रेवांचल टाइम्स - आदिवासी बाहुल्य जिला मंडला में एक मामला सामने आया हैं जो कि एक रेंजर के द्वारा तिरंगे झण्डे का अपमान करते हुए जूते पहनकर तिरंगा झण्डा को फहराया गया हैं,साथ ही तिरंगे झण्डे में लगने वाली डोरी रेंजर के पैरों और जूते में लिपटी रही,इसके बाद भी रेंजर द्वारा तिरंगे झण्डे का सम्मान ना करते हुए जूते पहनकर फहराकर अपमान किया गया। सूत्रों से मिली जानकारी अनुसार वन परिक्षेत्र अधिकारी बफर जोन वन मंडल कान्हा टाइगर रिजर्व कार्यालय सिझौरा में पदस्थ रेंजर सीताराम राजुरकर के द्वारा बीते 15 अगस्त के अवसर पर राष्ट्रीय ध्वज तिरंगा झण्डा को सम्मान न करते हुए फहराया गया।जिसमें रेंजर श्री राजुरकर के द्वारा जूते पहन कर राष्ट्र ध्वज को फहराकर साथ ही राष्ट्र ध्वज में लगी रस्सी को अपमानित किया गया, इसी दौरान राष्ट्रीय ध्वज में लगने वाली डोरी भी रेंजर साहब के पैर एवं जूतों में लिपटी रहीं परंतु रेंजर व उनके साथ उपस्थित वन विभाग के लोगों के द्वारा रेंजर को यह भी नहीं बताया गया कि आपके द्वारा राष्ट्रीय ध्वज का अपमान किया जा रहा हैं।ऐसे में रेंजर के साथ खड़े रहे सभी कर्मचारी सब कुछ देख कर भी मूकबधिर बने रहें पर इन सभी के द्वारा रेंजर को कोई नहीं बताया गया कि आपके द्वारा जूते पहन कर झण्डा फहराया जा रहा हैं जो राष्ट्रीय ध्वज का अपमान हैं। रेंजर के साथ उपस्थित वन कर्मचारीयों के विरुद्ध भी राष्ट्रीय ध्वज का अपमान करने का मामला दर्ज कर कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए जिससे भविष्य में अधिकारी कर्मचारी देश की आन बान और शान राष्ट्रीय ध्वज तिरंगा झण्डा का अपमान न कर सकें।
देश की आन बान और शान के लिए कितने वीर जवान हुए शहीद
बता दें कि बफर जोन सिझौरा रेंज के रेंजर को इतना भी ज्ञान नहीं हैं कि जिस देश की रक्षा करने के लिए देश के कितने वीर जवान व देश के ईमानदार नेता देश की रक्षा करते हुए शहीद हो गए।देश में स्वतंत्रता दिवस और गणतंत्र दिवस के अवसर पर पूरा देश खुशियों के साथ देश की आन बान और शान के लिए राष्ट्रीय ध्वज तिरंगा झण्डा फहराकर पूरा देश एकता की मिसाल पेश करता हैं और राष्ट्रीय ध्वज तिरंगा झण्डा को सा-सम्मान के साथ फहराकर समय सीमा में तिरंगे झण्डा को उतारकर रख दिया जाता हैं।परंतु रेंजर साहब एक जिम्मेदार पद में होने के बावजूद भी उनके पैरों से जूता नहीं उतारा गया और जूते पहनकर ही तिरंगे झण्डे को फहरा दिया गया। साथ ही अधिकारी कर्मचारी के द्वारा इस तरह का कृत्य किया जाना बहुत ही विडंबना की बात हैं।
रेंजर साहब कहते हैं कुछ नहीं होता आपको जो छापना हैं छाप दो
रेंजर साहब से मुलाकात कर उक्त संबंध में पूछा गया कि आपके द्वारा कुछ क्षणों के लिए राष्ट्रीय ध्वज फहराने के लिए आप से जूता भी उतारा नहीं गया,तो रेंजर साहब के द्वारा बोला गया कि कुछ नहीं होता हैं,अधिकारी कर्मचारी इसी तरह झण्डा फहरा देते हैं, इसमें कौन सी बड़ी बात हो गईं।आपको जो छापना हैं छाप दो और जो दिखाना हैं तो दिखा दो। इस तरह के अल्फाज एक जिम्मेदार अधिकारी के द्वारा किए जाते हैं। ऐसे अधिकारी कर्मचारी के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए।
इनका कहना
मामला आपने संज्ञान में लाया हैं की सिझोरा रेंजर के द्वारा राष्ट्रीय ध्वज का अपमान किया गया राष्ट्रीय ध्वज के अपमान करने के संबंध में जो भी नियम होंगे,नियम देखकर संबंधित के विरूद्ध कार्यवाही की जावेगी।
एल.कृष्णमूर्ति
कान्हा टाइगर रिजर्व मंडला।


No comments:
Post a Comment