फूल, नारियल, मिठाई, रोली-अक्षत, फल, फूल से पूजन किया जाता है। साथ ही भैंस के दूध से बने दही और घी का भी विशेष महत्व है।
देर शाम होगा परायण
इस व्रत में हल लगा अन्न और गाय के दूध से बनी खाद्य सामग्री वर्जित है। इस वजह से रविवार देर शाम माताएं व्रत का परायण भैंस के दूध व उससे बने घी, दही के साथ पसहर चावल और बिना हल लगे अन्न, सब्जी और फलों से व्रत का परायण करेंगी आज व्रत रही महिलाओं में प्रमुख गोदावरी राय, सरस्वती धुर्वे जनपद सदस्य, नर्मदा बाई राय , चंपा बाई शिवहरे, ज्योति राय, अंकिता बाई टांडिया, मुगली बाई, ओर समस्त महिलाएं सामूहिक किया गया

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